अमेरिकी फर्म हिंडनबर्ग की रिपोर्ट के बाद गौतम अडानी की कंपनी अडानी एंटरप्राइजेज के स्टॉक में उतार चढ़ाव से हर कोई वाकिफ है। रिपोर्ट का असर यह हुआ कि अमीरों की सूची में तीसरे स्थान से 33वें स्थान पर गौतम अडानी पहुंच गए। यह मामला सुप्रीम कोर्ट की दहलीज तक पहुंचा कि क्या अडानी की फर्म मैनिपुलेशन में शामिल रही है। क्या सेबी के सेक्शन 19 का उल्लंघन हुआ। इस विषय में केंद्र सरकार ने समिति बनाने की अर्जी सुप्रीम कोर्ट में दायर की थी। हालांकि कोर्ट ने केंद्र के प्रस्ताव को नकार दिया और अब खुद 6 सदस्यों वाली समिति गठित की। इस समिति की अगुवाई रिटायर्ड जस्टिस ए एम सप्रे करेंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने गठित की समिति
- 6 सदस्यों वाली कमेटी करेगी जांच
- सुप्रीम कोर्ट के अवकाश प्राप्त जस्टिस ए एम सप्रे करेंगे अगुवाई
- अवकाश प्राप्त जस्टिस ए एम सप्रे (कमेटी के अध्यक्ष), ओ पी भट्ट, जस्टिस जे पी देवधर
- नंदन नीलकेणि, के वी कामथ, सोमशेखर सुंदरेशन
- दो महीने में रिपोर्ट पेश करने के निर्देश
- सेबी के सेक्शन 19 के उल्लंघन का मामला
- सेबी को सहयोग करने के निर्देश
रिपोर्ट पेश करने के लिए दो महीने का समय
अदालत ने समिति को दो महीने के अंदर बंद लिफाफे में रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही समिति उपायों के बारे में बताएगी ताकि सेबी की कार्यपद्धति को और ज्यादा मजबूत और पारदर्शी बनाया जा सके। अदालत ने सेबी को निर्देश दिया है कि वो इस मामले में समिति को हर संभव मदद करे। बता दें कि निवेशकों की हितों की रक्षा के संबंध में याचिका दायर की गई थी। इस विषय पर बजट सत्र के दौराना जबरदस्त हंगामा हुआ था। विपक्ष ने जेपीसी जांच की मांग की थी।लेकिन सरकार ने यह कहते हुए इनकार कर दिया था कि जेपीसी किसी प्राइवेट शख्स के खिलाफ नहीं करायी जा सकती।
