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Agra Drone: आकाश से बरसेगी फसलों पर दवाएं, पहली बार ड्रोन से छिड़का जाएगा कीटनाशक

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Jan 19, 2023, 06:22 PM IST

Agra Drone: आगरा में फसलों की देखभाल को बेहतर करने के लिए आगरा में ड्रोन का इस्तेमाल किया जाएगा। यह ड्रोन फसलों को स्वस्थ रखने के लिए कीटनाशक का छिड़काव करेगा, साथ ही इनको ताकत देने पर निगरानी भी करेगा। इससे फसल रोग मुक्त होने के साथ ही पैदावार भी बढ़ेगी। आगरा कृषि विज्ञान केंद्र ने दस लाख रुपये में एक ड्रोन खरीद लिया है।

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ड्रोन से होगा कीटनाशक और दवाओं का छिड़काव(प्रतीकात्मक तस्वीर)

Photo : Twitter
KEY HIGHLIGHTS
  • आगरा में ड्रोन से सुरक्षित होगी खेती
  • ड्रोन से होगा कीटनाशक और दवाओं का छिड़काव
  • कृषि विज्ञान केंद्र ने दस लाख रुपये में खरीदा ड्रोन

Agra Drone: उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में अब फसलें सुरक्षित हो जाएंगी। आगरा जिले में फसलों में लगने वाले कीड़े-मकोड़ों पर आसमानी हमला किया जाएगा। खेतों में कीटनाशक और यूरिया के छिड़काव के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया जाएगा। इस तकनीकी से यह खेत के किसी खास हिस्से में जितने कीटनाशक और दवाओं के छिड़काव की जरूरत होगी। उसी निर्धारित मात्रा में छिड़काव भी किया जाएगा। इससे मिट्टी की गुणवत्ता दुरुस्त रखने और फसलों में कीटनाशक एवं दवाओं के अवशेष को कम करने में मदद भी मिलेगी। दावा है कि इस टेक्नोलॉजी से किसानों की उपज बढ़ जाएगी, उनके समय और लागत में भारी कमी आएगी। इससे किसानों की उपज तो बढ़ेगी ही साथ ही समय और लागत में भारी गिरावट आएगी। कृषि विज्ञान केंद्र ने दस लाख रुपये में ड्रोन खरीद लिया है। अब सौ हेक्टेयर में ट्रायल लगाने की तैयारी है।

इसके अलावा एक ड्रोन दयालबाग इंस्टीट्यूट ने भी खरीदा है, जो बच्चों की पढ़ाई के लिए सार्थक होगा। कृषि विज्ञान केंद्र बिचपुरी ने 26 किलोग्राम का यह ड्रोन खरीदा है। यह सात मिनट में एक एकड़ भूमि को कवर करने की क्षमता रखता है। इसकी रेंज दो किलोमीटर तक है। इसको संचालित करने के लिए नागर विमानन महानिदेशालय (डीडीसीए) से पायलट लाइसेंस भी जारी हुआ है।

दस लीटर तक दवाओं का छिड़काव करने में कारगर है ड्रोन

छह पंखे का यह ड्रोन दस लीटर तक कीटनाशक या दवाओं का छिड़काव करने में कारगर है। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. आरएस चौहान के अनुसार, आगरा में दो ड्रोन आए हैं। कृषि विज्ञान केंद्र का ड्रोन खेती के क्षेत्र में काम करेगा। जबकि, दयालबाग इंस्टीट्यूट का ड्रोन बच्चों की पढ़ाई के लिए उपयोग किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस ड्रोन का बैटरी बैकअप 20 मिनट का है। हमने ड्रोन के साथ तीन बैटरी भी मंगवाई हैं। एक घंटे का बैकअप लिया है। उन्होंने बताया कि जल्द ही सौ हेक्टेयर में ड्रोन का ट्रायल किया जाएगा। खेतों में ड्रोन के जरिए कीटनाशक का छिड़काव किया जाएगा।

पायलट को ट्रेनिंग दी गई

यह ड्रोन ‘मशीन लर्निंग’ या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लैस है। ड्रोन को उड़ाने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र में एक वैज्ञानिक की तैनाती की है। उस वैज्ञानिक का डीडीसीए से पायलट के लिए लाइसेंस जारी किया हुआ है। इस ड्रोन को एयरफोर्स की तरफ से बनाए गए रेड जोन में नहीं उड़ा सकते हैं। इसमें कैमरा भी लगा है।
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