Mayawati EVM Statement BSP Meeting: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन-आधारित चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर बृहस्पतिवार को सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि ईवीएम का इस्तेमाल स्वतंत्र एवं निष्पक्ष मतदान को प्रभावित करने के लिए किया जा रहा है।
मायावती ने साथ ही यह दावा भी किया कि आबादी का एक बड़ा वर्ग मतपत्र प्रणाली की वापसी की मांग कर रहा है।
बसपा उत्तर प्रदेश प्रदेश कार्यालय कार्यालय में आयोजित बैठक में प्रदेश, मंडल सहित सभी स्तर के पदाधिकारी और राज्य के 75 जिलों के जिला अध्यक्ष शामिल हुए।
पार्टी द्वारा जारी एक बयान के मुताबिक मायावती ने कहा कि मतदान प्रक्रिया की विश्वसनीयता को लेकर चिंताएं सामने आने के बाद उनकी पार्टी ईवीएम के इस्तेमाल का विरोध करने वाली पहली पार्टी थी।
उन्होंने कहा, 'बसपा द्वारा 'बहुजन समाज' की एकजुटता और जागरुकता के बाद ईवीएम (इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन) को भी हथियार बनाकर स्वतंत्र व निष्पक्ष मतदान को प्रभावित करने का नया तरीका अविष्कार करने के आरोपों के मद्देनजर जब उसका सर्वप्रथम विरोध बसपा ने मतदान की अविश्वसनीयता को देख कर किया तब विरोधी पार्टियों व यथा-व्यवस्थावादी तत्वों आदि को यह अच्छा नहीं लगा।'
उन्होंने कहा,'आज देश की अधिकतर जनता ईवीएम पद्धति आदि को स्वतंत्र व निष्पक्ष चुनावी प्रक्रिया को प्रथमदृष्टया सही नहीं मानकर मतपत्रर से चुनाव कराने की पहली जैसी व्यवस्था बहाली की मांग कर रही है। वैसे चुनावी धांधलियों के मामलों में कांग्रेस पार्टी का दामन भी सर्वविदित तौर पर काफी दागदार रहा है।'
उन्होंने आरोप लगाया कि देश की राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक व्यवस्था के खोखले होने का मूल कारण एक पूरी तरह से विश्वसनीय, स्वतंत्र, निष्पक्ष और जवाबदेह चुनाव प्रणाली का न होना है।
युवाओं ने इसे एक नयी दिशा दी- मायावती
मायावती ने कहा कि यह मुद्दा कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकारों के समय से ही बसपा के लिए चिंता का विषय रहा है और पार्टी के राजनीतिक संघर्ष का एक बड़ा कारण भी बना हुआ है। उन्होंने इस मुद्दे को उठाने में 'जेन जी' (युवा पीढ़ी) की भागीदारी का भी उल्लेख किया और कहा कि युवाओं ने इसे एक नयी दिशा दी है और इसे एक प्रमुख सार्वजनिक मुद्दा बना दिया है।
उन्होंने सवाल किया, 'इस मुद्दे को दबाने के लिए हर स्तर पर कोशिशें की जा रही हैं। लेकिन क्या आग से आग बुझाना सही है?' मायावती ने आरोप लगाया कि धन-बल, सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग और राजनीति के अपराधीकरण ने लंबे समय से चुनावों को प्रभावित किया है।
उन्होंने एक स्वतंत्र, निष्पक्ष और विश्वसनीय मतदान प्रक्रिया की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि गरीबों, मजदूरों और बेरोजगार युवाओं के हितों की रक्षा के लिए चुनावी शुचिता (ईमानदारी) बहुत जरूरी है।
