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अगर दो पत्नियां हों तो किसे मिलेगी EPFO की पेंशन, जानें क्या है नियम?

EPFO नियमों के तहत पेंशन का पहला हक कानूनी रूप से वैध पत्नी का होता है। अगर किसी की 2 पत्नियां हैं तो किसे पेंशन का पैसा मिलेगा? अगर आप भी इसी सवाल ढूंढ रहे हैं तो आइए बताते हैं।

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EPFO

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के तहत मिलने वाली फैमिली पेंशन को लेकर अक्सर लोगों के मन में कई सवाल होते हैं, खासकर उन स्थितियों में जहाँ किसी कर्मचारी की दो पत्नियां हों। भारत में सामाजिक और कानूनी व्यवस्था के अनुसार, ईपीएफओ के 'एम्प्लॉइज पेंशन स्कीम 1995' (EPS-95) में नॉमिनेशन और पेंशन वितरण के बहुत सख्त नियम बनाए गए हैं। अगर किसी ईपीएफओ सदस्य की मृत्यु हो जाती है और उसकी दो पत्नियां हैं, तो पेंशन का हकदार कौन होगा, यह पूरी तरह से कानूनी वैधता और कर्मचारी द्वारा किए गए नॉमिनेशन पर निर्भर करता है।

कानूनी वैधता और ईपीएफओ का रुख

ईपीएफओ के नियमों के अनुसार, पेंशन का लाभ केवल उसी पत्नी को मिलता है जिसे कानूनी रूप से 'वैध' माना जाता है। भारतीय कानून (हिंदू विवाह अधिनियम) के तहत, पहली पत्नी के रहते हुए दूसरी शादी करना गैर-कानूनी है, जब तक कि पहली पत्नी से तलाक न हो गया हो या उसकी मृत्यु न हो गई हो। ऐसी स्थिति में, ईपीएफओ आमतौर पर पहली जीवित पत्नी को ही पेंशन का हकदार मानता है। अगर कर्मचारी ने अपनी दूसरी पत्नी को नॉमिनी बना भी दिया है, तब भी पहली पत्नी कानूनी तौर पर इस पेंशन को क्लेम कर सकती है। हालांकि, अगर पहली पत्नी की मृत्यु हो चुकी है या कानूनी रूप से तलाक हो गया है, तो दूसरी पत्नी को पेंशन का पूरा लाभ मिलता है।

क्या दोनों पत्नियों में बट सकती है पेंशन?

कुछ विशेष मामलों में, जहाँ पर्सनल लॉ (जैसे मुस्लिम पर्सनल लॉ) एक से अधिक विवाह की अनुमति देता है, वहां ईपीएफओ नियमों में बदलाव आ सकता है। यदि कर्मचारी की मृत्यु के समय एक से अधिक कानूनी रूप से वैध पत्नियां हैं, तो पेंशन की राशि को सभी पत्नियों के बीच समान रूप से बांटा जा सकता है। लेकिन सामान्य परिस्थितियों में, पेंशन पाने का पहला अधिकार सबसे बड़ी (पहली) जीवित पत्नी का ही होता है। पत्नी की मृत्यु के बाद, यह पेंशन कर्मचारी के बच्चों को मिलती है, जब तक कि वे 25 वर्ष की आयु पूरी नहीं कर लेते।

नॉमिनेशन (e-Nomination) की भूमिका

ईपीएफओ हमेशा सदस्यों को e-Nomination भरने की सलाह देता है ताकि भविष्य में परिवार को कोई परेशानी न हो। पेंशन नियमों के अनुसार, परिवार की परिभाषा में पत्नी और बच्चे शामिल हैं। यदि सदस्य ने किसी ऐसे व्यक्ति को नॉमिनी बनाया है जो परिवार का हिस्सा नहीं है, तो सदस्य की मृत्यु के बाद वह नॉमिनेशन अवैध माना जा सकता है क्योंकि पेंशन पर पहला हक कानूनी वारिस (पत्नी/बच्चे) का ही होता है। अगर कोई सदस्य अविवाहित है, तो वह अपने माता-पिता को नॉमिनी बना सकता है।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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