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इस समय नए-नए निवेशक एफएंडओ की तरफ आकर्षित हो रहे हैं। पर एफएंडओ में नॉर्मल ट्रेडिंग के मुकाबले काफी ज्यादा जोखिम है। हालांकि यहां मिनटों में कमाई भी होती है। क्या है एफएंडओ और इससे जुड़े जोखिम, आगे जानिए।
डेरिवेटिव्स को समझना जरूरी
शेयर बाजार में एफएंडओ डेरिवेटिव्स की तरह हैं। डेरिवेटिव शब्द डिराइव से निकला है। इसका अर्थ है किसी से कुछ निकलना। शेयर बाजार में डेरिवेटिव शेयरों से निकलते हैं। अब एक उदाहरण से समझिए कि शेयर बाजार के संदर्भ में डेरिवेटिव का प्रेक्टिकल अर्थ क्या है।
मान लीजिए आप कहीं खाना खाने जाते हैं और वहां टोकन से ऑर्डर लिया जाता है। आपने 100 रु के मोमोज ऑर्डर करे आपको 100 रु का एक प्लास्टिक टोकन मिल गया। प्लास्टिक टोकन की वैल्यू 1-2 रु होगी। मगर वैसे वो 100 रु का टोकन है, जिससे आप 100 रु के मोमोज खरीद सकते हैं। इसी तरह शेयर बाजार में डेरिवेटिव 20-30 रु हो सकते हैं। मगर शेयर की असल वैल्यू अधिक होगी।
क्या है फ्यूचर ट्रेडिंग
फ्यूचर ट्रेडिंग में किसी शेयर के डेरिवेटिव्स के जरिए फ्यूचर के लिए या फ्यूचर की कीमत पर ट्रेडिंग होती है। किसी शेयर का फ्यूचर बहुत सस्ता होता है। जैसे कि 200 रु वाले शेयर का फ्यूचर डेरिवेटिव 10-20 रु का होगा। मगर ये एक लॉट में मिलेंगे। अलग-अलग शेयरों के फ्यूचर डेरिवेटिव का लॉट साइज अलग ही हो सकता है।
इसमें एक एक्सपायरी होती है, जिस पर ट्रेड फाइनल होता है। यदि आपके फ्यूचर डेरिवेटिव की कीमत एक्सपायरी पहले ही बढ़ जाए तो आप उसे पहले ही बेच सकते हैं।
क्या है ऑप्शन
ऑप्शन फ्यूचर के समान ही है। इसमें होता यह है कि फायदा अनलिमिटेड है, जबकि नुकसान केवल उतना होगा, जितना निवेश आप करेंगे। इसमें डील से बाहर निकलने का ऑप्शन होता है। इसीलिए इसे ऑप्शन ट्रेडिंग कहते हैं।
तेजी से फायदा, मगर जोखिम भी बहुत
एफएंडओ यूनिट का रेट बहुत तेजी से बढ़ या घट सकता है। यही इसके मिनटों में फायदा या नुकसान कराने का फंडा है।
डिस्क्लेमर : यहां फ्यूचर एंड ऑप्शन की जानकारी दी गयी है, निवेश की सलाह नहीं। इक्विटी मार्केट में जोखिम होता है, इसलिए निवेश अपने जोखिम पर करें। निवेश करने से पहले एक्सपर्ट की राय जरूर लें।
