अमेरिकी शेयर बाजार (Wall Street) ने एक बार फिर दुनिया भर के निवेशकों को चौंकाते हुए नया रिकॉर्ड बनाया है। 6 मई 2026 की रात अमेरिकी सूचकांकों डाओ जोंस (Dow Jones), एसएंडपी 500 (S&P 500) और नैस्डैक (Nasdaq) ने अपने अब तक के सबसे उच्चतम स्तर (All-Time High) को छू लिया। बाजार की इस शानदार तेजी ने न केवल अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाया है, बल्कि वैश्विक बाजारों को भी सकारात्मक संकेत दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मुद्रास्फीति (Inflation) के आंकड़ों में स्थिरता और ब्याज दरों में कटौती की संभावना ने निवेशकों के आत्मविश्वास को बढ़ाने का काम किया है।
ट्रंप ने जाहिर की ख़ुशी
डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा दावा शेयर बाजार की इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर खुशी जाहिर की। उन्होंने एक पोस्ट में लिखा कि शेयर बाजार आज अपने सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है। ट्रंप ने इसे अपनी और देश की नीतियों की जीत बताते हुए दावा किया कि न केवल बाजार बढ़ रहा है, बल्कि नौकरियां और लोगों के रिटायरमेंट फंड्स (401-K) भी तेजी से फल-फूल रहे हैं। ट्रंप के अनुसार, अमेरिकी अर्थव्यवस्था एक बड़े 'बूम' की ओर बढ़ रही है, जिससे आम नागरिक की क्रय शक्ति और भविष्य की बचत सुरक्षित हो रही है।
क्यों आई तेजी?
युद्ध विराम की उम्मीद और बाजार की तेजी मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार, इस रैली के पीछे एक बड़ी वजह पश्चिम एशिया (Middle East) से आ रही सकारात्मक खबरें भी हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अब शांति और युद्ध विराम (Truce) की उम्मीदें जगी हैं। इस कूटनीतिक प्रगति ने वैश्विक तेल आपूर्ति की चिंताओं को कम किया है और बाजार में जोखिम लेने की क्षमता (Risk Appetite) बढ़ा दी है। निवेशकों को उम्मीद है कि यदि युद्ध के बादल छंटते हैं, तो कच्चे तेल की कीमतें स्थिर होंगी, जिससे कंपनियों की इनपुट कॉस्ट कम होगी और मुनाफा बढ़ेगा।
रिटायरमेंट फंड्स (401-K) और रोजगार का बढ़ता ग्राफ शेयर बाजार की इस तेजी का सीधा असर अमेरिका के '401-K' रिटायरमेंट प्लान्स पर पड़ता है। जब बाजार रिकॉर्ड स्तर पर होता है, तो करोड़ों मध्यमवर्गीय परिवारों की बचत और निवेश की वैल्यू बढ़ जाती है। ट्रंप ने इसी बात को रेखांकित किया है कि अमेरिकी जनता अब आर्थिक रूप से खुद को अधिक सुरक्षित महसूस कर रही है। साथ ही, रोजगार के मोर्चे पर आए मजबूत आंकड़ों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि मंदी (Recession) की जो आशंकाएं जताई जा रही थीं, वे फिलहाल दूर होती नजर आ रही हैं।
क्रूड ऑयल का फैक्टर भले ही बाजार रिकॉर्ड ऊंचाई पर है, लेकिन कुछ चुनौतियां अब भी बरकरार हैं। एक तरफ शेयर बाजार बढ़ रहा है, तो दूसरी तरफ कच्चे तेल की कीमतों में अचानक आने वाला उछाल चिंता का विषय है। यदि क्रूड ऑयल की कीमतें फिर से बढ़ती हैं, तो यह वैश्विक महंगाई को बढ़ावा दे सकती है, जिससे केंद्रीय बैंकों को ब्याज दरों में फिर से सख्ती करनी पड़ सकती है। फिलहाल के लिए, वॉल स्ट्रीट का मूड पूरी तरह से बुलिश (Bullish) है और निवेशक इस 'होप रैली' का पूरा आनंद ले रहे हैं।
