WPI July 2026 : खुदरा महंगाई के बाद अब थोक कीमतों ने भी बड़ा झटका दिया है। जुलाई 2026 में देश की थोक महंगाई दर 9.78% रही। एक साल पहले जुलाई 2025 में थोक महंगाई दर -0.58% थी। यानी एक साल में इसमें 10.36 प्रतिशत अंक का बड़ा उछाल आया है। जुलाई 2025 में थोक कीमतों में सालाना आधार पर गिरावट दर्ज की गई थी, जबकि जुलाई 2026 में तस्वीर पूरी तरह बदल गई है।
मासिक आधार पर मामूली राहत
महंगाई के आंकड़ों में मासिक आधार पर थोड़ी राहत जरूरत मिली है। जून 2026 के 9.87% के मुकाबले जुलाई में WPI महंगाई में मामूली नरमी आई है। लेकिन करीब 10% की दर यह बताती है कि उत्पादन और थोक बाजार में कीमतों का दबाव अभी भी काफी मजबूत है।
ईंधन सबसे ज्यादा महंगा हुआ
जुलाई में सबसे बड़ा दबाव ईंधन और ऊर्जा (Fuel & Power) सेक्टर से आया। इस समूह की महंगाई दर 20.05% रही। जून में यह 27.41% थी। यानी महीने-दर-महीने इसमें कमी जरूर आई, लेकिन सालाना आधार पर कीमतों का दबाव अभी भी काफी ऊंचा है। Mineral Oils की महंगाई जुलाई में 32.4% रही। क्रूड, पेट्रोलियम और नैचुरल गैस की कीमतों में भी सालाना आधार पर 26.99% की बढ़ोतरी हुई। इसके मुकाबले बिजली (Electricity) की महंगाई 1.09% रही।
एक साल पहले तस्वीर बिल्कुल अलग थी। जुलाई 2025 में ईंधन और ऊर्जा की महंगाई -2.43% थी। यानी इस समूह में एक साल के भीतर करीब 22.48 प्रतिशत अंक का बड़ा बदलाव आया है।
खाने-पीने की कीमतों का दबाव भी बढ़ा
खाद्य कीमतों से भी राहत नहीं मिली है। WPI Food Index की महंगाई जुलाई 2026 में बढ़कर 6.65% हो गई, जबकि जून में यह 6.14% थी। खाने पीने के सामान (Food Articles) की महंगाई जुलाई में 5.44% रही, जबकि रेडिमेड खाने (Manufactured Food Products) की महंगाई 8.89% तक पहुंच गई। यानी कच्चे खाद्य पदार्थों के साथ-साथ उनसे तैयार होने वाले खाद्य उत्पादों की कीमतों पर भी दबाव बना हुआ है। यहां भी पिछले साल के मुकाबले बड़ा बदलाव देखने को मिलता है। जुलाई 2025 में फूड इंडेक्स की महंगाई -2.15% थी। यानी एक साल में फूड इंडेक्स में करीब 8.80 प्रतिशत अंक का बदलाव आया है।
प्राइमरी आर्टिकल्स में तेजी
सीधे प्रकृति से मिलने वाली वस्तुओं को प्राइमरी आर्टिकल कहा जाता है। इस तरह की वस्तुाओं की महंगाई जुलाई 2026 में 8.52% रही, जबकि जून में यह 7% थी। इस समूह में नॉन फूड आर्टिकल की महंगाई सबसे ज्यादा 17.66% रही। वहीं, मिनरल्स की महंगाई भी 13.28% रही। वहीं, फूड आर्टिकल की महंगाई 5.44% रही। इसका मतलब है कि थोक बाजार में सिर्फ खाद्य कीमतें ही दबाव नहीं बना रही हैं, बल्कि औद्योगिक कच्चे माल और दूसरी प्राथमिक वस्तुओं की कीमतें भी तेजी से बढ़ रही हैं।
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर भी महंगा
विनिर्मित वस्तुएं (Manufactured Products) की महंगाई जुलाई में बढ़कर 8.29% हो गई, जो जून के 7.48% से ज्यादा है। इसमें टेक्सटाइल (Textiles) की महंगाई 12.8%, केमिकल्स की 13.12%, बेसिक मेटल्स की 12.56% और इलेक्ट्रिकल्स की 12.34% रही। यानी उद्योगों के लिए कच्चे माल और उत्पादन लागत का दबाव कई प्रमुख क्षेत्रों में बना हुआ है। एक साल पहले जुलाई 2025 में मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स की महंगाई सिर्फ 2.05% थी।
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