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केंद्रीय बैंक हर महीने खरीद रहे थे 27 टन सोना, जनवरी में सिर्फ 5 टन, क्यों कर दिये कम?

Central Banks Gold Buying: हाल के समय में सोने और चांदी की कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है, हालांकि कुल मिलाकर रुझान बढ़त का ही है। वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के कारण निवेशक सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की ओर बढ़ रहे हैं। लेकिन World Gold Council की रिपोर्ट के मुताबिक 2025 में केंद्रीय बैंक हर महीने औसतन 27 टन सोना खरीद रहे थे, लेकिन जनवरी 2026 में यह घटकर केवल 5 टन रह गया।

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सोने-चांदी की कीमतों में तेजी, लेकिन केंद्रीय बैंकों की खरीदारी घटी (तस्वीर-istock)

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Central Banks Gold Buying: पिछले कुछ समय से सोने और चांदी की कीमतों में उठापटक जारी है। लेकिन अधिकांश रूख बढ़ोतरी का है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के कारण निवेशक सुरक्षित निवेश की तलाश में सोने की ओर रुख कर रहे हैं। इसी वजह से कई देशों के केंद्रीय बैंक भी अपने गोल्ड रिजर्व बढ़ा रहे थे। हालांकि हाल ही में आई एक रिपोर्ट से पता चलता है कि जनवरी महीने में केंद्रीय बैंकों की सोना खरीदने की रफ्तार अचानक कम हो गई है। World Gold Council की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में दुनिया भर के केंद्रीय बैंक वर्ष 2025 में हर महीने औसतन करीब 27 टन सोना खरीद रहे थे। लेकिन जनवरी 2026 में यह आंकड़ा काफी घटकर सिर्फ 5 टन रह गया। यानी केंद्रीय बैंकों की कुल खरीदारी में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल में एशिया पैसिफिक की सीनियर रिसर्च मैनेजर मारिसा सलीम ने कहा कि कमजोर खरीदारी की रफ्तार डिमांड में स्ट्रक्चरल बदलाव के बजाय शॉर्ट-टर्म फैक्टर्स को दिखा सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक सोने की कीमतों में लगातार हो रहे उतार-चढ़ाव के कारण केंद्रीय बैंक और बड़े निवेशक दोनों ही फिलहाल थोड़ी सावधानी बरत रहे हैं। आमतौर पर जब वैश्विक बाजार में अनिश्चितता बढ़ती है तो निवेशक सोने जैसे सुरक्षित निवेश विकल्प की ओर जाते हैं। लेकिन इस बार कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव के कारण कई संस्थागत निवेशक थोड़ा सतर्क नजर आ रहे हैं।

अलग-अलग देशों के केंद्रीय बैंकों की स्थिति

रिपोर्ट में विभिन्न देशों के केंद्रीय बैंकों द्वारा की गई खरीदारी और बिक्री का भी जिक्र किया गया है। भारतीय रिजर्व बैंक ने पिछले कुछ महीनों के मुकाबले जनवरी में सोने की खरीद काफी कम कर दी। जनवरी 2026 में आरबीआई ने केवल 0.03 टन सोना ही खरीदा। वहीं दूसरी ओर उज्बेकिस्तान सेंट्रल बैंक ने जनवरी में करीब 9 टन सोना खरीदा, जो इस महीने की सबसे बड़ी खरीदारी में से एक रही। इसके अलावा मलेशिया के केंद्रीय बैंक ने करीब 3 टन और चीन के केंद्रीय बैंक ने करीब 1 टन सोना खरीदा। हालांकि इस दौरान कुछ देशों ने अपने गोल्ड रिजर्व से सोना बेचा भी। उदाहरण के तौर पर रूस के केंद्रीय बैंक ने करीब 9 टन सोना बेच दिया। यही कारण है कि कुल मिलाकर दुनिया के केंद्रीय बैंकों की नेट खरीद जनवरी में सिर्फ 5 टन रह गई।

सोने की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव

सोने की कीमतें बढ़ रही हैं क्योंकि अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते झगड़े ने इन्वेस्टर्स को सेफ-हेवन एसेट की ओर खींचा। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हाजिर सोना 5 मार्च 2026 बढ़कर 5,177.33 डॉलर प्रति औंस हो गया। अप्रैल डिलीवरी के लिए यूएस गोल्ड वायदा भाव बढ़कर 5,185.50 डॉलर हो गया। घरेलू कमोडिटी एक्सचेंज Multi Commodity Exchange of India (MCX) पर सोने की कीमत करीब 161700 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गई है।

रिकॉर्ड स्तर के बाद आई तेज गिरावट

29 जनवरी 2026 को सोने की कीमत ने ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाया था। उस दिन घरेलू बाजार में सोना करीब 1,80,000 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया था। लेकिन रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के अगले ही दिन कीमतों में तेज गिरावट भी देखने को मिली। इसके बाद फरवरी महीने में भी बाजार में काफी अस्थिरता बनी रही। मार्च के पहले कारोबारी दिन कीमतों में थोड़ी तेजी जरूर आई, लेकिन उसके बाद फिर से उतार-चढ़ाव जारी है।

भू-राजनीतिक तनाव का असर

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर बढ़ रहे भू-राजनीतिक तनाव भी सोने की कीमतों को प्रभावित कर रहे हैं। खासतौर पर ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक बाजार में अनिश्चितता को बढ़ा दिया है। ऐसे हालात में निवेशक आमतौर पर सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर जाते हैं, जिससे सोने और चांदी की मांग बढ़ सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर वैश्विक तनाव और आर्थिक अनिश्चितता बनी रहती है, तो आने वाले समय में कमोडिटी बाजार में और तेजी देखने को मिल सकती है।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

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