बिजनेस

Robert Kiyosaki क्यों बोले स्टॉक्स नकली, सोना-चांदी असली धन, दिया हर गिरावट पर खरीदारी का मंत्र

रिच डैड पूअर डैड फेम लेखक और मशहूर निवेशक रॉबर्ट कियोसाकी ने एक फिर गोल्ड और सिल्वर में निवेश की तरफदारी की है। कियोसाकी का कहना है कि सिर्फ गोल्ड-सिल्वर ही असली एसेट हैं।

Image

रॉबर्ट कियोसाकी ने कहा सोना खरीदें

Robert Kiyosaki on Gold and Silver : शेयर बाजार हो या सोना-चांदी और बिटकॉइन, जब भी कीमतों में बड़ी गिरावट आती है तो निवेशकों के मन में एक ही सवाल उठता है कि पैसा निकालें या और निवेश करें? लेकिन मशहूर किताब 'रिच डैड पुअर डैड' (Rich Dad Poor Dad) के लेखक रॉबर्ट कियोसाकी की रणनीति इससे बिल्कुल अलग है। उनका कहना है कि बाजार में जब लोग घबराकर बिकवाली करते हैं, तब वह खरीदारी का मौका तलाशते हैं। नवंबर 2026 की शुरुआत में सोना, चांदी और बिटकॉइन की कीमतों में गिरावट के बीच उन्होंने कुछ ऐसा ही किया है।

कीमतें गिरीं तो कियोसाकी ने क्यों की खरीदारी?

रॉबर्ट कियोसाकी ने 4 नवंबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि जब लोग सोना, चांदी और बिटकॉइन की गिरावट से घबरा रहे थे, तब उन्होंने अपनी खरीदारी बढ़ा दी। उन्होंने कहा कि उन्हें अगली गिरावट का भी इंतजार है। कियोसाकी के मुताबिक, बाजार में कीमतों का गिरना असली समस्या नहीं है। सबसे बड़ी चिंता दुनिया पर बढ़ता कर्ज, खासकर अमेरिका का कर्ज, नेताओं की नीतिगत अक्षमता और वित्तीय शिक्षा की कमी है। उनका मानना है कि मौजूदा आर्थिक व्यवस्था में फिएट करेंसी यानी सरकार द्वारा जारी मुद्रा की वजह से मेहनत करने वाले और बचत करने वाले लोगों की संपत्ति की वास्तविक खरीद शक्ति कम होती जा रही है।

स्टॉक्स और बॉन्ड्स को नकली क्यों कहा?

कियोसाकी लंबे समय से शेयर, बॉन्ड और फिएट करेंसी को पेपर एसेट्स बताते रहे हैं। उनकी दलील है कि इनकी वैल्यू आर्थिक व्यवस्था, सरकारों, कंपनियों और वित्तीय संस्थानों पर भरोसे से जुड़ी होती है। जरूरत पड़ने पर सरकारें मुद्रा की आपूर्ति बढ़ा सकती हैं, जिससे महंगाई के कारण बचत की वास्तविक कीमत घट सकती है। हालांकि, यहां एक जरूरी अंतर समझना चाहिए। शेयर किसी कंपनी में वास्तविक हिस्सेदारी दर्शाता है, जबकि बॉन्ड कंपनी या सरकार के लिए कर्ज की देनदारी होता है। इसलिए सभी शेयरों को केवल कागजी वादा कहना तकनीकी रूप से सही नहीं है।

सोना-चांदी और बिटकॉइन पर इतना भरोसा क्यों?

कियोसाकी सोने और चांदी को ऐसी भौतिक संपत्ति मानते हैं, जिसकी आपूर्ति सरकारें नोटों की तरह नहीं बढ़ा सकतीं। इनका इस्तेमाल आभूषण, निवेश और औद्योगिक जरूरतों में भी होता है। वहीं, बिटकॉइन के पक्ष में उनकी दलील इसकी सीमित सप्लाई है। बिटकॉइन नेटवर्क में अधिकतम 21 मिलियन कॉइन बनाए जाने का प्रावधान है। कियोसाकी इसे महंगाई और मुद्रा के अवमूल्यन के खिलाफ संभावित सुरक्षा के तौर पर देखते हैं।

अमेरिका का 40 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा कर्ज बना चिंता

कियोसाकी की चिंता के पीछे अमेरिकी कर्ज का आंकड़ा भी है। अमेरिकी ट्रेजरी के आंकड़ों पर आधारित उपलब्ध ट्रैकिंग के मुताबिक, 3 नवंबर 2026 को अमेरिका का कुल सार्वजनिक कर्ज लगभग 40.55 ट्रिलियन डॉलर था। सालभर में इसमें करीब 2.55 ट्रिलियन डॉलर की बढ़ोतरी हुई है। उनका मानना है कि बढ़ते कर्ज और मौद्रिक नीतियों का खामियाजा अंततः आम लोगों को भुगतना पड़ सकता है। यही वजह है कि वह पारंपरिक बचत के बजाय ऐसे एसेट्स रखने की बात करते हैं, जिनकी सप्लाई सीमित हो।

क्या हर गिरावट पर खरीदारी करना सही रणनीति है?

कियोसाकी की रणनीति का आधार है कि बाजार की घबराहट को खरीदारी के अवसर की तरह देखा जाए। लेकिन उनकी यह सलाह हर निवेशक के लिए जरूरी नहीं कि सही साबित हो। सोने में भी कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव आता है, जबकि चांदी की अस्थिरता सोने से अधिक हो सकती है। बिटकॉइन में जोखिम और भी ज्यादा है। सोना नियमित ब्याज या डिविडेंड भी नहीं देता।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

और पढ़ें
End of Article