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Dividend देने को लेकर वेदांता के अनिल अग्रवाल का बड़ा बायान, शेयरधारक हैं तो जरूर जानें

अग्रवाल ने कहा कि वेदांता एक बड़ा बरगद है। हर कारोबार में इतनी क्षमता है कि वह स्वयं में बड़ा समूह बन सकता है। मेरा लक्ष्य है कि प्रत्येक नई कंपनी वेदांता जितनी बड़ी बने। इससे शेयरधारकों को लाभ होगा।

अनिल अग्रवाल

अनिल अग्रवाल (Facebook Page of Anil Agrwal)

वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने कहा कि लाभांश (Dividend) देना उनकी प्राथमिकता में शामिल है और प्रस्तावित विभाजन के बाद भी समूह की कंपनियां नियमित रूप से शेयरधारकों को लाभांश देती रहेंगी। अग्रवाल ने बताया कि समूह अपने विभिन्न कारोबारों में 20 अरब डॉलर के विस्तार कार्यक्रम को जारी रखेगा। धातु से तेल तक के कारोबार वाले वेदांता लिमिटेड का विभाजन प्रत्येक कारोबार को स्वतंत्र पहचान देने, मूल्य उजागर करने और पूंजी निवेश की प्रक्रिया को प्रभावित किए बिना नकद लाभांश जारी रखने के लिए किया जा रहा है।

5 कंपनियों में विभाजन को मिली मंजूरी

राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) ने मंगलवार को वेदांता को पांच अलग सूचीबद्ध कंपनियों में विभाजित करने की योजना को मंजूरी दी। विभाजन के बाद आधार धातु का कारोबार वेदांता लिमिटेड में रहेगा, जबकि वेदांता एल्युमिनियम, तलवंडी साबो पावर, वेदांता इस्पात एवं लौह और माल्को एनर्जी (तेल एवं गैस) अन्य चार सूचीबद्ध कंपनियां होंगी। अग्रवाल ने कहा, "लाभांश देना मेरे विचार का हिस्सा है। चाहे कोई भी परिस्थिति हो, हमारी कंपनियां नियमित लाभांश जारी करती रहेंगी।"

7 और 16 रुपये का डिविडेंड दिया गया

उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक प्रति शेयर सात रुपये का पहला अंतरिम लाभांश और 16 रुपये का दूसरा अंतरिम लाभांश घोषित किया गया है। वित्त वर्ष 2023-24 में कुल 29.50 रुपये प्रति शेयर और 2024-25 में लगभग 46 रुपये प्रति शेयर लाभांश वितरित किया।

अग्रवाल ने बताया कि विभाजन मार्च 2026 तक पूरा होने की योजना है। उन्होंने कहा कि अगले चार से पांच वर्षों में वेदांता विभिन्न क्षेत्रों में कुल 20 अरब डॉलर का निवेश करेगी। इसमें तेल एवं गैस और एल्युमिनियम में चार-चार अरब डॉलर, जस्ता और चांदी में दो अरब डॉलर, विद्युत उत्पादन में ढाई अरब डॉलर और शेष निवेश लौह अयस्क, इस्पात और अन्य क्षेत्रों में किया जाएगा।

चांदी का उत्पादन बढ़ाया जाएगा

उन्होंने बताया कि चांदी का उत्पादन मौजूदा लगभग 700 टन से बढ़ाकर 2030 तक 1,500 टन किया जाएगा। इसके साथ ही सीसा उत्पादन को चार लाख टन से बढ़ाकर 20 लाख टन प्रतिवर्ष करने का लक्ष्य है।

हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड में जस्ता उत्पादन को वर्तमान 11.3 लाख टन से बढ़ाकर 20 लाख टन किया जाएगा। दक्षिण अफ्रीका में समूह की जिंक कंपनी से अतिरिक्त 10 लाख टन उत्पादन की योजना है, जिससे वेदांता विश्व के प्रमुख उत्पादकों में शामिल होगा।

एल्युमिनियम प्रोडक्शन भी बढ़ाने की तैयारी

एल्युमिनियम कारोबार में समूह मौजूदा 30 लाख टन क्षमता को दोगुना करने की योजना बना रहा है। राजस्थान में 5.10 लाख टन क्षमता का डाई-अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) उर्वरक संयंत्र स्थापित किया जा रहा है, जिसे आगे चलकर 10 लाख टन तक बढ़ाया जाएगा।

तेल एवं गैस क्षेत्र में उत्पादन को निकट भविष्य में तीन लाख बैरल प्रतिदिन और अगले चार-पांच वर्षों में पांच लाख बैरल प्रतिदिन तक बढ़ाने का लक्ष्य है।

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आलोक कुमार
आलोक कुमार author

आलोक कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में एसोसिएट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और प्रिंट मीडिया में 17 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभ... और देखें

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