Sugar Prices : भारतीय चीनी एवं जैव-ऊर्जा विनिर्माता संघ (ISMA) के अध्यक्ष नीरज शिरगांवकर के अनुसार, भले ही हाल के दिनों में घरेलू बाजार में चीनी के दाम कम हुए हैं, फिर भी विदेश से चीनी का आयात करना भारत के लिए फायदेमंद साबित हो रहा है। उन्होंने यह बात 'द इंडिया शुगर एंड बायो-एनर्जी कॉन्फ्रेंस 2026' के चौथे संस्करण के दौरान कही। शिरगांवकर ने बताया कि महज दो हफ्ते पहले मिल स्तर पर चीनी की कीमतें 65 से 67 रुपये प्रति किलोग्राम के काफी ऊंचे स्तर पर पहुंच गई थीं। हालांकि, अब इनमें भारी गिरावट आई है और यह घटकर 43 से 44 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई हैं। आम उपभोक्ताओं को खुदरा बाजार में इसका फायदा दिखने में अभी एक से दो हफ्ते का समय और लग सकता है।
कीमतों को नियंत्रित करने के लिए उठाए गए सरकारी कदम
आगामी त्यौहारों के सीजन को देखते हुए सरकार ने घरेलू बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने और खुदरा कीमतों पर लगाम कसने के मकसद से हाल ही में बड़ा कदम उठाया था। इसके तहत पिछले महीने सरकार ने 10 लाख टन चीनी के बिना किसी शुल्क (ड्यूटी-फ्री) आयात की मंजूरी दी थी। उद्योग से जुड़े सूत्रों के अनुसार, देश की चीनी मिलों ने अब तक स्वीकृत की गई कुल मात्रा में से करीब 8 लाख टन चीनी के आयात के लिए आवेदन दे दिया है। इसके अलावा, बाजार में कालाबाजारी और जमाखोरी को रोकने के लिए सरकार ने थोक खरीदारों तथा डीलरों के लिए स्टॉक सीमा के नियमों को भी काफी सख्त कर दिया है।
वैश्विक बाजार में तेजी और मिलों की चिंता
एक तरफ जहां भारत आयात के जरिए आपूर्ति सुधारने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी की कीमतें अचानक बढ़ने लगी हैं। वैश्विक स्तर पर चीनी की कमी होने और भारत द्वारा इतनी बड़ी मात्रा में खरीदारी शुरू करने के कारण अंतरराष्ट्रीय कीमतें मजबूत हुई हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में आई इस तेजी के कारण अब चीनी मिलों के सामने यह सवाल खड़ा हो गया है कि चीनी का यह आयात उनके लिए कितना मुनाफे वाला रहेगा। मिलों को डर है कि महंगे आयात से उनका मुनाफा प्रभावित हो सकता है।
पेराई सत्र और एथनॉल आवंटन पर चर्चा
इस्मा ने सरकार का ध्यान मिलों द्वारा समय से पहले चीनी की पेराई (क्रशिंग) शुरू करने से जुड़ी व्यावहारिक समस्याओं की ओर भी दिलाया है। शिरगांवकर के मुताबिक, जल्दी पेराई शुरू करने से मिलों के संचालन में कई तरह की मुश्किलें आ सकती हैं, और इस विषय पर सरकार के साथ बातचीत जारी है। इसके अलावा, पूरा चीनी उद्योग अगले साल के कुल उत्पादन, नई पेराई नीति और एथनॉल आवंटन को लेकर स्पष्टता का इंतजार कर रहा है।
उत्पादन अनुमान और घरेलू मांग की स्थिति
दूसरी तरफ, सरकार का मानना है कि देश के पास चीनी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और उसने मिलों पर अनियंत्रित रूप से दाम बढ़ाने का आरोप लगाया है। हालांकि, स्थिति को देखते हुए सरकार ने मार्केटिंग वर्ष 2025-26 के लिए देश में कुल चीनी उत्पादन के अनुमान को पहले के 343 लाख टन से घटाकर 306 लाख टन कर दिया है। इसके विपरीत, भारत में सालाना घरेलू चीनी की मांग लगभग 280 से 285 लाख टन रहती है, जिससे यह साफ है कि देश में उत्पादन मांग से अधिक ही रहने वाला है।
