Ahmedabad Crypto Hawala Racket : अहमदाबाद से संचालित एक कथित अंतरराष्ट्रीय क्रिप्टो-हवाला नेटवर्क का गुजरात साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ने पर्दाफाश किया है, जिसके तार हमास समर्थित नेटवर्क, डार्क वेब ड्रग सिंडिकेट, ब्रिटेन की जेल में बंद आरोपी और कई देशों में फैले संदिग्ध क्रिप्टो ट्रांजैक्शन से जुड़े पाए गए हैं। जांच एजेंसियों के मुताबिक, यह नेटवर्क कम से कम सात देशों तक फैला हुआ था और करीब 226 करोड़ रुपये के संदिग्ध क्रिप्टो लेनदेन की जांच की जा रही है। इस पूरे मामले में अब तक नौ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस का दावा है कि गिरोह डार्क वेब, ड्रग्स कारोबार, टेरर फाइनेंसिंग और हवाला चैनलों से आने वाली “डर्टी क्रिप्टो” को USDT में बदलकर नकदी में कन्वर्ट करता था और फिर विभिन्न देशों में सक्रिय नेटवर्क तक पहुंचाता था।
हमास लिंक से खुला पूरा नेटवर्क
जांच की शुरुआत एक संदिग्ध भारतीय IP एड्रेस से हुई, जो कथित तौर पर ऑनलाइन ड्रग ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म “Artemis Lab” से क्रिप्टो फंड प्राप्त कर रहा था। तकनीकी विश्लेषण में यह IP अहमदाबाद निवासी मोहसिन सादिक मुलानी तक पहुंचा। उसके बाद पुलिस ने उससे जुड़े कई क्रिप्टो वॉलेट्स का विश्लेषण किया।
इसी जांच में एक बड़ा खुलासा तब हुआ जब कुछ ट्रांजैक्शन ऐसे वॉलेट्स से जुड़े मिले जिन्हें इजराइल की एजेंसी NBCTF ने 2025 में सीज किया था। पुलिस के मुताबिक, ये वॉलेट्स गाजा आधारित “अल-काहिरा” नेटवर्क के जरिए हमास तक फंडिंग पहुंचाने के आरोप में जांच के दायरे में थे। जांच में सामने आया कि इन वॉलेट्स से फंड मोहम्मद जुबैर पोपटिया नामक व्यक्ति के वॉलेट तक पहुंचा और वहां से यह रकम गुजरात में सक्रिय नेटवर्क तक आई। अमेरिकी एजेंसी OFAC ने भी जुबैर पोपटिया के वॉलेट को यमन के हूती संगठन “अंसार अल्लाह” से जुड़े क्लस्टर में मार्क किया हुआ है।
7 देशों तक फैला नेटवर्क (Ahmedabad Crypto Hawala Racket)
जांच एजेंसियों के अनुसार, इस नेटवर्क के लिंक भारत, ब्रिटेन, इजराइल, यमन, ईरान, तुर्की और गाजा-पैलेस्टाइन तक मिले हैं। इसके अलावा रूस से जुड़े एक संगठन के फंड ट्रांसफर का इनपुट भी एजेंसियों को मिला है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, तुर्की के जरिए कई फंड रूट किए जाते थे। मामले में सामने आया सलमान अंसारी नामक आरोपी ब्रिटेन में ड्रग तस्करी मामले में 2024 से जेल में बंद है और उसे वहां की अदालत छह साल की सजा सुना चुकी है। इसके बावजूद एजेंसियों को इनपुट मिले हैं कि मार्च 2026 तक वह जेल के भीतर से भी नेटवर्क ऑपरेट कर रहा था।
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी टेलीग्राम ग्रुप्स और डार्क वेब के जरिए ब्रिटेन में ड्रग्स ऑर्डर लेते थे। बाद में रॉयल पार्सल चैनल के माध्यम से कथित तौर पर ड्रग्स की डिलीवरी की जाती थी और भुगतान क्रिप्टोकरेंसी में लिया जाता था।
क्या है Monero, जिसे ट्रेस करना बेहद मुश्किल माना जाता है?
इस पूरे नेटवर्क में सबसे अहम और खतरनाक कड़ी “Monero” नाम की क्रिप्टोकरेंसी को माना जा रहा है। गुजरात पुलिस को आरोपियों के पास से दो Monero वॉलेट्स मिले हैं, जिनमें दो करोड़ रुपये से ज्यादा के ट्रांजैक्शन का पता चला है। Monero एक “Privacy Coin” है। सामान्य क्रिप्टोकरेंसी जैसे Bitcoin या Ethereum के ट्रांजैक्शन ब्लॉकचेन पर सार्वजनिक रूप से देखे जा सकते हैं। हालांकि नाम सीधे नहीं दिखते, लेकिन वॉलेट एड्रेस, ट्रांजैक्शन फ्लो और पैटर्न को ट्रैक करके एजेंसियां कई बार पैसे की चेन तक पहुंच जाती हैं।
लेकिन Monero अलग तरीके से काम करता है।
इसमें “Ring Signatures”, “Stealth Addresses” और “Confidential Transactions” जैसी तकनीक का इस्तेमाल होता है। आसान भाषा में समझें तो:
- भेजने वाला कौन है
- पैसा किसे गया
- कितनी रकम भेजी गई
यही कारण है कि डार्क वेब मार्केट, ड्रग कार्टेल, रैनसमवेयर गैंग और टेरर फाइनेंसिंग नेटवर्क Monero को प्राथमिकता देते हैं। अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां भी कई बार मान चुकी हैं कि Monero ट्रैक करना Bitcoin की तुलना में कहीं ज्यादा कठिन है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, यही वजह है कि आरोपी Monero का इस्तेमाल “डर्टी क्रिप्टो” छिपाने और उसे अलग-अलग चैनलों से हवाला में बदलने के लिए कर रहे थे।
935 साइबर फ्रॉड शिकायतें भी जुड़ीं
पुलिस ने बताया कि आरोपी P2P ट्रांजैक्शन और कई बैंक खातों का इस्तेमाल करते थे। इन खातों की जांच में 935 साइबर फ्रॉड शिकायतें सामने आई हैं। इससे एजेंसियों को शक है कि यह नेटवर्क साइबर ठगी से आने वाली रकम को भी क्रिप्टो में बदलने का काम कर रहा था।
नौ गिरफ्तार, मुख्य आरोपी विदेश में
अब तक गिरफ्तार आरोपियों में मोहसिन सादिक मुलानी, एजाज असलम खान पठान, मोहम्मद जैद सिद्दीकी, नावेद अयूब खान पठान, फैज अहमद चिश्ती, सलमान हबीब खान पठान, गुलाम सादिक अंसारी, मुंबई निवासी जीशान सिराज मोतीवाला और हरियाणा निवासी लवप्रीत सिंह शामिल हैं। जबकि मोहम्मद जुबैर पोपटिया फिलहाल विदेश में है। उसे भारत लाने की प्रक्रिया शुरू की गई है। एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क की संपत्तियों, हवाला चैनल, ड्रग सप्लाई रूट और अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की गहराई से जांच कर रही हैं।
