वैश्विक ऊर्जा बाजार में तेल केवल एक ईंधन नहीं बल्कि कूटनीति का सबसे बड़ा हथियार है। जब भी मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ता है या अमेरिका किसी देश पर प्रतिबंध लगाता है, तो ईरान के तेल की चर्चा सबसे ज्यादा होती है। अक्सर लोग सोचते हैं कि कच्चा तेल (Crude Oil) हर जगह एक जैसा ही होता होगा, लेकिन हकीकत में ईरान और रूस के तेल में जमीन-आसमान का अंतर है। इसकी गुणवत्ता (Quality) ही वह वजह है जिसके कारण अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से लेकर चीन तक, हर कोई ईरान के तेल सप्लाई पर पैनी नजर रखता है। आइए बताते हैं कि ईरान का तेल इतना खास क्यों है और यह रूस के तेल से कैसे अलग है।
ईरान का तेल
'लाइट और स्वीट' का जादू ईरान के तेल की सबसे बड़ी खासियत इसका 'लाइट' (Light) और 'स्वीट' (Sweet) होना है। विज्ञान की भाषा में कहें तो जिस तेल में सल्फर की मात्रा कम होती है, उसे 'स्वीट क्रूड' कहा जाता है। ईरान का कच्चा तेल रिफाइन करना बहुत आसान होता है। इसे कम मेहनत और कम खर्च में पेट्रोल, डीजल और जेट फ्यूल जैसे कीमती उत्पादों में बदला जा सकता है। ईरान का 'ईरानियन लाइट' ग्रेड दुनिया के सबसे बेहतरीन तेल ग्रेड्स में गिना जाता है। यही कारण है कि भारतीय रिफाइनरियां ईरान के तेल को सबसे ज्यादा पसंद करती हैं, क्योंकि इससे मशीनरी पर बोझ कम पड़ता है और आउटपुट ज्यादा मिलता है।
रूस का तेल
'यूराल' की अपनी चुनौती इसके विपरीत, रूस का मुख्य तेल ग्रेड जिसे 'यूराल' (Urals) कहा जाता है, वह ईरान के मुकाबले थोड़ा 'भारी' (Heavy) और 'सोर' (Sour) होता है। 'सोर' का मतलब है कि इसमें सल्फर की मात्रा अधिक होती है। रूस के तेल को साफ करने के लिए रिफाइनरियों को ज्यादा जटिल प्रक्रिया और उन्नत तकनीक की जरूरत होती है। हालांकि, रूस का तेल सस्ता मिलता है, लेकिन इसे प्रोसेस करने की लागत ईरान के तेल के मुकाबले अधिक आती है। रूस का तेल उन रिफाइनरियों के लिए अच्छा है जो कोलतार या भारी ईंधन तेल (Fuel Oil) बनाना चाहती हैं, जबकि ईरान का तेल ट्रांसपोर्टेशन फ्यूल के लिए बेस्ट माना जाता है।
क्यों इतना खास है ईरान का तेल?
डोनाल्ड ट्रंप और चीन का कनेक्शन सवाल उठता है कि अगर ईरान पर इतने प्रतिबंध हैं, तो भी यह इतना खास क्यों है? इसका जवाब है 'चीन'। चीन दुनिया का सबसे बड़ा तेल आयातक है और वह ईरान के तेल का सबसे बड़ा खरीदार भी है। ईरान के तेल की क्वालिटी इतनी शानदार है कि प्रतिबंधों के बावजूद चीन इसे 'डिस्काउंट' पर खरीदकर अपनी अर्थव्यवस्था को रफ्तार दे रहा है। वहीं, डोनाल्ड ट्रंप की 'मैक्सिमम प्रेशर' पॉलिसी का उद्देश्य ईरान की इसी तेल अर्थव्यवस्था को चोट पहुँचाना है। ट्रंप जानते हैं कि अगर ईरान के तेल का फ्लो रुकता है, तो वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं, क्योंकि ईरान के तेल की जगह लेना किसी और देश के लिए इतना आसान नहीं है।
रिफाइनरियों की पहली पसंदरिफाइनिंग की दुनिया में एक कहावत है "जैसा कच्चा माल, वैसा मुनाफा"। ईरान का तेल रिफाइनरियों को ज्यादा मुनाफा (Gross Refining Margin) देता है। भारत जैसे देश की रिफाइनरियां दशकों से ईरान के तेल के हिसाब से डिजाइन की गई थीं। जब ईरान पर प्रतिबंध लगे, तो भारतीय रिफाइनरियों को रूसी तेल के हिसाब से अपनी सेटिंग्स बदलनी पड़ीं। रूस का तेल भले ही युद्ध के कारण सस्ता मिल रहा हो, लेकिन क्वालिटी और एफिशिएंसी के मामले में ईरान का तेल हमेशा से एक कदम आगे रहा है।
