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EPFO से पूरे पैसे निकालने की टाइमलाइन क्यों बढ़ाकर 12 महीने की गई? खुद ईपीएफओ अधिकारी ने बताया

अगर आपने नौकरी छोड़ दी और खर्चे संभालने के लिए EPFO का पैसा निकालने की सोच रहे हैं तो बता दें सरकार ने ईपीएफओ (EPFO) के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब पूरा PF निकालने की समयसीमा 2 महीने से बढ़ाकर 12 महीने कर दी गई है। आइए बताते हैं इसके पीछे क्या कारण है?

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EPFO Withdrawal

अगर आप सोच रहे हैं कि नौकरी छोड़ते ही अपने EPF अकाउंट से पूरा पैसा तुरंत निकाल सकते हैं, तो अब ऐसा नहीं होगा। हाल ही में EPFO ने नियम बदलते हुए पूरे पैसे निकालने की टाइमलाइन 2 महीने से बढ़ाकर 12 महीने कर दी है। यह बदलाव शुरुआती तौर पर कई सब्सक्राइबर्स के लिए चौंकाने वाला हो सकता है, लेकिन इसके पीछे एक महत्वपूर्ण कारण है। आइए आपको बताते हैं आखिर 12 महीने बाद ही आप अपने EPFO का पूरा पैसा क्यों निकाल पाएंगे?

क्यों लिया गया ये फैसला?

EPFO के अधिकारियों के अनुसार, इस बदलाव का मकसद सब्सक्राइबर्स को उनके जमा पैसों पर अधिक से अधिक इंटरेस्ट का फायदा दिलाना है। पहले नियम के तहत, नौकरी छोड़ने के 2 महीने बाद ही पूरा पैसा निकालना संभव था, जिससे कई बार सब्सक्राइबर अपने पैसे पर एक बार भी ब्याज का लाभ नहीं ले पाते थे। नए नियम के मुताबिक, नौकरी छोड़ने के 12 महीने बाद ही पूरा पैसा निकाला जा सकेगा, जिससे अकाउंट में कम से कम एक बार इंटरेस्ट का पैसा जुड़ जाएगा।

पेंशन फंड कब निकाल सकेंगे

वहीं नौकरी छोड़ने के 2 महीने के बाद EPFO अकाउंट होल्डर पेंशन वाला फंड निकालने के लिए एलिजिबल नहीं होते थे लेकिन अब नए नियम के मुताबिक, बेरोजगार होने पर सब्सक्राइबर अपने पेंशन वाला फंड भी 12 महीने बाद निकाल सकते हैं।

ये है बड़ा कारण

अधिकारियों ने यह भी बताया कि नए नियम के तहत सब्सक्राइबर्स को अपने अकाउंट में कम से कम 25% बैलेंस बनाए रखना होगा। यानी नौकरी छोड़ने के बाद भी अकाउंट में कुछ राशि बनी रहेगी, ताकि इंटरेस्ट का लाभ लगातार मिलता रहे। EPFO के आंकड़ों के मुताबिक, अब भी करीब 50% मेंबर्स के अकाउंट में सेटलमेंट के समय 20,000 रुपये से कम फंड होता है, इसलिए यह बदलाव उन्हें वित्तीय लाभ देने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

50 फीसदी लोगों के अकाउंट में 20 हजार से कम बैलेंस

ईपीएफओ के आंकड़ों के अनुसार, 50% सब्सक्राइबर्स के खाते में अंतिम निपटान के समय 20,000 रुपये से भी कम राशि होती है और 87% के पास 1 लाख रुपये से कम बचत होती है। सरकार चाहती है कि लोग जल्दबाजी में पैसा निकालने की बजाय इसे लॉन्ग-टर्म सोशल सिक्योरिटी फंड समझें।

12 महीने बाद निकाल सकेंगे पैसा

अगर किसी संस्था में लंबी बंदी रहे या 2 महीने से ज्यादा समय तक वेतन न मिले, तो पहले 100% पीएफ निकालने की अनुमति थी। अब नए नियम के तहत ऐसे मामलों में भी पहले 12 महीने तक केवल 75% रकम ही निकाली जा सकेगी, और पूरा फंड तभी निकलेगा जब बेरोजगारी 12 महीने पूरी हो।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव कर्मचारियों को जल्दबाजी में पैसा निकालने से रोकने में मदद करेगा और कंपाउंडिंग ब्याज से उनकी बचत बढ़ेगी। यह कदम वित्तीय अनुशासन लाएगा और कर्मचारियों को अपने भविष्य की बेहतर योजना बनाने के लिए प्रेरित करेगा।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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