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Ujjain News: खड़े हनुमान की प्रतिमा पर पुरातत्व विभाग की नजर, हजार साल पुराने इतिहास से जुड़ रहे तार

Ujjain News: उज्जैन के खड़े हनुमान मंदिर की प्रतिमा को लेकर पुरातत्व विभाग ने कहा कि प्रतिमा का प्रस्तर मालवा के बेसाल्ट पत्थर का प्रतीत होता है और यह क्षेत्र प्राचीन उज्जयिनी के इतिहास से जुड़ा है। राजा भोज, सिंधिया काल और अकबर के समय के ऐतिहासिक साक्ष्य यहां मौजूद हैं।

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उज्जैन के खड़े हनुमान मंदिर की प्रतिमा पर पुरातत्वविद् का बयान

Photo : Times Now Digital

Ujjain Hanuman Temple: उज्जैन के प्रसिद्ध खड़े हनुमान मंदिर की प्रतिमा को लेकर अब पुरातात्विक दृष्टि से भी चर्चा शुरू हो गई है। पुरातत्वविद् डॉ. रमन सोलंकी ने प्रतिमा और आसपास के क्षेत्र के ऐतिहासिक महत्व को लेकर कई अहम बातें सामने रखी हैं। उन्होंने बताया कि प्रतिमा के पीछे लगे पत्थर को देखने से यह मालवा क्षेत्र का बेसाल्ट पत्थर लगता है। हालांकि, प्रतिमा कब बनाई गई या मंदिर में कब स्थापित की गई, इसकी सटीक तारीख अभी पता नहीं चली है।

डॉ. सोलंकी के अनुसार, यह पूरा इलाका प्राचीन उज्जयिनी के ऐतिहासिक वैभव से जुड़ा हुआ है। उन्होंने बताया उज्जैन का छोटा सराफा, बड़ा सराफा, नमक मंडी, गोपाल मंदिर और दानीगेट क्षेत्र ऐतिहासिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण हैं। इन इलाकों में प्राचीन उज्जयिनी के साथ-साथ अलग-अलग राजवंशों के दौर की ऐतिहासिक विरासत भी देखने को मिलती है।

मालवा के बेसाल्ट पत्थर से बनी है प्रतिमा?

खड़े हनुमान मंदिर की प्रतिमा के स्थापत्य और प्रतिमा विज्ञान से जुड़े पहलुओं पर डॉ. सोलंकी ने बताया कि पत्थर से बनी प्रतिमाएं किसी भी शुद्ध भूमि पर प्राण-प्रतिष्ठा के साथ स्थापित की जा सकती हैं। उन्होंने प्रतिमा के पीछे के प्रस्तर का अवलोकन करने के बाद इसे मालवा क्षेत्र का बेसाल्ट पत्थर प्रतीत होने की बात कही। डॉ. सोलंकी के मुताबिक, राजा भोज के काल में करीब एक हजार साल पहले इस तरह के मजबूत प्रस्तर पर प्रतिमाएं बनाने की परंपरा थी। इन प्रतिमाओं को बहुत मजबूत तरीके से तैयार किया जाता था।

राजा भोज से सिंधिया काल तक जुड़ा इतिहास

डॉ. सोलंकी ने बताया कि खड़े हनुमान मंदिर के आसपास का क्षेत्र प्राचीन उज्जयिनी के अहम हिस्सों में शामिल रहा है। यहां 24 खंभा द्वार से लेकर छोटा सराफा तक का क्षेत्र अलग-अलग ऐतिहासिक कालखंडों की यादें समेटे हुए है। इस क्षेत्र का संबंध राजा भोज के समय के इतिहास के साथ-साथ बाद के सिंधिया राजवंश के दौर से भी जुड़ा बताया जाता है। वहीं, मुगल बादशाह अकबर के समय यहां ‘सती गेट’ का निर्माण हुआ था, जो इस क्षेत्र के ऐतिहासिक महत्व को और बढ़ाता है।

संरक्षण को लेकर उठे सवाल

खड़े हनुमान की प्रतिमा को लेकर अब सबसे बड़ा सवाल इसके संरक्षण और पुरातात्विक महत्व को लेकर है। क्या भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) और मध्य प्रदेश पुरातत्व विभाग इस प्रतिमा और आसपास के ऐतिहासिक क्षेत्र के संरक्षण के लिए कोई खास कदम उठाएंगे, इस पर लोगों की नजर है। सनातन परंपरा के अनुसार, एक बार जहां किसी मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा हो जाए, उसे वहां से हटाया नहीं जाता है। ऐसे में प्रतिमा को सुरक्षित रखते हुए क्षेत्र का संरक्षण और सौंदर्यीकरण किस तरह किया जाए, यह प्रशासन और पुरातत्व विभाग के सामने अहम चुनौती हो सकती है।

Pooja Kumari
पूजा कुमारीauthor

पूजा टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज़्म में पीजी डिप्लोमा कर चुकी पूजा को टीवी मीडिया में भी काम करने का अनुभव है। शहरी मुद्दों की गहरी समझ के कारण पूजा लोकल न्यूज, मेट्रो व रेल अपडेट्स, रोड और इंफ्रास्ट्रक्चर, लोकल डेवलपमेंट, मौसम, क्राइम, स्थानीय राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। शहरों की नब्ज पहचानने और स्थानीय संवेदनशीलताओं को खबरों में प्रभावी ढंग से पिरोने की क्षमता उनकी राइटिंग स्किल को विशेष बनाती है। पूजा अब तक 3,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट्स लिख चुकी हैं, जिनमें कई महत्वपूर्ण लोकल अपडेट्स, विश्लेषणात्मक स्टोरीज और रिपोर्ताज शामिल हैं।

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