दुनियाभर में अमीरों के पलायन का एक नया 'वर्ल्ड रिकॉर्ड' बनता दिख रहा है। रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि विकसित और विकासशील दोनों ही तरह के देशों से रईसों का मोहभंग हो रहा है। इस लिस्ट में सबसे बड़ा झटका ब्रिटेन को लगा है, जो कभी दुनिया के अमीरों का पसंदीदा ठिकाना हुआ करता था। पिछले साल अकेले ब्रिटेन से 16,500 रईसों ने देश छोड़ दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले एक दशक से ब्रिटेन की सुस्त पड़ती अर्थव्यवस्था और वहां लगातार बढ़ता टैक्स का बोझ अमीरों को रास नहीं आ रहा है। ब्रिटेन के बाद इस लिस्ट में दूसरा नंबर चीन का है, जहां से 7,800 अमीरों ने दूसरे देशों का रुख किया।
क्यों देश से बाहर जा रहे हैं भारतीय करोड़पति?
New World Wealth रिपोर्ट के मुताबिक भारत इस वैश्विक सूची में तीसरे स्थान पर है। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल 3,500 भारतीय करोड़पतियों ने स्थायी रूप से विदेश में बसने का फैसला किया। हालांकि, भारत एक तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है, लेकिन फिर भी रईसों का पलायन चिंता का विषय है। भारतीय अमीरों के देश छोड़ने के पीछे कई बड़े कारण हैं, जिनमें बेहतर लाइफस्टाइल, बच्चों के लिए विश्वस्तरीय शिक्षा, कम प्रदूषण और व्यापार के लिए ज्यादा आसान नियम शामिल हैं। इसके अलावा, कई रईस ऐसे देशों की तलाश में रहते हैं जहां 'टैक्स' की मार कम हो और निवेश पर सुरक्षा ज्यादा मिले। भारत के अलावा दक्षिण कोरिया, रूस और ब्राजील जैसे देशों से भी बड़ी संख्या में धनकुबेरों ने पलायन किया है।
किसे हुआ सबसे ज्यादा फायदा?
इस पूरे खेल में सबसे बड़ा 'विजेता' बनकर उभरा है यूनाइटेड अरब अमीरात (UAE)। दुबई की चमक-धमक और वहां की 'जीरो इनकम टैक्स' नीति ने दुनिया के अमीरों को अपना दीवाना बना लिया है। पिछले साल करीब 9,800 रईसों ने यूएई को अपना नया घर बनाया। यूएई का 'गोल्डन वीजा' प्रोग्राम और वहां की लग्जरी लाइफस्टाइल ने इसे अमीरों के लिए स्वर्ग बना दिया है। यूएई के बाद दूसरे नंबर पर अमेरिका रहा, जहां 7,500 रईसों ने शरण ली। इसके अलावा इटली, स्विट्जरलैंड, सऊदी अरब और सिंगापुर जैसे देशों ने भी अपनी उदार नीतियों के दम पर दुनिया के सबसे अमीर लोगों को आकर्षित करने में कामयाबी हासिल की है।
क्या यह किसी बड़े खतरे का संकेत है?
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि रईसों का पलायन सिर्फ टैक्स बचाने का मामला नहीं है। यह किसी भी देश की आर्थिक सेहत और वहां के निवेश माहौल का आईना होता है। जब किसी देश से बड़ी संख्या में पैसा और टैलेंट बाहर जाता है, तो वहां के स्टार्टअप इकोसिस्टम और रोजगार सृजन पर असर पड़ता है। हालांकि, भारत के संदर्भ में राहत की बात यह है कि भले ही कुछ लोग देश छोड़ रहे हों, लेकिन भारत में नए करोड़पति बनने की रफ्तार भी बहुत तेज है। भारत का शेयर बाजार और बढ़ता हुआ मिडिल क्लास अभी भी दुनिया भर के निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
