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सोना कब खरीदें और कब बेचें? इन 3 संकेतों को समझ लिया, तो कभी नहीं होगा घाटा

सोने में निवेश करना 'लॉन्ग टर्म' के लिए अच्छा है, लेकिन भाव बढ़ने के लालच में बैठे रहना आपको सही मौके से वंचित कर सकता है। अगर आपका पोर्टफोलियो सोने से भर गया है, आपके वित्तीय लक्ष्य करीब हैं या बाजार में रिकॉर्ड तेजी है, तो ये संकेत हैं कि अब आपको अपना कुछ सोना बेच देना चाहिए।

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Gold Investment Exit signs

भारतीय परिवारों में सोने को केवल एक आभूषण नहीं, बल्कि संकट के समय का सबसे भरोसेमंद साथी माना जाता है। निवेश के नजरिए से देखें तो सोना (Gold) हमेशा से सुरक्षित एसेट रहा है। लेकिन, एक समझदार निवेशक वही है जो न केवल यह जानता है कि सोना कब खरीदना है, बल्कि यह भी समझता है कि उसे कब बेचना है। अक्सर लोग सोने को सालों-साल दबाकर रखते हैं और सही समय पर मुनाफा कमाने का मौका चूक जाते हैं। अगर आप भी सोने की बढ़ती कीमतों को देखकर उलझन में हैं कि क्या अभी सोना बेच देना चाहिए, तो ये 3 संकेत आपकी मदद कर सकते हैं। आइए आपको बताते हैं आपको कब अपने सोने के निवेश से एग्जिट ले लेना चाहिए।

1. पोर्टफोलियो का असंतुलन (Portfolio Rebalancing)

निवेश का एक सुनहरा नियम है 'एसेट एलोकेशन'। फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स मानते हैं कि आपके कुल निवेश का केवल 10% से 15% हिस्सा ही सोने में होना चाहिए। मान लीजिए, आपने ₹1 लाख का निवेश किया था, जिसमें ₹15,000 का सोना था। अब सोने की कीमतें तेजी से बढ़ गईं और आपके सोने की वैल्यू ₹25,000 हो गई। अब आपके पोर्टफोलियो में सोने का हिस्सा 15% से बढ़कर 25% हो गया है। ऐसी स्थिति में, बढ़े हुए हिस्से को बेचकर मुनाफा वसूलना (Profit Booking) और उस पैसे को इक्विटी या डेट फंड में डालना एक समझदारी भरा कदम होता है। इसे ही 'पोर्टफोलियो रीबैलेंसिंग' कहते हैं।

2. वित्तीय लक्ष्यों की प्राप्ति (Financial Goals)

सोना खरीदने का एक बड़ा उद्देश्य भविष्य की जरूरतों को पूरा करना होता है, जैसे बच्चों की उच्च शिक्षा, शादी या घर खरीदना। यदि आपने किसी खास लक्ष्य के लिए सोना जमा किया था और आज सोने की कीमतें इतनी बढ़ गई हैं कि आपका वह लक्ष्य आसानी से पूरा हो सकता है, तो कीमतों के और बढ़ने का इंतजार करना जोखिम भरा हो सकता है। बाजार में गिरावट कभी भी आ सकती है। इसलिए, जब आपका लक्ष्य सामने हो, तो सोने को बेचकर नकदी (Cash) हासिल करना ही सही रणनीति है। याद रखें, निवेश का असली फायदा तभी है जब वह आपकी जरूरत के समय काम आए।

3. बाजार की स्थिति और आर्थिक संकेत

सोने की कीमतें अक्सर शेयर बाजार के विपरीत चलती हैं। जब दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं में अनिश्चितता होती है या युद्ध जैसे हालात (जैसे मिडिल ईस्ट संकट) बनते हैं, तो सोने के दाम आसमान छूने लगते हैं। ऐसे समय में जब सोना अपने 'ऑल-टाइम हाई' (All-time High) पर हो, तो आंशिक रूप से (Partially) मुनाफा वसूल लेना चाहिए। इसके अलावा, यदि बैंक की ब्याज दरें (FD Rates) बढ़ रही हैं या शेयर बाजार में गिरावट के बाद रिकवरी की उम्मीद दिख रही है, तो निवेशक सोने से पैसा निकालकर अन्य विकल्पों में लगा सकते हैं जहाँ रिटर्न मिलने की संभावना ज्यादा हो।

सोना बेचने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

सोना बेचने का फैसला लेने से पहले यह जरूर देखें कि आपके पास सोना किस रूप में है। अगर आपके पास डिजिटल गोल्ड, गोल्ड ईटीएफ (ETF) या सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) है, तो उन्हें बेचना और मुनाफा कमाना बहुत आसान है क्योंकि इसमें मेकिंग चार्ज या शुद्धता की कटौती नहीं होती। वहीं, फिजिकल ज्वेलरी बेचने पर आपको मेकिंग चार्ज का नुकसान उठाना पड़ता है और ज्वेलर शुद्धता के नाम पर भी कटौती कर सकता है। इसलिए, अगर बहुत जरूरी न हो, तो पुरानी ज्वेलरी को बेचने के बजाय उसे एक्सचेंज करना या डिजिटल गोल्ड में मुनाफा बुक करना बेहतर विकल्प है।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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