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खेती के कचरे से कमाई का नया जरिया, एग्रीबिजनेस क्षेत्र में ऐसे आ सकता है बड़ा बदलाव

कृषि से निकलने वाले बायप्रोडक्ट्स को नए फूड इंग्रीडिएंट, पशु आहार और अन्य उपयोगी उत्पादों में बदलने के प्रयास बढ़े हैं। इससे न केवल पर्यावरण पर दबाव कम होगा बल्कि कंपनियों को अतिरिक्त राजस्व के नए स्रोत भी मिलेंगे।

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'काला नमक' चावल

दुनियाभर में फूड और एग्रीकल्चर सेक्टर तेजी से बदलाव के दौर से गुजर रहा है। अब फसल उत्पादन बढ़ाने पर ही नहीं, बल्कि खेती से निकलने वाले बचे हुए हिस्सों के बेहतर इस्तेमाल पर भी ध्यान दिया जा रहा है। बादाम के छिलके, संतरे के छिलके और पिस्ता के खोल जैसी चीजें, जिन्हें पहले बेकार समझा जाता था, अब नए कमाई के अवसर के रूप में देखी जा रहा है।

फूड और एग्रीकल्चर कंपनी ‘द वंडरफुल कंपनी’ में बायप्रोडक्ट इनोवेशन और सस्टेनेबिलिटी रणनीति पर काम कर रहे सिराज कोटेचा का कहना है कि भविष्य में फूड इंडस्ट्री का बड़ा हिस्सा कृषि अपशिष्ट के बेहतर उपयोग पर आधारित होगा। उनके अनुसार कंपनियां अब ऐसे तरीकों पर काम कर रही हैं, जिनसे वेस्ट कम हो और साथ ही अतिरिक्त कमाई भी हो सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि खेती और फूड इंडस्ट्री के बीच सबसे बड़ी चुनौती लगातार एक जैसी गुणवत्ता बनाए रखना है। खेती पूरी तरह मौसम, पानी और प्राकृतिक परिस्थितियों पर निर्भर करती है, जबकि बाजार और ग्राहक स्थिर गुणवत्ता की मांग करते हैं। जलवायु परिवर्तन, पानी की कमी और बढ़ते पर्यावरणीय दबावों के कारण कंपनियां अब पूरी सप्लाई चेन को अधिक टिकाऊ बनाने की दिशा में काम कर रही हैं।

उपयोगी उत्पादों में बदलने के प्रयास

इसी के तहत कृषि से निकलने वाले बायप्रोडक्ट्स को नए फूड इंग्रीडिएंट, पशु आहार और अन्य उपयोगी उत्पादों में बदलने के प्रयास बढ़े हैं। इससे न केवल पर्यावरण पर दबाव कम होगा बल्कि कंपनियों को अतिरिक्त राजस्व के नए स्रोत भी मिलेंगे।

खेती के कचरे से कमाई का नया जरिया

खेती के कचरे से कमाई का नया जरिया

फूड और एग्रीकल्चर सेक्टर से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि इस क्षेत्र में किसी नई तकनीक या आइडिया को बाजार तक पहुंचाने में लंबा समय लगता है। फील्ड ट्रायल, मौसम की अनिश्चितता और सरकारी नियमों के कारण किसी प्रोजेक्ट को सफल होने में कई साल लग सकते हैं। हालांकि, इसका असर सीधे लोगों के भोजन और रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ता है, इसलिए इस क्षेत्र में काम का महत्व काफी ज्यादा माना जाता है।

एग्रीबिजनेस सेक्टर में सफलता के लिए केवल डेटा और तकनीक ही नहीं, बल्कि किसानों, प्रोसेसिंग यूनिट्स और ग्राहकों की जरूरतों को समझना भी जरूरी है। उनका मानना है कि खेती से जुड़े हर हिस्से को एक साथ जोड़कर देखने से ही भविष्य के बड़े अवसर सामने आ सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले समय में फूड इंडस्ट्री में सस्टेनेबिलिटी और बिजनेस, दोनों एक-दूसरे के पूरक बनते नजर आएंगे। यही वजह है कि अब कृषि अपशिष्ट को कम करने और उसे उपयोगी उत्पादों में बदलने पर तेजी से काम हो रहा है।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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