नया बैंक अकाउंट खुलवाना है? पहले जान लीजिए करेंट और सेविंग अकाउंट में अंतर
- Authored by: रिचा त्रिपाठी
- Updated Dec 13, 2025, 05:45 PM IST
अगर आप नया बैंक अकाउंट खुलवाने की सोच रहे हैं, तो सिर्फ बैंक चुनना ही काफी नहीं है। सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि सेविंग अकाउंट और करंट अकाउंट में क्या फर्क है और आपकी जरूरत के हिसाब से कौन-सा अकाउंट सही रहेगा। सही जानकारी के बिना अकाउंट खोलने पर आगे चलकर लेनदेन, ब्याज और चार्ज को लेकर परेशानी हो सकती है।
Bank Account
बैंक में खाता खुलवाना आज के समय में हर व्यक्ति की जरूरत बन चुका है। लेकिन खाता खोलने से पहले सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि करंट अकाउंट खुलवाएं या सेविंग्स अकाउंट। अक्सर लोग बिना सही जानकारी के खाता खुलवा लेते हैं, जिससे आगे चलकर उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। दरअसल, करंट और सेविंग्स अकाउंट दोनों की जरूरत, उपयोग और फायदे अलग-अलग होते हैं। अगर आप इनके बीच का अंतर समझ लें, तो अपने पैसों का बेहतर तरीके से प्रबंधन कर सकते हैं।
सेविंग्स अकाउंट क्या होता है?
सेविंग्स अकाउंट आम लोगों के लिए बनाया गया खाता होता है, जिसका मकसद पैसे को सुरक्षित रखना और उस पर ब्याज कमाना है। इस अकाउंट में आप अपनी सैलरी, पेंशन या दूसरी आमदनी जमा कर सकते हैं। बैंक इस जमा राशि पर आपको ब्याज देता है, जिससे आपकी बचत धीरे-धीरे बढ़ती है। सेविंग्स अकाउंट लोगों में बचत की आदत डालने में मदद करता है और भविष्य की जरूरतों के लिए फंड तैयार करता है।
इस खाते में आपको एटीएम कार्ड, डेबिट कार्ड, ऑनलाइन बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग और यूपीआई जैसी सुविधाएं मिलती हैं। आप जरूरत पड़ने पर पैसे निकाल सकते हैं, लेकिन इसमें हर महीने लेनदेन की एक तय सीमा होती है। सेविंग्स अकाउंट उन लोगों के लिए सही है जो अपनी रोजमर्रा की जरूरतों, इमरजेंसी फंड और भविष्य के लक्ष्यों के लिए पैसे जमा करना चाहते हैं।
करंट अकाउंट क्या होता है?
करंट अकाउंट मुख्य रूप से बिजनेस करने वालों, दुकानदारों, कंपनियों और प्रोफेशनल्स के लिए बनाया जाता है। इस खाते का मकसद बार-बार और बड़े लेनदेन को आसान बनाना होता है। करंट अकाउंट में आप दिन में कई बार बड़ी रकम जमा या निकाल सकते हैं और इस पर आमतौर पर कोई सख्त सीमा नहीं होती।
हालांकि, करंट अकाउंट पर बैंक ब्याज नहीं देता। इसकी जगह इसमें ओवरड्राफ्ट की सुविधा मिलती है, यानी आप जरूरत पड़ने पर अपने खाते में मौजूद राशि से ज्यादा पैसे भी निकाल सकते हैं, एक तय लिमिट तक। यह सुविधा बिजनेस में अचानक आने वाले खर्चों को संभालने में काफी मददगार होती है।
ब्याज के मामले में अंतर
सेविंग्स अकाउंट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें जमा पैसे पर ब्याज मिलता है। इससे आपकी बचत बढ़ती है। वहीं करंट अकाउंट में ब्याज नहीं दिया जाता, क्योंकि यह खाता निवेश या बचत के लिए नहीं, बल्कि लेनदेन के लिए होता है।
लेनदेन की लिमिट में फर्क
सेविंग्स अकाउंट में हर महीने ट्रांजैक्शन की संख्या सीमित होती है, ताकि लोग इसे सिर्फ रोजमर्रा की जरूरतों के लिए इस्तेमाल करें। इसके उलट, करंट अकाउंट में लेनदेन की सीमा बहुत ज्यादा होती है, जिससे बिजनेस से जुड़े बड़े और बार-बार होने वाले ट्रांजैक्शन आसानी से किए जा सकें।
ओवरड्राफ्ट सुविधा का अंतर
करंट अकाउंट में ओवरड्राफ्ट की सुविधा मिलती है, जो सेविंग्स अकाउंट में नहीं होती। यह सुविधा बिजनेस के लिए काफी फायदेमंद होती है, क्योंकि इससे अस्थायी पैसों की कमी को पूरा किया जा सकता है।
मिनिमम बैलेंस
सेविंग्स अकाउंट में न्यूनतम बैलेंस की शर्त आमतौर पर कम होती है, जिससे यह आम लोगों के लिए सुलभ रहता है। करंट अकाउंट में न्यूनतम बैलेंस ज्यादा होता है, क्योंकि यह खाता बड़े लेनदेन को ध्यान में रखकर बनाया जाता है।अगर आप नौकरीपेशा हैं, सैलरी पाते हैं या सिर्फ बचत और ब्याज कमाना चाहते हैं, तो सेविंग्स अकाउंट आपके लिए बेहतर है। वहीं अगर आप बिजनेस करते हैं, रोजाना कई बार पैसों का लेनदेन करते हैं और ज्यादा लचीलापन चाहते हैं, तो करंट अकाउंट सही विकल्प होगा।
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