39 वें अंतरराष्ट्रीय सूरजकुंड मेला का इंतजार हुआ खत्म, इस दिन से होगा शुरू, जानें सबकुछ यहां
- Authored by: varsha kushwaha
- Updated Jan 9, 2026, 03:34 PM IST
Surajkund Mela 2026: जिस सूरजकुंड मेले की दिल्ली-एनसीआर वाले बेसब्री से राह देख रहे थे, उसका इंतजार अब खत्म होने वाला है। सूरजकुंड मेले की तैयारियां तेज हो गई है। पिछले साल के ट्रेंड को आगे बढ़ाते हुए इस साल भी मेले की दो थीम स्टेट हैं। आइए अब आपको मेले के बारे में विस्तार से बताएं।
39 वें अंतरराष्ट्रीय सूरजकुंड मेला का इंतजार हुआ खत्म
Surajkund Mela 2026: जनवरी की गुलाबी ठंड के साथ ही दिल्ली-एनसीआर के लोगों के दिलों में सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय हस्तशिल्प मेले की दस्तक गूंजने लगती है। कला और संस्कृति के प्रेमियों के लिए यह साल का वह समय होता है, जिसका इंतजार बेसब्री से किया जाता है। सूरजकुंड मेला हर साल फरवरी की शुरुआत में हरियाणा के फरीदाबाद में आयोजित किया जाता है। इस बार मेला अपने 39वें संस्करण (39th Edition) के साथ और भी भव्य रूप में लौट रहा है। यह केवल एक बाजार नहीं, बल्कि दुनिया भर की कलाओं का मिलन स्थल है। यह मेला लगभग पखवाड़े भर चलता है। आइए अब आपको इस साल होने वाले सूरजकुंड मेले की थीम, डेट आदि के बारे में बताएं।
मेला का मुख्य आकर्षण
प्रतियोगिताएं: मेले के दौरान लाइव म्यूजिक, रंगोली मेकिंग और पेंटिंग जैसी कई रचनात्मक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है।
सांस्कृतिक रंग: मुख्य चौपाल पर आप विभिन्न भारतीय राज्यों और विदेशी कलाकारों के पारंपरिक लोक नृत्य और संगीत का आनंद ले सकते हैं।
विदेशी और स्वदेशी स्टॉल: यहां हस्तशिल्प (Handicraft) के सैकड़ों स्टॉल लगाए जाते हैं, जहां आप पारंपरिक वेशभूषा से लेकर घर की सजावट का सामान खरीद सकते हैं।
सूरजकुंड मेला 2026 कब से शुरू होगा?
इस साल 39वें सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय मेले का आयोजन 31 जनवरी से 15 फरवरी 2026 तक किया जाएगा। इस बार मेले का 'पार्टनर नेशन' मिस्र (Egypt) है। यह तीसरी बार है जब मिस्र इस मेले का हिस्सा बन रहा है, इससे पहले वह 2009 और 2017 में भी पार्टनर कंट्री रह चुका है।
सूरजकुंड मेले 2026 की थीम क्या है?
पिछले साल की परंपरा को दोहराते हुए, 2026 में भी दो राज्यों को 'थीम स्टेट' चुना गया है। इस बार उत्तर प्रदेश और मेघालय मुख्य आकर्षण होंगे। जहां यूपी की ऐतिहासिक विरासत दिखेगी, वहीं मेघालय की प्राकृतिक सुंदरता और संस्कृति लोगों को लुभाएगी। इसके साथ ही पूर्वोत्तर के अन्य सात राज्यों (सिक्किम, नागालैंड, असम, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा और अरुणाचल प्रदेश) की शिल्पकला की खास झलक भी देखने को मिलेगी।
फूड लवर्स के लिए स्वर्ग है ये मेला
खाने-पीने के शौकीनों के लिए यह मेला किसी उत्सव से कम नहीं है। इस साल 100 से अधिक फूड स्टॉल्स लगाए जाएंगे, जहां उत्तर भारत के चटाखेदार व्यंजनों से लेकर पूर्वोत्तर के पारंपरिक स्वादों का संगम होगा।
सूरजकुंड मेले में क्या होगा खास?
बता दें कि इस बार मेला परिसर पिछले सालों की तुलना में अधिक बड़ा और सुंदर बनाया जा रहा है। इसे और बेहतरीन और आकर्षक बनाने के लिए यहां 127 स्थायी स्टॉल बनाए जाएंगे। फर्श और दीवारों पर मिट्टी और गोबर की लिपाई की जा रही है। अम्यूजमेंट पार्क का दायरा बढ़ाया जाएगा। मेले में पहले से 1200 हट्स हैं। इस बार 100 और नई हट्स बनाई जा रही है।
चौपाल पर सांस्कृतिक संगम
मेले की मुख्य और छोटी चौपाल पर हर शाम रंगारंग कार्यक्रम होंगे। इसमें बॉलीवुड गायकों की लाइव परफॉर्मेंस, गजल संध्या, हास्य सम्मेलन और शानदार फैशन शो आयोजित किए जाएंगे। हस्तशिल्पियों और कलाकारों को अपना हुनर दिखाने के लिए एक बार फिर बड़ा मंच मिलने जा रहा है।
पहले भी यूपी रह चुका है थीम स्टेट
यह पहली बार नहीं है कि यूपी सूरजकुंड मेला का थीम स्टेट बना है। इससे पहले 2018 में भी यूपी को थीम स्टेट के तौर पर चुना गया था। इस साल फिर मेले में यूपी की संस्कृति और परंपरा देखने को मिलेगी।
सांस्कृतिक कला देख फिर मिला दर्शकों को लुभाने का मौका
2023 में पूर्वोत्तर राज्य को पहली बार मेले के सांस्कृतिक पार्टनर के तौर पर चुना गया था। इन राज्यों की शिल्पकला और सांस्कृतिक समृद्धि ने लोगों को इतना अधिक प्रभावित किया कि इन्हें एक बार और इस साल मौका दिया गया है।
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