सोशल मीडिया के इस दौर में दूसरों की लग्जरी लाइफ को देखकर अगर आपको भी लगता है कि आप आर्थिक रूप से कहीं पीछे हैं तो ये जानकारी आपके काम की हो सकती है। आपको समझना होगा कि वित्तीय सफलता हमेशा दिखावे से नहीं मापी जाती। कई बार असली आर्थिक मजबूती उन चीजों में छिपी होती है, जो बाहर से दिखाई नहीं देतीं। कुछ अच्छी फाइनेंशियल आदतों के साथ यह जाना जा सकता है कि आप कितनी बेहतर वित्तीय स्थिति में हैं। इस आर्टिकल में आपको उन चार फाइनेंशियल आदतों की ही जानकारी दे रहे हैं, जो बताती हैं कि वित्तीय दौड़ में आप दूसरों से कितने आगे हैं-
हर महीने पैसा बचना
अगर महीने के अंत में बिल, ईएमआई और रोजमर्रा के खर्च पूरे करने के बाद भी आपके पास कुछ पैसा बच जाता है, तो यह एक बड़ा सकारात्मक संकेत है। यह जरूरी नहीं कि आप हर महीने बड़ी रकम निवेश करें। महत्वपूर्ण बात यह है कि आपकी कमाई और खर्च के बीच एक अंतर बना हुआ है। यही बचत आगे चलकर इमरजेंसी फंड, घर की डाउन पेमेंट या रिटायरमेंट कॉर्पस का आधार बनती है। लगातार बचत करने की आदत वित्तीय मजबूती की पहचान मानी जाती है।
इमरजेंसी में लोन की जरूरत न पड़ना
अचानक किसी मेडिकल खर्च जैसी स्थिति में आपको तुरंत पर्सनल लोन लेने या क्रेडिट कार्ड पर निर्भर होने की जरूरत नहीं पड़ती, तो यह दर्शाता है कि आपकी वित्तीय स्थिति मजबूत है। अप्रत्याशित खर्चों को बिना घबराहट संभाल पाना आर्थिक सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण संकेत होता है। इमरजेंसी फंड (Emergency Fund) होना अपने आप में एक तरह की संपत्ति है।
कर्जों के वित्तीय दबाव में न रहना
अच्छी आय होना हमेशा आर्थिक सुख का संकेत नहीं होता। कई लोग ऊंची सैलरी कमाने के बावजूद भारी होम लोन, कार लोन, क्रेडिट कार्ड बकाया और अन्य कर्जों के कारण वित्तीय दबाव में रहते हैं। दूसरी ओर, अपेक्षाकृत कम आय वाला व्यक्ति भी आर्थिक रूप से सहज हो सकता है अगर उसकी मासिक देनदारियां नियंत्रित हों। अगर आपकी ईएमआई आपकी आय का बड़ा हिस्सा नहीं खाती और खर्चों के बाद बचत तथा निवेश के लिए पैसा बच जाता है, तो आप अच्छी वित्तीय स्थिति में हैं।
पैसे से पैसा बनना
वित्तीय यात्रा का एक महत्वपूर्ण चरण वह होता है जब आपकी कमाई के अलावा आपके निवेश भी आपकी संपत्ति बढ़ाने लगते हैं। हो सकता है कि आपके SIP निवेश अच्छे स्तर तक पहुंच गए हों, EPF बैलेंस उम्मीद से ज्यादा बढ़ गया हो या निवेश से मिलने वाला लाभ आपकी नेटवर्थ में महत्वपूर्ण योगदान देने लगा हो। इसका मतलब है कि अब आप पूरी तरह केवल अगले महीने की सैलरी पर निर्भर नहीं हैं। आपका पैसा भी आपके लिए काम कर रहा है।
