विदेशों में काम करने वाले अनिवासी भारतीय (Non-Resident Indians - NRIs) अक्सर अपनी सैलरी का पैसा भारत में अपने NRE (Non-Resident External) बैंक खाते में मंगाते हैं। NRE अकाउंट एक ऐसा खाता है, जिसमें विदेशी मुद्रा (Foreign Currency) को भारतीय रुपये में जमा किया जाता है। हालांकि, कई एनआरआई इस बात को लेकर असमंजस में रहते हैं कि यदि उनकी विदेश की सैलरी सीधे भारत में उनके NRE अकाउंट में क्रेडिट हो रही है, तो क्या उन्हें भारत के इनकम टैक्स विभाग को आयकर (Income Tax) देना होगा या ITR (Income Tax Return) फाइल करना पड़ेगा।
कब देना होता है टैक्स?
भारतीय आयकर अधिनियम (Income Tax Act) के नियमों के अनुसार, किसी व्यक्ति की टैक्स देनदारी इस बात पर निर्भर करती है कि उस वित्त वर्ष में उसका 'रेसिडेंशियल स्टेटस' (Residential Status) क्या है। यदि कोई व्यक्ति टैक्स कानून के तहत एनआरआई (NRI) की श्रेणी में आता है और वह विदेश में सेवाएं देकर वहां सैलरी कमा रहा है, तो विदेश में कमाई गई यह इनकम भारत में पूरी तरह से टैक्स-फ्री (Tax-Exempt) होती है। चूंकि NRE खाते में जमा होने वाला पैसा विदेश में अर्जित आय (Foreign Earnings) माना जाता है, इसलिए NRE अकाउंट में जमा सैलरी और उस पर मिलने वाले ब्याज दोनों पर भारत में कोई टैक्स नहीं लगता है।
NRE अकाउंट में सैलरी आए तो क्या है नियम?
अब बात करते हैं कि क्या ऐसे मामलों में NRE अकाउंट में सैलरी आने पर ITR फाइल करना अनिवार्य है? अगर किसी एनआरआई की भारत में केवल वही सैलरी आ रही है जो उसने विदेश में काम करके कमाई है और भारत में उसकी कोई अन्य करयोग्य आय (Taxable Income) नहीं है, तो उसे भारत में ITR फाइल करने की कोई कानूनी आवश्यकता नहीं होती। कानूनन, केवल विदेश में कमाई गई और NRE खाते में क्रेडिट हुई सैलरी के आधार पर टैक्स विभाग ITR की मांग नहीं करता है।
हालांकि, यहां एक महत्वपूर्ण शर्त का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। यदि किसी एनआरआई की भारत में कोई अन्य आय भी है जैसे कि भारत में स्थित संपत्ति से आने वाला मकान का किराया (Rental Income), किसी संपत्ति की बिक्री से हुआ कैपिटल गेन (Capital Gain), फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) या म्यूचुअल फंड से मिलने वाला रिटर्न और यह कुल आय भारत की बेसिक टैक्स छूट सीमा (रु 2.5 लाख या नई टैक्स व्यवस्था के तहत रु 3 लाख) से अधिक हो जाती है, तो उस एनआरआई को भारत में ITR फाइल करना अनिवार्य हो जाएगा। ऐसी स्थिति में ITR में केवल भारत में अर्जित आय पर ही टैक्स देना होता है, विदेशी सैलरी पर नहीं।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि भले ही आपकी विदेशी सैलरी पर भारत में टैक्स न लगता हो, फिर भी यदि आपने भारत में बड़े वित्तीय लेन-देन किए हैं या टीडीएस (TDS) कटा है, तो सुरक्षा के लिहाज से ITR फाइल कर देना समझदारी होती है। इससे आपकी वित्तीय जानकारी पारदर्शी रहती है और भविष्य में बैंक लोन या अन्य प्रक्रिया में कोई परेशानी नहीं आती। संक्षेप में कहें तो, NRE खाते में आई विदेशी सैलरी पूरी तरह सुरक्षित और टैक्स-फ्री है, बशर्ते आपकी अन्य भारतीय आय तय सीमा के भीतर हो।
