आगरा

UP Police की नौकरी नहीं आसान, टफ ट्रेनिंग देख बैकफुट पर आए कदम; 5 ट्रेनी कांस्टेबलों ने दिया इस्तीफा

मुजफ्फरनगर में एक साथ पांच प्रशिक्षु कांस्टेबलों ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। जब उनसे इस्तीफे की वजह पूछी गई, तो उनका जवाब सुनकर सभी हैरान रह गए। आइए जानते हैं क्या है कारण?

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यूपी पुलिस (तस्वीर साभार-UP Police Twitter)

मुजफ्फरनगर : मुजफ्फरनगर एसएसपी कार्यालय में एक अनोखा मामला सामने आया है, जहां एक महिला और दो पूर्व सैन्यकर्मी समेत पांच ट्रेनी कांस्टेबल ने पुलिस सेवा से इस्तीफा देने का निर्णय लिया। ये सभी एसएसपी कार्यालय पहुंचे और अपने इस्तीफे सौंप दिए। एसएसपी संजय कुमार वर्मा ने पुष्टि की है कि एक ट्रेनी का इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है, जबकि चार अन्य के मामले में जांच की जा रही है। ट्रेनी कांस्टेबलों ने निजी कारणों और पुलिस की नौकरी के लिए खुद को अनुपयुक्त बताते हुए इस्तीफा दिया।

क्या बोले पुलिसकर्मी?

एक ट्रेनी, जो इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा धारक है, ने कहा कि ट्रेनिंग बहुत कठिन है और उसे एहसास हुआ कि वह पुलिस सेवा के लिए उपयुक्त नहीं है। एक महिला कांस्टेबल ने बेहतर नौकरी मिलने के कारण इस्तीफा दिया, जबकि एक अन्य ने कहा कि उसे यूपी पुलिस में भर्ती होने में कोई रुचि नहीं थी, लेकिन माता-पिता के दबाव में परीक्षा दी थी। इसके अलावा, दो पूर्व सैन्यकर्मियों ने भी अपने परिवार के पास रहने की इच्छा के कारण इस्तीफा दिया।

एसएसपी वर्मा ने कहा कि इस्तीफे के पीछे की असली वजहों की जांच की जा रही है। अधिकारियों ने बताया कि पुलिस प्रशिक्षण छोड़ने वाले ट्रेनी को प्रशिक्षण शुल्क चुकाना होगा, जो प्रति दिन 800 रुपये से अधिक है। यह घटना उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर पुलिस भर्ती अभियान के बाद हुई है, जिसमें 60,000 से अधिक कांस्टेबल पदों के लिए 48 लाख से अधिक आवेदकों ने आवेदन किया था।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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