What is Nil ITR And Its Benefits: इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) एक जरूरी फाइनेंशियल जिम्मेदारी है, जिससे लोग और कंपनियां अपनी इनकम, डिडक्शंस और बाकी जरूरी वित्तीय जानकारी टैक्स अधिकारियों को सौंपती हैं। हालाँकि, यदि किसी वित्तीय वर्ष में इंडिविजुअल टैक्सपेयर की इनकम 2.5 लाख रु से कम हो तो उसकी टैक्स लायबिलिटी जीरो होती है और इसलिए उन्हें कोई इनकम टैक्स देने की आवश्यकता नहीं होती।
ऐसे लोग टैक्स लायबिलिटी के अधीन नहीं होते, इसलिए उन्हें आयकर रिटर्न दाखिल करने की आवश्यकता नहीं होती। मगर यदि वे जीरो टैक्स लायबिलिटी पर भी आईटीआर फाइल करते हैं, तो इसी को "जीरो रिटर्न" (Nil ITR) कहा जाता है। जीरो रिटर्न दाखिल करना जरूरी नहीं है, मगर इसके कई फायदे हैं।
आसानी से मिलता है लोन
आयकर रिटर्न भारत सरकार की ओर से इनकम का एक मान्यता प्राप्त प्रूफ है। लोन रिक्वेस्ट की शर्तों और राशि को मंजूरी देने से पहले, लोन देने वाली कंपनी या बैंक आपकी साख का आकलन करेगा, जिसमें बतौर प्रूफ आयकर रिटर्न डॉक्यूमेंट्स दिया जा सकता है।
घाटे की भरपाई
यदि आप जीरो आईटीआर वाले वर्ष में शेयर बाजार में घाटा होने के बाद भी इक्विटी होल्डिंग्स को उस वित्तीय वर्ष से अगले वित्तीय वर्ष में कैरी फॉर्वार्ड करना चाहते हैं, तो जीरो रिटर्न दाखिल करना आवश्यक है।
वीजा के लिए अप्लाई
विदेश जाने के लिए वीजा अधिकारी पिछले कुछ वर्षों की आईटीआर डिटेल मांग लेते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि वीजा लेने से पहले, जिस देश में कोई यात्रा करना चाहता है, उसे आवेदक के इनकम लेवल की पुष्टि करनी होती है। इसलिए, वीजा के लिए आवेदन करते समय आईटीआर को बैंक डिटेल और दूसरे वित्तीय रिकॉर्ड के साथ जमा किया जाना चाहिए।
रिफंड के लिए क्लेम
फॉर्म 15जी/एच जमा करने पर बैंकिंग इंस्टिट्यूशंस टीडीएस नहीं काटता। हालाँकि, इस टीडीएस राशि को रिफंड के रूप में पाने के लिए, यदि किसी कारण से आपने फॉर्म समय पर जमा नहीं किया, तो जीरो आईटीआर दाखिल करें।
