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सैलरी से लेकर सेविंग तक एक ही अकाउंट में क्यों नहीं रखना चाहिए सारा पैसा?

क्या आप भी अपनी सैलरी और सेविंग एक ही बैंक अकाउंट में रखते हैं? बैंकिंग और सुरक्षा नियमों के अनुसार, आपकी यह एक छोटी सी लापरवाही साइबर फ्रॉड या बैंक डूबने की स्थिति में भारी नुकसान करा सकती है।

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Saving Account

आज के डिजिटल दौर में बैंकिंग प्रक्रिया बेहद आसान हो गई है। मोबाइल ऐप्स और यूपीआई (UPI) के आ जाने से लोग घर बैठे मिनटों में पैसों का लेन-देन कर लेते हैं। इस कदर बढ़ी सहूलियत के बीच बहुत से लोग आलस या सुविधा के नाम पर एक ही बैंक अकाउंट (Saving Account) में अपनी सैलरी (Salary Account) , रोजमर्रा के खर्च और अपनी पूरी जिंदगी की गाढ़ी कमाई यानी सेविंग्स (Savings) को समेट कर रखते हैं। उन्हें लगता है कि एक ही जगह सारा पैसा रहने से उसे मैनेज करना आसान होता है। लेकिन वित्तीय विशेषज्ञों (Financial Experts) और बैंकिंग नियमों के अनुसार, ऐसा करना आपकी सबसे बड़ी भूल साबित हो सकती है। एक ही बाल्टी में अपने सारे अंडे रखने जैसी यह आदत आपको किसी भी दिन बड़े आर्थिक संकट में डाल सकती है। अपनी पूरी जमा-पूंजी को सिर्फ एक ही अकाउंट में ब्लॉक रखने से न केवल आपके पैसे डूबने का जोखिम रहता है, बल्कि आप कई तरह के वित्तीय फायदों से भी हाथ धो बैठते हैं।

एक ही अकाउंट में क्यों नहीं रखना चाहिए सारा पैसा?

एक ही बैंक अकाउंट में सारा पैसा रखने का सबसे पहला और बड़ा खतरा साइबर फ्रॉड और ऑनलाइन स्कैम से जुड़ा है। आजकल ऑनलाइन धोखाधड़ी, फिशिंग लिंक्स और यूपीआई फ्रॉड के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। अगर आपका वही अकाउंट आपके हर पेमेंट ऐप (जैसे Google Pay, PhonePe या Paytm) से लिंक है, जिसमें आपकी लाखों की सेविंग्स रखी है, तो आप अनजाने में एक बहुत बड़ा जोखिम उठा रहे हैं। किसी भी एक गलत लिंक पर क्लिक होने या फोन हैक होने की स्थिति में स्कैमर्स आपके मुख्य अकाउंट को पूरी तरह से खाली कर सकते हैं। इसके विपरीत, अगर आप खर्चों के लिए एक अलग अकाउंट रखते हैं और उसमें सीमित पैसे रखते हैं, तो किसी धोखाधड़ी की स्थिति में भी आपकी मुख्य बचत (Savings) पूरी तरह से सुरक्षित बची रहती है।

दूसरी सबसे बड़ी समस्या

दूसरा बड़ा जोखिम तकनीकी खराबी और सर्वर डाउन होने से पैदा होता है। बैंक चाहे कितना भी बड़ा या सरकारी क्यों न हो, कई बार उनके मुख्य सर्वर तकनीकी गड़बड़ी या मेंटेनेंस के कारण घंटों या दिनों के लिए ठप हो जाते हैं। कल्पना कीजिए कि आप किसी आपातकालीन स्थिति (Emergency) में फंसे हैं, आपको अस्पताल का बिल चुकाना है या कोई बहुत जरूरी खरीदारी करनी है, और ठीक उसी समय आपके इकलौते बैंक का सर्वर डाउन हो जाता है या उसका एटीएम काम करना बंद कर देता है। ऐसी स्थिति में आपके पास पैसा होते हुए भी आप बेबस हो जाएंगे। वहीं, अगर आपके पास दो अलग-अलग बैंकों में अकाउंट होंगे, तो एक का सर्वर डाउन होने पर आप तुरंत दूसरे अकाउंट के डेबिट कार्ड या नेट बैंकिंग का इस्तेमाल करके अपना काम बिना किसी रुकावट के पूरा कर सकते हैं।

बैंक डूबा तो कितना पैसा मिलेगा वापस?

इसके अलावा, आपको डिपॉजिट इंश्योरेंस (DICGC) के नियमों को भी समझना होगा। आरबीआई (RBI) के नियमों के मुताबिक, अगर कोई बैंक दिवालिया हो जाता है या डूब जाता है, तो उस बैंक में जमा आपकी कुल राशि पर सरकार की तरफ से अधिकतम केवल 5 लाख तक का ही बीमा (Insurance) मिलता है। इसका मतलब यह है कि अगर आपने किसी एक ही बैंक में अपनी 20 लाख की लाइफ सेविंग्स जमा कर रखी है और वह बैंक डूब जाता है, तो कानूनी तौर पर आपको केवल 5 लाख ही वापस मिलेंगे और आपकी बाकी की 15 लाख की रकम डूब सकती है। इस बड़े नुकसान से बचने का सबसे स्मार्ट तरीका यह है कि आप अपनी बड़ी रकम को अलग-अलग दो या तीन मजबूत बैंकों में बांटकर रखें, ताकि आपका पूरा पैसा हर हाल में सुरक्षित रहे।

बिगड़ जाता है बजट

एक ही अकाउंट में पैसा रखने का एक और व्यावहारिक नुकसान यह है कि आपका बजट और वित्तीय अनुशासन पूरी तरह बिगड़ जाता है। जब सैलरी आते ही एक ही अकाउंट में दिखती है, तो इंसान को लगता है कि उसके पास खर्च करने के लिए बहुत पैसा है, जिससे फिजूलखर्ची बढ़ जाती है। महीने के अंत में यह हिसाब लगाना मुश्किल हो जाता है कि कितना पैसा जरूरी खर्चों में गया और कितनी वास्तव में बचत हुई। विशेषज्ञों की सलाह है कि हर व्यक्ति के पास कम से कम दो अकाउंट जरूर होने चाहिए पहला एक 'सैलरी या करंट अकाउंट' जिससे आपके घर के खर्च, ईएमआई (EMI) और बिलों का भुगतान हो, और दूसरा एक 'प्योर सेविंग्स अकाउंट' जिसका एटीएम कार्ड या यूपीआई ऐप आप अपने फोन में एक्टिव न रखें। इस सेविंग अकाउंट के पैसे को आप फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) या म्यूचुअल फंड (SIP) जैसी जगहों पर निवेश करके अपनी वेल्थ को बढ़ा सकते हैं। थोड़ी सी जागरूकता और यह छोटी सी बैंकिंग स्ट्रेटेजी आपको बड़े नुकसान से बचा सकती है।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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