US Iran war loss: दुनिया का सबसे अहम समुद्री रास्ता होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) तबाही का गेटवे बन चुका है। 28 फरवरी, 2026 को अमेरिका और इस्राइल ने ईरान पर हमला किया। इसके जवाब में ईरान ने होर्मुज को बंद कर दिया। Hormuz crisis का नतीजा यह हुआ कि जंग के असर की चपेट में पूरी दुनिया आ चुकी है। IMF के अनुमान और मेथोडोलॉजी के आधार पर SolAbility के आर्थिक विश्लेषण के मुताबिक अगर यह युद्ध आज रुक भी जाए, तो भी दुनिया को $590 बिलियन यानी करीब ₹49 लाख करोड़ का नुकसान हो चुका है। वहीं, अगर जंग 60 से 90 दिन और खिंची, तो यह नुकसान $3.5 ट्रिलियन यानी ₹292 लाख करोड़ तक जा सकता है।
होर्मुज बंद और हिल गई दुनिया
Strait of Hormuz से दुनिया का करीब 20% कच्चा तेल और 19% LNG गुजरता है। ईरान ने युद्ध शुरू होते ही इस रास्ते को व्यावहारिक रूप से बंद कर दिया। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने इसे "वैश्विक तेल बाजार के इतिहास का सबसे बड़ा सप्लाई झटका" करार दिया है। वहीं, कोलिंबिया यूनिवर्सिटी (Columbia University) के सेंटर ऑन ग्लोबल एनर्जी पॉलिसी (CGEP) के मुताबिक Hormuz से गुजरने वाला 110 बिलियन क्यूबिक मीटर्स प्रतिवर्ष का LNG कारोबार पूरी ठप हो सकता है। यह ग्लोबल LNG व्यापार का 19% होता है। 28 फरवरी से यह बुरी तरह बाधित है। इसका नतीजा यह है कि Brent Crude जो युद्ध से पहले $65/barrel था, वह फिलहाल $109/barrel है। इस तरह करीब 50% का उछाल आ चुका है। ब्रिटिश विदेश मंत्री Yvette Cooper के मुताबिक होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों की संख्या 150 प्रतिदिन से घटकर सिर्फ 10-20 प्रतिदिन रह गई है।

यूएस-ईरान युद्ध में कितना हुआ नुकसान
कौन-कितना डूबा
- ईरान: Chatham House के अनुमान के मुताबिक ईरान की GDP 10% से ज्यादा गिर सकती है। यानी करीब $45–50 बिलियन का सीधा नुकसान है। वहीं, युद्ध शुरू होने के पहले हफ्ते में ही 4,000 से ज्यादा नागरिक इमारतें तबाह हो चुकी थीं और ईरानी सरकार ने 120 से ज्यादा ऐतिहासिक स्थलों को नुकसान की पुष्टि की है।
- खाड़ी देश: Chatham House के मुताबिक Iraq की इकोनॉमी पर सबसे गहरी चोट पड़ी है। उसके बजट का 90% हिस्सा तेल निर्यात से आता है, जो अब ठप है। काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशन (CFR) के अनुसार ईरानी हमले ने कतर की रास लफान LNG प्लांट को निशाना बनाया, जिससे देश की 17% LNG एक्सपोर्ट क्षमता बाधित हुई। वहीं, Chatham House के विश्लेषण के मुताबिक मिस्र के बाजारों से $6 बिलियन की विदेशी पूंजी पहले ही निकल चुकी है।
- अमेरिका: Pentagon की कांग्रेस को को दी गई ऑफिसिशल ब्रीफिंग के मुताबिक पहले 6 दिनों में ही $11.3 बिलियन खर्च हो गए। वहीं, CSIS के अनुसार 12वें दिन तक यह आंकड़ा $16.5 बिलियन हो गया। अप्रैल, 2026 तक कुल US मिलिट्री खर्च $38–45 बिलियन पहुंच चुका है। करीब $1 बिलियन प्रतिदिन की दर से।

किसे कितना नुकसान
ऊर्जा के बाद अब खाने का संकट
यह सिर्फ तेल की कहानी नहीं है। Fortune की रिपोर्ट के मुताबिक होर्मुज स्ट्रेट से दुनिया का 40% नाइट्रोजन फर्टिलाइज गुजरता था, अब वह रास्ता बंद है। नतीजा यूरिया की कीमत 50% तक उछल गई है। इसी तरह Ammonia 20% महंगा हुआ है। जबकि, सल्फ्यूरिक एसिड 30% महंगा हो गया है। इसी तरह Tungsten 50% से ज्यादा महंगा हो गया है। वहीं, Al Jazeera की रिपोर्ट के अनुसार ग्लोबल एवरेज जेट फ्यूल प्राइस $85 से बढ़कर $150–200/barrel हो गया है।
इंसानी नुकसान: हजारों जिंदगियां
आर्थिक नुकसान के आंकड़ों से परे, इस युद्ध ने हजारों जिंदगियां लील ली हैं। यूएस बेस्ड ह्यूमन राइट्स ग्रुप HRANA के मुताबिक ईरान में 3,461 मौतें हुई हैं। इनमें 1,551 नागरिक और 236 बच्चे शामिल हैं। वहीं, Modern Diplomacy की रिपोर्ट के अनुसार लेबनान में 1,189, इराक में 100 से ज्यादा और इजरायल में 19 और अमेरिका के 13 सैनिक मारे जा चुके हैं। जबकि, कुल 26,500 से ज्यादा लोग घायल हैं। इस दौरान भारत के 2.2 लाख से ज्यादा नागरिकों को खाड़ी देशों से वापस बुलाया गया है।
| देश/क्षेत्र | अनुमानित मौतें | विवरण |
|---|---|---|
| ईरान | 3,461 | इसमें 1,551 नागरिक और 236 बच्चे शामिल |
| लेबनान | 1,189 | सीमा संघर्ष और एयरस्ट्राइक का असर |
| इराक | 100+ | मिलिट्री और नागरिक दोनों प्रभावित |
| इजराइल | 19 | मिसाइल और रॉकेट हमलों में मौतें |
| अमेरिका | 13 | सैन्य ऑपरेशन के दौरान हताहत |
| कुल (अनुमानित) | ~4,800+ | अलग-अलग स्रोतों के आधार पर |
और खिंची जंग तो क्या होगा?
Goldman Sachs के अनुमान के मुताबिक ऑयल गैस शॉक से ग्लोबल GDP ग्रोथ 0.4% कम होगी। यानी करीब $440 बिलियन का झटका लगेगा। वहीं, IMF की पूर्व मुख्य अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ ने Fortune की एक रिपोर्ट में बताया है कि अगर तेल की कीमत $85/barrel बनी रही, तो ग्लोबल ग्रोथ 0.3–0.4% गिर सकती है। इसी आधार पर SolAbility के मॉडल के मुताबिक अगर युद्ध 3 महीने तक चला, तो नुकसान $3.5 ट्रिलियन तक पहुंच सकता है। वहीं, कैपिटल इकोनॉमिक्स के मुताबिक लंबे युद्ध में ब्रेंट क्रूड $150/barrel तक जा सकता है, जिससे ग्लोबल मंदी आना तय है।
| पैरामीटर | अभी तक | 60 दिन बाद (अगर तनाव जारी रहा) | 90 दिन बाद (Worst Case Scenario) |
|---|---|---|---|
| सीधा युद्ध खर्च | $30–50 अरब | $80–130 अरब | $150–250 अरब |
| ग्लोबल GDP ग्रोथ पर असर | ~0.3% गिरावट | ~0.5–0.6% गिरावट | ~1.5–2.5% गिरावट |
| GDP नुकसान (वैल्यू में) | $300–350 अरब | $500–700 अरब | $1.5 – $2.5 ट्रिलियन |
| कच्चे तेल की कीमत (Brent) | $100–110 | $120–140 | $150–180+ |
| तेल सप्लाई (होर्मुज) | ~15–20% जोखिम | लगातार बाधा | 20%+ सप्लाई पर गंभीर असर |
| LNG और ऊर्जा सप्लाई | बाधित | व्यापक संकट | लंबा ग्लोबल शॉर्टेज |
| महंगाई असर | ईंधन महंगाई 10–30% | व्यापक महंगाई | स्टैगफ्लेशन / डिमांड क्रैश |
| फूड और फर्टिलाइजर असर | कीमतों में उछाल शुरू | सप्लाई टाइट | ग्लोबल फूड संकट का खतरा |
| कुल आर्थिक नुकसान | ~$590 अरब | $1 – $1.8 ट्रिलियन | $2.5 – $3.5 ट्रिलियन |
| मंदी | मध्यम | हाई | ग्लोबल मंदी लगभग तय |
भारत पर क्या असर?
भारत अपनी जरूरत का 85% क्रूड आयात करता है, जिसका बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से आता है। होर्मुज बंद होने से महंगाई का दबाव बढ़ रहा है। रुपया कमजोर हो रहा है। इसके साथ ही चालू खाते का घाटा (CAD) बढ़ रहा है। इस तरह होर्मुज स्ट्रेट सिर्फ एक जलमार्ग नहीं, यह दुनिया की आर्थिक नब्ज है। IEA, Goldman Sachs, Chatham House और SolAbility जैसी संस्थाओं के आंकड़े एक ही बात कह रहे हैं। ₹49 लाख करोड़ का नुकसान तो न्यूनतम पक्का आंकड़ा है। अगर यह जंग 60 से 90 दिन और खिंची, तो दुनिया जिस आर्थिक तबाही की तरफ बढ़ रही है, उसे रोकना किसी भी देश के लिए अकेले संभव नहीं होगा।
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