बिजनेस

शेयरों में SIP करें या म्यूचुअल फंड पर रखें भरोसा, समझें ज्यादा रिटर्न के लालच और रिस्क का पूरा गणित

जब निवेशक समझते हैं कि म्यूचुअल फंड आखिर में स्टॉक्स में निवेश करते हैं, तो उन्हें लगता है कि क्यों न वे खुद ही उन स्टॉक्स में ही SIP शुरू कर दें। यहां समझें लालच और रिस्क का पूरा गणित।

Image

स्टॉक्स में एसआईपी बढ़ाता है जोखिम

Mutual Fund Vs SIP in Stocks : लंबी अवधि में निवेश कर संपत्ति बनाने के लिए निवेशकों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि आखिर निवेश कहां किया जाए। क्या सीधे शेयरों में SIP (सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) करना बेहतर रहेगा या म्यूचुअल फंड SIP के जरिए पैसा लगाना ज्यादा समझदारी होगी?

यह सवाल हाल ही में ET Now के कार्यक्रम The Money Show में भी उठा। हरक्यूलिस एडवाइजर्स के संस्थापक आदित्य शाह ने बताया कि सिर्फ ज्यादा रिटर्न के लालच में सीधे शेयरों में SIP करना हर निवेशक के लिए सही रणनीति नहीं हो सकती।

शाह का कहना है कि पहली नजर में शेयरों में निवेश ज्यादा रिटर्न देने वाला विकल्प लग सकता है, लेकिन इसके साथ जोखिम भी उतना ही बड़ा होता है। वहीं, म्यूचुअल फंड अपेक्षाकृत कम जोखिम के साथ प्रोफेशनल मैनेजमेंट का फायदा देते हैं। ऐसे में सही फैसला निवेशक की उम्र, जोखिम उठाने की क्षमता और वित्तीय लक्ष्यों पर निर्भर करता है।

सीधे शेयरों में SIP के लिए लगातार निगरानी जरूरी

कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ नागरिक और लंबे समय से निवेश कर रहे रमेश ने बताया कि उन्होंने ITC Hotels, KIMS और Bharat Electronics (BEL) के शेयरों में निवेश किया है। उन्होंने जानना चाहा कि क्या इन शेयरों में SIP जारी रखनी चाहिए या किसी दूसरे निवेश विकल्प पर विचार करना चाहिए। इस पर आदित्य शाह ने कहा कि यदि कोई निवेशक अपने शेयरों को लेकर बार-बार किसी दूसरे से सलाह मांग रहा है कि उन्हें रखना चाहिए या बेचना चाहिए, तो यह संकेत है कि डायरेक्ट इक्विटी उसके लिए सबसे उपयुक्त निवेश विकल्प नहीं हो सकती।

सिर्फ तीन शेयरों में निवेश से बढ़ सकता है जोखिम

आदित्य शाह ने स्पष्ट किया कि ITC Hotels, KIMS और BEL जैसी कंपनियां मजबूत बुनियादी आधार वाली हैं। खासकर BEL ने पिछले दो-तीन वर्षों में शानदार प्रदर्शन किया है। हालांकि किसी भी निवेशक का पोर्टफोलियो केवल तीन शेयरों तक सीमित होना जोखिम को बढ़ा देता है, क्योंकि किसी एक सेक्टर या कंपनी में गिरावट आने पर पूरे निवेश पर असर पड़ सकता है।

क्यों म्यूचुअल फंड को माना बेहतर विकल्प?

आदित्य शाह के मुताबिक, जो निवेशक शेयर बाजार को रोजाना ट्रैक नहीं कर सकते या जिनके पास रिसर्च करने का समय नहीं है, उनके लिए म्यूचुअल फंड बेहतर विकल्प हैं। उन्होंने कहा कि म्यूचुअल फंड में निवेश करने पर निवेशकों को हर कंपनी की अलग-अलग निगरानी नहीं करनी पड़ती। प्रोफेशनल फंड मैनेजर लगातार कंपनियों के प्रदर्शन, बाजार की स्थिति और जोखिम का आकलन करते हैं तथा जरूरत पड़ने पर पोर्टफोलियो में बदलाव भी करते हैं। इससे निवेशक को विशेषज्ञों की मदद का लाभ मिलता है।

वरिष्ठ नागरिकों को कितनी इक्विटी रखनी चाहिए?

आदित्य शाह का कहना है कि वरिष्ठ नागरिकों को अपनी कुल निवेश राशि का केवल 10% से 20% हिस्सा ही इक्विटी में रखना चाहिए। हालांकि यह प्रतिशत हर व्यक्ति की वित्तीय स्थिति और जोखिम उठाने की क्षमता के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। उन्होंने सलाह दी कि इस आयु वर्ग के निवेशकों को मिडकैप और स्मॉलकैप फंड में अधिक जोखिम लेने से बचना चाहिए। इसके बजाय बड़े और स्थापित शेयरों में निवेश करने वाले फ्लेक्सी कैप फंड बेहतर विकल्प हो सकते हैं, क्योंकि इनमें उतार-चढ़ाव अपेक्षाकृत कम रहता है।

इन फ्लेक्सी कैप फंड्स का किया जिक्र

आदित्य शाह ने निवेशकों के लिए कुछ फ्लेक्सी कैप फंड्स का भी उल्लेख किया। इनमें Parag Parikh Flexi Cap Fund, HDFC Flexi Cap Fund, Helios Flexi Cap Fund और Abakkus Flexi Cap Fund शामिल हैं। उन्होंने कहा कि Helios और Abakkus जैसे अपेक्षाकृत नए फंड अपने छोटे एसेट बेस की वजह से बेहतर रिटर्न देने की क्षमता रखते हैं। हालांकि किसी भी फंड में निवेश करने से पहले निवेशक की पूरी वित्तीय स्थिति और एसेट एलोकेशन को ध्यान में रखना जरूरी है।

डिस्क्लेमर: TimesNow Navbharat किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है। यहां पर केवल जानकारी दी गई है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें।
    Yateendra Lawaniya
    यतींद्र लवानियाauthor

    प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

    और पढ़ें
    End of Article