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पकड़ा गया तस्करी का सोना कहां जाता है? क्या इसे सरकार गला देती है या बैंक के लॉकर में रखती है

एयरपोर्ट या सीमाओं पर तस्करों से जब्त किया गया अवैध सोना आखिरकार जाता कहां है? जानिए कोर्ट केस से लेकर सरकारी टकसाल (Mint) में उसे गलाने और आरबीआई (RBI) के खजाने तक पहुंचने की पूरा प्रोसेस।

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पकड़ा गया तश्तरी का सोना कहां जाता है?

भारत में सोने के प्रति लोगों का गहरा लगाव किसी से छिपा नहीं है, लेकिन इसी मांग के कारण देश में बड़े पैमाने पर सोने की तस्करी (Gold Smuggling) भी होती है। अक्सर हवाई अड्डों, बंदरगाहों या देश की सीमाओं पर कस्टम विभाग (Customs) और डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (DRI) द्वारा तस्करों से करोड़ों रुपये का अवैध सोना जब्त किए जाने की खबरें सामने आती हैं। ऐसे में किसी भी आम नागरिक के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर पकड़े जाने के बाद इस चमचमाते और कीमती सोने का क्या होता है? क्या सरकार इसे सीधे अपने बैंक लॉकरों में सुरक्षित रख देती है, या इसे गलाकर किसी अन्य रूप में बदल दिया जाता है?

कानूनन, तस्करों से बरामद किया गया सोना अंततः भारत सरकार की राष्ट्रीय संपत्ति बन जाता है, लेकिन जब्ती से लेकर सरकारी खजाने तक पहुंचने की यह यात्रा कई कड़े कानूनी चरणों, कागजी औपचारिकताओं और रिफाइनिंग की एक लंबी प्रक्रिया से होकर गुजरती है, जिसमें देश की सुरक्षा एजेंसियों से लेकर भारत सरकार की टकसाल (Mint) और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) तक शामिल होते हैं।

क्या होता है जब्त किए सोने का?

इस पूरी विधिक प्रक्रिया की शुरुआत जब्ती के समय से होती है; नियम के अनुसार, यदि बरामद किए गए सोने की बाजार कीमत ₹20 लाख से कम होती है, तो कस्टम विभाग उस सोने को पूरी तरह से जब्त कर लेता है और उसे लाने वाले 'कैरियर' (तस्कर के मोहरे) को सख्त चेतावनी व जुर्माना लगाकर छोड़ देता है। वहीं, यदि जब्त किए गए सोने की कीमत ₹20 लाख से अधिक होती है, तो इसे एक बड़ा आर्थिक अपराध मानते हुए तस्कर को तुरंत गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया जाता है। बरामदगी के तुरंत बाद स्थानीय जिलाधिकारी या मजिस्ट्रेट के समक्ष सोने का सटीक वजन कराया जाता है और पंचनामा तैयार कर उनकी मौजूदगी में ही पूरे सोने को सरकारी सील लगाकर सुरक्षित किया जाता है। इसके बाद, इस सीलबंद सोने को कड़े सुरक्षा घेरे में दिल्ली स्थित कस्टम मुख्यालय भेजा जाता है, जहां से कोर्ट केस की कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद इसे मुंबई स्थित भारत सरकार की सरकारी टकसाल (Mint) में ट्रांसफर कर दिया जाता है।

कैसे RBI तक पहुंचता है सोना?

मुंबई टकसाल में पहुंचने के बाद सोने को पूरी तरह से वैध और राष्ट्रीय मानक के अनुकूल बनाने की वास्तविक प्रक्रिया शुरू होती है। चूंकि तस्कर सोने को पेस्ट, बेल्ट, तार, कैप्सूल, बिस्कुट या जेवरात जैसे अलग-अलग रूपों और अशुद्धियों के साथ लाते हैं, इसलिए टकसाल में इन सभी सामग्रियों को भट्टी में डालकर पूरी तरह से पिघलाया (Melt) जाता है। गलाने की इस प्रक्रिया के बाद सोने की शुद्धता की जांच की जाती है और उसे शुद्ध सोने की ईंटों या बिस्कुटों (Gold Bars) के रूप में ढाला जाता है।

इसके बाद, इन सरकारी सोने के बिस्कुटों पर भारत सरकार की आधिकारिक मुहर (Government Seal) लगाई जाती है, जिससे वह अवैध सोना पूरी तरह से 'वैध' (Legal) घोषित हो जाता है। इस अंतिम चरण के बाद, टकसाल द्वारा तैयार किए गए इस शुद्ध सोने को सीधे देश के केंद्रीय बैंक यानी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के सुपुर्द कर दिया जाता है, जहां इसे सुरक्षित सरकारी खजाने और लॉकरों में देश के स्वर्ण आरक्षित भंडार (Gold Reserve) के रूप में जमा कर लिया जाता है, जो देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करता है।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठी author

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिच... और देखें

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