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सिगरेट के बट्स से बनाते हैं खिलौने, मच्छर भगाने की दवा; इन भाइयों ने पेश कर दी मिसाल

  • Authored by: आशीष कुशवाहा
  • Updated May 31, 2023, 06:00 AM IST

World No Tobacco Day 2023, Cigarette Buds:धूम्रपान स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है ! ये स्लोगन बहुत लोकप्रिय है। जो लोगों से सिगरेट छोड़ने की अपील करता है। पर क्या सिगरेट के बचे फिल्टर से कुछ बन सकता है।

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सिगरेट बट्स से बना रहे खिलौने

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World No Tobacco Day 2023, Cigarette Buds:धूम्रपान स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है ! ये स्लोगन बहुत लोकप्रिय है। जो लोगों से सिगरेट छोड़ने की अपील करता है। पर क्या सिगरेट के बचे फिल्टर से कुछ बन सकता है। आप में ज्यादातर लोग सिगरेट पीने के बाद बचे बट को जमीन पर या फिर डस्टबिन में फेंक देते होंगे। पर आपको ये नहीं पता होगा कि उस 5 सेंटीमीटर की सिगरेट बट में 50 से ज्यादा ऐसे केमिकल होते हैं, जो मिट्टी को बर्बाद कर सकते हैं। इतने से टुकड़े को अपने-आप खत्म होने में 12 साल लग जाते हैं।

इसी को देखते हुए नमन गुप्ता ने अपने बड़े भाई विपुल गुप्ता से संपर्क किया, जो एक इंजीनियर थे, जिन्होंने सिगरेट बट्स के निपटान के लिए पर्यावरण के अनुकूल समाधान खोजा, 2018 में दोनों भाइयों ने सिगरेट बट्स को अप-साइकिल करने के लिए कोड एफर्ट नाम की एक प्राइवेट कंपनी शुरू की।

चादर से लेकर खिलौने तक होते हैं तैयार

World No Tobacco Day 2023

सिगरेट के बट्स

  • तम्बाकू से, जो एक प्राकृतिक कीटनाशक है, कोड एफर्ट कम्पोस्ट पाउडर बनाता है और इसे आस-पास के बागानों और नर्सरी में दान कर देते हैं।
  • दूसरे घटक उसमें मौजूद कागज को लुगदी में बदलकर चादरों में तैयार करते हैं। कोड एफर्ट पेपर से मॉस्किटो रिपेलेंट (मच्छर भगाने की दवा) भी बनाया जाता है।
  • तीसरा घटक फाइबर है, जिसे वैज्ञानिक रूप से सेलूलोज़ एसीटेट कहा जाता है, जिसे पहले संसाधित किया जाता है। फाइबर के रिसाइकलिंग के बाद, यह प्रयोगशाला परीक्षण से गुजरता है। इसके बाद, उसी फाइबर का उपयोग कुशन, तकिए, गद्दे, मुलायम खिलौने, कीचेन, कलाकृतियों और बहुत कुछ भरने में किया जाता है।
करीब 100 से अधिक महिलाएं कोड एफर्ट के लिए सिगरेट फाइबर से स्थायी उत्पाद बनाने में मदद करने में शामिल हैं। 2018 के बाद से, कोड एफर्ट ने कुल मिलाकर लगभग 75 लाख रुपये का निवेश किया है, जिसमें सभी चल रहे खर्च, संचालन खर्च शामिल है।

हर इतनी सिगरेट होती है खपत

भारत में हर साल लगभग 100 बिलियन (10,000 करोड़) सिगरेट की खपत होती है, जिससे 26,454 टन कचरा पैदा होता है। रायटर के मुताबिक गुप्ता बाहरी आपूर्तिकर्ताओं को सिगरेट के कचरे के लिए न्यूनतम 500 रुपये से अधिकतम 800 रुपये प्रति किलोग्राम का भुगतान करते हैं।

आशीष कुशवाहा
आशीष कुशवाहाauthor

<p>आशीष कुमार कुशवाहा Timesnowhindi.com में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर काम कर रहे हैं। वह 2023 से Timesnowhindi.com के साथ जुड़े हैं। वह यहां शेयर बाजार, स्टॉक्स, IPO, पर्सनल फाइनेंस, बिजनेस न्यूज, कंपनी डेवलपमेंट, सक्सेस स्टोरी, यूटिलिटी, ऑटोमोबाइल, टेक्नोलॉजी और गैजेट से जुड़ी स्टोरी पर काम करते हैं। उनके पास पिछले 3 साल के भारतीय बजट को भी कवर करने का एक्सपीरियंस है। उनके पास ऑटो एक्सपो 2023 को कवर करने का अनुभव है। इसके अलावा ग्राउंड की स्टोरी और रिसर्च बेस्ड स्टोरी करने में विशेष रुचि रखते हैं। उनके पास डिजिटल मीडिया में कुल 3 साल से ज्यादा का एक्सपीरियंस है। इससे पहले इन्होंने वन इंडिया, दैनिक भास्कर डिजिटल में काम किया है। इन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से मीडिया में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई की है। वहीं ग्रेजुएशन की पढ़ाई रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर से मास कम्यूनिकेशन में की है। उन्हें शुरू से ही डिबेट करने, सामाजिक मुद्दों पर बात करने और शेयर बाजार में रुचि थी। उन्हें बचपन से ही अखबार के संपादकीय पेज और न्यूज पढ़ने का सौख था। स्कूल के समय उन्होंने कई क्विज कंपटीशन में भी हिस्सा लिया और प्राइज जीते हैं।</p>

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