आजकल ऑनलाइन शॉपिंग और डिजिटल पेमेंट का चलन तेजी से बढ़ रहा है। लोग ई-कॉमर्स कंपनियों के वॉलेट में पैसे रखते हैं और इन्हीं पैसों से खरीदारी, रिचार्ज और दूसरी सेवाओं का भुगतान करते हैं। ऐसे में अगर किसी तकनीकी गलती की वजह से कंपनी आपके वॉलेट में जरूरत से ज्यादा पैसे डाल दे, तो आपके मन में यह सवाल आ सकता है कि क्या अब ये पैसे आपके हो गए हैं? इसका सीधा जवाब है- सिर्फ वॉलेट में रकम दिखने से उस पर आपका मालिकाना हक नहीं बन जाता। अगर कंपनी की गलती से गलत रकम आपके खाते या वॉलेट में क्रेडिट हुई है, तो उसे कंपनी की गलती से हुआ गलत क्रेडिट माना जा सकता है।
अगर गलती से पैसे आ जाएं?
ऐसी स्थिति में सबसे जरूरी बात यह है कि ग्राहक को इस अतिरिक्त रकम को अपनी कमाई समझकर खर्च नहीं करना चाहिए। अगर आपको पता है कि आपके वॉलेट में जितने पैसे आने चाहिए थे, उससे ज्यादा रकम आ गई है, तो कंपनी के कस्टमर केयर को इसकी जानकारी देना बेहतर है। कंपनी ट्रांजेक्शन की जांच करके गलत तरीके से क्रेडिट हुई रकम को वापस लेने या उसे सही करने की प्रक्रिया शुरू कर सकती है। RBI के बैंकिंग नियमों में भी गलत खाते में क्रेडिट हुई रकम को ठीक करने और ऐसी गलती को वापस करने के लिए व्यवस्था रखने की बात कही गई है।
किसका होगा हक़?
मान लीजिए आपने किसी ई-कॉमर्स कंपनी से 1,000 रुपये का रिफंड मांगा था, लेकिन तकनीकी गड़बड़ी के कारण आपके वॉलेट में 10,000 रुपये आ गए। ऐसी स्थिति में अतिरिक्त 9,000 रुपये को अपना पैसा मानकर खर्च करना सही नहीं होगा। कंपनी अपने रिकॉर्ड के आधार पर गलत क्रेडिट की पहचान कर सकती है और अतिरिक्त रकम वापस लेने के लिए आपसे संपर्क कर सकती है। इसलिए ऐसी रकम दिखने पर स्क्रीनशॉट और ट्रांजेक्शन की जानकारी सुरक्षित रखना और कंपनी को सूचना देना समझदारी है।
ई-वॉलेट फ्रॉड क्या है?
यह मामला ई-वॉलेट फ्रॉड से अलग है। अगर किसी व्यक्ति के वॉलेट से उसकी अनुमति के बिना पैसे निकल जाते हैं, तो RBI के नियमों के तहत शिकायत करने की समयसीमा के आधार पर ग्राहक की जिम्मेदारी तय हो सकती है। जागरण के पुराने लेख के मुताबिक, तीन दिनों के भीतर शिकायत करने पर योग्य मामलों में पूरी रकम वापस मिलने का प्रावधान बताया गया था। चार से सात दिनों के बीच शिकायत पर ट्रांजेक्शन की रकम या 10,000 रुपये, जो भी कम हो, तक की जिम्मेदारी का प्रावधान था। हालांकि, यह 2019 का लेख है और मौजूदा नियमों को संबंधित संस्था के वर्तमान नियमों के साथ देखना चाहिए।
अगर ग्राहक की अपनी गलती से अनधिकृत ट्रांजेक्शन हुआ है, तो स्थिति अलग हो सकती है। RBI के नियमों में ग्राहक की लापरवाही और समय पर शिकायत करने को महत्वपूर्ण माना गया है। इसलिए ओटीपी, पिन, पासवर्ड या दूसरी गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा नहीं करनी चाहिए। इसी तरह, ई-वॉलेट से जुड़े किसी भी संदिग्ध ट्रांजेक्शन की जानकारी मिलते ही तुरंत संबंधित कंपनी को शिकायत करनी चाहिए।
