आगरा

अब इतने बजे मिलेंगे ठाकुर जी! बांके बिहारी मंदिर में बदला दर्शन का समय; नोट कर लें नया टाइम शेड्यूल

Vrindavan Mandir: भक्तों के लिए वृंदावन से खबर आई। अगर, अब आप बांके बिहारी मंदिर में ठाकुर जी के दर्शन के लिए जा रहे हैं तो नया टाइम टेबल जरूर देख लेना चाहिए। चैत्र मास कृष्ण पक्ष की द्वितीय तिथि से ग्रीष्मकालीन समय सारणी लागू हो गई है।

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बांकेबिहारी मंदिर दर्शन टाइमिंग

Vrindavan Mandir: मथुरा वृन्दावन के ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए दर्शन का समय बदल गया है। मंदिर की नियमावली के अनुसार होलिका दहन के बाद चैत्र मास कृष्ण पक्ष की द्वितीय तिथि से ग्रीष्मकालीन समय सारणी लागू हो गई है। मंदिर के प्रबंधक मुनीश शर्मा ने बताया कि रविवार से मंदिर में दर्शन की समय-सारिणी बदल गयी है। इसके चलते ठाकुरजी के दोनों समय के दर्शन, तीनों आरती व शयन करने के समय में परिवर्तन हो गया है। आइये जानते हैं अब कितने बजे से कितने बजे तक मंदिर दर्शन के लिए खुला रहेगा।

बांके बिहारी मंदिर के दर्शन की नई टाइमिंग

उन्होंने बताया कि 16 मार्च को द्वितीया तिथि से मंदिर में परिवर्तित होने वाली ग्रीष्मकालीन समय-सारिणी के अनुसार ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में दर्शन सुबह 7:45 बजे से शुरू होंगे व 7:55 बजे शृंगार आरती होगी। उन्होंने बताया कि मंदिर में ठाकुरजी को पूर्वाह्न 11.00 से 11.30 बजे तक राजभोग अर्पित किया जाएगा तथा पूर्वाह्न 11:55 बजे राजभोग आरती संपन्न होगी। उन्होंने बताया कि उसके बाद ठाकुरजी की करीब एक घंटे तक सेवायतों द्वारा इत्र से मालिश की जाएगी और उसके बाद बांकेबिहारी विश्राम करेंगे।

शर्मा ने बताया कि शाम की सेवा में दर्शन शाम 5:30 बजे शुरू होंगे एवं रात 8:30 बजे शयनभोग अर्पित होगा और रात्रि 9:25 बजे शयनभोग आरती के दर्शन होंगे। उन्होंने बताया कि इसके उपरांत सेवायत एक घंटे तक आराध्य की इत्र से मालिश करने के पश्चात उन्हें शयन कराकर बाहर निकल आएंगे। उन्होंने बताया कि दर्शन का ये क्रम दिवाली के पर्व के बाद भाईदूज तक जारी रहेगा।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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