India To Become Third Largest Economy: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रगति मैदान के नए रुप के उद्घाटन के मौके पर इस बात का देश की जनता को भरोसा दिलाया है, NDA के तीसरे कार्यकाल के दौरान भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी होगा। उन्होंने यह भी कहा कि यह मोदी की गारंटी है। अब सवाल उठता है कि प्रधानमंत्री मोदी के इस भरोसे की क्या वजह है। तो उसकी सबसे बड़ी वजह पिछले एक दशक में भारत की लंबी छलांग है। साल 2014 में भारत दुनिया की 10 वीं सबसे बड़ी इकोनॉमी थी। उस समय उसकी GDP करीब 2 लाख करोड़ की थी। जो कि 2023 में 3.7 लाख करोड़ के साथ दुनिया की 5 वीं सबसे बड़ी इकोनॉमी बन गई है। और अगर अमेरिका, चीन, जापान से लेकर दूसरी विकसित और उभरती इकोनॉमी को देखा जाय तो भारतीय जीडीपी साइज की ग्रोथ अमेरिका से भी तेज गति से हुई है। अमेरिका का जीडीपी साइज 9 साल में 38 फीसदी बढ़ा है। जबकि चीन का 84 फीसदी और भारत का 83 फीसदी बढ़ा है।
2027 में भारत बनेगा तीसरी सबसे इकोनॉमी
जीडीपी की यही रफ्तार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भरोसे को बढ़ाती है। अगर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के आकलन को देखा जाय तो साल 2027 तक भारतीय इकोनॉमी 2025 तक जापान को पछाड़कर तीसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी बन जाएगी। हालांकि इसके बावजूद अमेरिका और चीन की तुलना में वह काफी पीछे रहेगी। अमेरिका की इकोनॉमी जहां 26 लाख करोड़ डॉलर से बढ़कर 31 लाख करोड़ डॉलर की हो जाएगी। वहीं चीन की इकोनॉमी 19 लाख करोड़ डॉलर से बढ़कर 25 लाख करोड़ डॉलर की हो जाएगी। ऐसे में भारत तीसरे पर रहने के बावजूद दोनों देशों से काफी पीछे रहेगा।
| देश (रैंक) | जीपीडी साइज (2023) | जीडीपी साइज (2027) |
| अमेरिका -1 | करीब 26 लाख करोड़ डॉलर | करीब 31 लाख करोड़ डॉलर |
| चीन-2 | करीब 17 लाख करोड़ डॉलर | करीब 25 लाख करोड़ डॉलर |
| भारत-5 | करीब 3.7 लाख करोड़ डॉलर | करीब 5 लाख करोड़ डॉलर |
लोगों की इनकम में भी उसी रफ्तार से बढ़ना जरूरी
यह अच्छी बात है कि भारतीय इकोनॉमी 10 से 5 वें और अब तीसरे स्थान पर पहुंचने की ओर है। लेकिन प्रति व्यक्ति आय के मामले में काफी पीछे है। और भारत का स्थान पहले 100 में भी नहीं आता है। ऐसे में इस मानक में भी आगे बढ़ने की जरूरत है। इस समय भारत की प्रति व्यक्ति आय 2600 डॉलर प्रति वर्ष है। और इसके 2027 तक 3400 डॉलर पहुंचने का अनुमान है।
| देश | प्रति व्यक्ति आय (सालाना ) |
| आयरलैंड | 145,000 डॉलर |
| सिंगापुर | 133,000 डॉलर |
| अमेरिका | 80,000 डॉलर |
| चीन | 13,720 डॉलर |
| भारत | 2600 डॉलर |
| बांग्लादेश | 2470 डॉलर |
