ISS Mission: अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर आठ महीने बिताने के बाद अमेरिका और रूस के अंतरिक्ष यात्रियों का एक दल रविवार को कजाकिस्तान के विशाल मैदानी क्षेत्र में सुरक्षित रूप से उतर गया।
सुरक्षित उतरा अंतरिक्ष यान
नासा के अंतरिक्ष यात्री क्रिस विलियम्स और रूसी दल के सदस्यों-सर्गेई कुद-स्वेर्चकोव तथा सर्गेई मिकायेव अपने 'सोयुज एमएस-28' अंतरिक्ष यान से धरती पर लौटे। यह यान पैराशूट की मदद से सुरक्षित रूप से जेजकाजगन के दक्षिण-पूर्व में निर्धारित क्षेत्र में उतरा।
अंतरिक्ष स्टेशन पर 241 दिन का प्रवास विलियम्स और मिकायेव का पहला अंतरिक्ष मिशन था जबकि कुद-स्वेर्चकोव के लिए यह दूसरा अंतरिक्ष मिशन था।
कठिन परिस्थितियों में रहते हैं अंतरिक्ष यात्री
आईएसएस पर अंतरिक्ष यात्रियों का जीवन धरती के मुकाबले बेहद चुनौतीपूर्ण और कठिन होता है। बेहद कम जगह पर अंतरिक्ष यात्री क्रमबद्ध तरीके से सोते हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, अंतरिक्ष यात्रियों को अपना ही पेसाब रिसाइकिल करके पीना पड़ता है और वह रेडिएशन का भी सामना करते हैं। या यूं कहें कि अंतरिक्ष में समय गुजारना बेहद मुश्किल काम है।
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ब्रिटिश अंतरिक्ष यात्री मेगन क्रिश्चियन ने एक बार 'द सन' को अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन की चुनौतियों के बारे में विस्तार से बताया था। धरती से लगभग 421 किलोमीटर की ऊंचाई पर पृथ्वी की कक्षा में घूम रहा आईएसएस पिछले 25 सालों से लगातार अपनी सेवाएं दे रहा है। हालांकि, 2030 में आईएसएस को प्रशांत महासागर में गहरी नींद में सुला दिया जाएगा। आईएसएस में रहने वाले अंतरिक्ष यात्री 90-90 मिनट के अंतराल में सूर्योदय और सूर्यास्त का नजारा देखते हैं। इसका मतलब साफ है कि स्पेस स्टेशन एक दिन यानी 24 घंटे में 16 बार पृथ्वी की परिक्रमा करता है।
