Petrol-Diesel Rate Cut 2026: इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड के चेयरमैन एएस साहनी का कहना है कि ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMC) बेहद नाजुक संतुलन बनाकर रखना पड़ता है। साहनी के मुताबिक Indian Oil, Bharat Petroleum और Hindustan Petroleum की प्रॉफिटेबिलिटी रिफाइनिंग मार्जिन और मार्केटिंग मार्जिन के बीच संतुलन पर निर्भर करती है। उनके मुताबिक, रिफाइनिंग मार्जिन यानी कच्चे तेल को प्रोसेस करने से होने वाला मुनाफा और मार्केटिंग मार्जिन यानी पेट्रोल पंप पर बिक्री से मिलने वाला फायदा, दोनों को साथ देखकर ही कीमतों पर फैसला होता है। फिलहाल रिफाइनिंग मार्जिन बेहतर हैं, लेकिन मार्केटिंग साइड पर उतना स्पेस नहीं बन पा रहा।
डीजल-पेट्रोल महंगा क्यों?
जब साहनी से पूछा गया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय से स्थिर और लोअर साइड में हैं। लेकिन, उस अनुपात में भारतीय बाजार में डीजल-पेट्रोल के दाम नहीं घटे हैं। इसे लेकर उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों और भारत में पेट्रोल-डीजल के रिटेल दामों के बीच कोई सीधा रिश्ता नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर क्रूड महंगा होता है, तो कई बार मार्केटिंग मार्जिन सुधरते हैं, जबकि क्रूड सस्ता होने पर रिफाइनिंग मार्जिन मजबूत होते हैं। यही वजह है कि कीमतों में तुरंत कटौती का फैसला आसान नहीं होता।
मांग में कितनी तेजी?
IOCL चेयरमैन ने बताया कि भारत में डीजल की मांग सालाना करीब 2.5 से 3 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है। वहीं, पेट्रोल की डिमांड 4 से 5 प्रतिशत तक बढ़ रही है। साल के कुछ महीनों में तो यह 8 से 9 फीसदी तक भी पहुंच जाती है। एविएशन फ्यूल और LPG की मांग भी तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में कंपनियों को कैपेक्स के लिए पर्याप्त संसाधन जुटाने होते हैं, ताकि एनर्जी सिक्योरिटी बनी रहे और भविष्य की मांग पूरी की जा सके।
सस्टेनेबल एनर्जी पर क्या रुख?
साहनी ने कहा कि IOCL को सिर्फ पारंपरिक ईंधन ही नहीं, बल्कि सस्टेनेबल एनर्जी में भी भारी निवेश करना पड़ रहा है। बायोफ्यूल, बायोएथेनॉल और वेस्ट-टू-एनर्जी जैसे क्षेत्रों में निवेश जरूरी है। LPG की मांग भी 6 से 7 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है, जिसे पूरा करना कंपनियों की जिम्मेदारी है।
क्या 2026 में घटेंगी कीमतें?
IOCL चेयरमैन के मुताबिक, पेट्रोल-डीजल की कीमतें तय करना एक बड़े जिगसॉ पजल जैसा है, जहां कच्चा तेल सिर्फ एक हिस्सा है। रिफाइनिंग, मार्केटिंग, डिमांड ग्रोथ, कैपेक्स और एनर्जी ट्रांजिशन, सभी फैक्टर्स को जोड़कर ही कोई फैसला लिया जाता है। ऐसे में सीधे तौर पर यह नहीं कहा जा सकता है कि 2026 में डीजल पेट्रोल के दाम में कटौती होगी।
