Fear of trade war and recession has scared the market: आज भारत में होली का त्यौहार बड़ी धूम-धाम से मनाया जा रहा है। जहां इधर भारत में लोग होली के जश्न में डूबे हैं। वहीं अमेरिका से बुरी खबर मिल रही। वहां के शेयर बाजार में भारी गिरावट देखने को मिल रही है। बाजार में ट्रेड वार और मंदी के डर असर दिख रहा है। इस दौरान S&P 500 और Nasdaq में 2% तक की गिरावट देखी गई। व्यापार युद्ध की बढ़ती आशंकाओं, संभावित सरकारी शटडाउन और आर्थिक मंदी के डर ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। मार्च 12 को उम्मीद से कम उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आंकड़ों के बाद बाजार में तेजी आई थी, लेकिन यह बढ़त ज्यादा समय तक टिक नहीं पाई। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा फ्रांस और यूरोपीय संघ के अन्य देशों से आयातित शराब और अन्य अल्कोहलिक उत्पादों पर 200% टैरिफ लगाने की धमकी के बाद बाजार फिर से गिरावट की ओर चला गया। S&P 500 इंडेक्स 1.39% की गिरावट के साथ 5,521.52 पर बंद हुआ, जबकि टेक-हैवी Nasdaq 1.96% गिरकर 17,303.01 पर बंद हुआ।
अमेरिकी बाजार क्यों गिर रहा है?
1. व्यापार युद्ध का डर
ट्रंप प्रशासन ने चीन, भारत, यूरोपीय संघ, कनाडा और मैक्सिको पर टैरिफ लगा दिए हैं। इसके जवाब में इन देशों ने भी अमेरिका पर जवाबी टैरिफ लगा दिए हैं, जिससे व्यापार युद्ध शुरू हो गया है।
2. मुद्रास्फीति और मंदी की आशंका
अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर इन टैरिफ्स का नकारात्मक असर पड़ सकता है, जिससे मुद्रास्फीति बढ़ने और विकास दर घटने का खतरा है।
3. ब्याज दरों पर अनिश्चितता
फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
क्या अमेरिकी बाजार में और बड़ी गिरावट आ सकती है?
विश्लेषकों का मानना है कि 2025 अमेरिकी शेयर बाजार के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। Geojit Financial Services के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी. के. विजयकुमार के अनुसार, "अमेरिकी अर्थव्यवस्था पिछले तीन वर्षों में मजबूत बनी रही, लेकिन अब टैरिफ नीतियों के कारण यह एक महत्वपूर्ण मोड़ पर है। व्यापार युद्ध मुद्रास्फीति को बढ़ा सकता है और विकास दर को प्रभावित कर सकता है।"
उन्होंने आगे कहा कि "S&P 500 का PE अनुपात 28 और बफेट रेशियो (बाजार पूंजीकरण से GDP का अनुपात) 200% तक पहुंच गया है, जो उच्च मूल्यांकन को दर्शाता है। ऐसे में, यदि आर्थिक आंकड़े नकारात्मक रहे, तो बाजार में तेज गिरावट संभव है।"
Marcellus Investment Managers के ग्लोबल इक्विटी प्रमुख अरिंदम मंडल ने कहा कि "अमेरिकी GDP में निकट भविष्य में गिरावट आ सकती है, लेकिन 18-24 महीनों में अर्थव्यवस्था फिर से पटरी पर आ सकती है।"
आगे क्या होगा?
बाजार के लिए सबसे महत्वपूर्ण संकेतक होगा बेरोजगारी दर। अगर यह 4.5% से ऊपर जाती है, तो मंदी की आशंका और बढ़ जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अर्थव्यवस्था और कमजोर हुई, तो फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में जल्दी कटौती कर सकता है, जिससे बॉन्ड यील्ड कम हो सकती है और इससे शेयर बाजार को कुछ राहत मिल सकती है। हालांकि, फिलहाल निवेशकों के लिए सतर्क रहना जरूरी है।
डिस्क्लेमर : यहां शेयर बाजार में निवेश की सलाह नहीं दी गई है। इक्विटी मार्केट में जोखिम होता है, इसलिए निवेश अपने जोखिम पर करें। निवेश करने से पहले एक्सपर्ट की राय जरूर लें।
