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1 महीने में 34% भागा Swan Defence, तेजी के माहौल में 5% लुढ़का, क्यों लगा लोअर सर्किट?

Swan Defence के शेयर में तेज रैली के बाद अचानक ब्रेक लग गया है। एक महीने में 34% चढ़ने वाला यह स्टॉक बुधवार को 5% फिसलकर लोअर सर्किट में आ गया है। एक्सचेंज डेटा के मुताबिक इसके पीछे प्रमोटर की हिस्सेदारी बिक्री जैसे बड़े कारण हैं, जिससे सेंटीमेंट बदला है।

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स्वान डिफेंस के शेयर में 5 फीसदी गिरावट

Swan Defence Share Price: ग्लोबल शेयर मार्केट्स में जब पिछले एक महीने में भारी गिरावट का दौर चला, तब करीब 34% की तेज रैली करने वाला Swan Defence Share बुधवार को 5% गिरावट के साथ लोअर सर्किट में आ गया है। जबकि, पिछले 6 महीने में इस स्टॉक ने करीब 295% का रिटर्न दिया है।

क्यों आई इतनी बड़ी गिरावट?

गिरावट की सबसे बड़ी वजह प्रमोटर Hazel Infra Limited को मिली प्री-डीलिंग अप्रूवल है। कंपनी ने एक्सचेंज को दी जानकारी में बताया कि प्रमोटर को 26.38 लाख शेयर बेचने की मंजूरी मिल गई है। इसकी वजह से ही स्टॉक लोअर सर्किट में है। क्योंकि, बायर्स को लग रहा है कि आने वाले दिनों में बाजार में बड़ी मात्रा में शेयर सप्लाई आ सकती है।

लो फ्री फ्लोट से बढ़ती है वोलैटिलिटी

Swan Defence का फ्री फ्लोट मार्केट कैप सीमित है, जिसके चलते इसमें वोलैटिलिटी काफी ज्यादा रहती है। कम उपलब्ध शेयरों वाले स्टॉक्स में छोटी-सी बिकवाली भी बड़े गिरावट में बदल सकती है। यही वजह है कि जहां तेजी में स्टॉक तेजी से भागता है, वहीं गिरावट में भी उतनी ही तेजी से फिसलता है। Swan Defence का फ्री फ्लोट मार्केट कैप करीब ₹611.32 करोड़ है। जबकि, कुल मार्केट कैप करीब ₹12,000 करोड़ के आसपास है। लेकिन ट्रेडिंग के लिए उपलब्ध शेयरों का हिस्सा बहुत छोटा है। यही वजह है कि इस स्टॉक में वोलैटिलिटी ज्यादा रहती है।

क्या यह सिर्फ करेक्शन है या संकेत?

मौजूदा गिरावट को पूरी तरह निगेटिव नहीं कहा जा सकता, क्योंकि यह तेज रैली के बाद आया करेक्शन भी हो सकता है। हालांकि, प्रमोटर की संभावित हिस्सेदारी बिक्री इसे थोड़ा संवेदनशील बना देती है। अब बाजार की नजर इस बात पर रहेगी कि प्रमोटर कितनी हिस्सेदारी बेचते हैं और उस दौरान संस्थागत या रिटेल निवेशकों की डिमांड कैसी रहती है। फिलहाल यह स्टॉक हाई रिटर्न के साथ हाई रिस्क कैटेगरी में बना हुआ है।

क्या हैं शेयर के पॉजिटिव-नेगेटिव?

शेयर प्राइस मोमेंटम के लिहाज से अब भी बुलिश जोन में है। लेकिन, कई फंडामेंटल मसले हैं, जो चिंता बढ़ाते हैं। मसलन, टेक्निकल लिहाज से देखें, तो स्टॉक प्राइस अब भी 200, 50 और 20 दिन के मूविंग एवरेज से ऊपर है। लेकिन, फंडामेंटल्स के मोर्चे पर देखें, तो स्टॉक प्राइस बुक वैल्यू की तुलना में 49x पर ट्रेड कर रहा है। कंपनी का इंट्रेस्ट कवरेज रेश्यो भी कमजोर है। इसके अलावा पिछले 5 वर्ष में कंपनी की सेल्स ग्रोथ में सालाना 37.8% की कमी आई है।

डिस्क्लेमर: TIMES NOW नवभारत किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ या कमोडिटी में निवेश की सलाह नहीं देता है। यहां पर केवल जानकारी दी गई है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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