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रूस के लिए आपदा में अवसर साबित हुआ ईरान संकट, डबल हुआ ऑयल रेवेन्यू : रिपोर्ट

अमेरिका और ईरान के बीच जारी जंग रूस के लिए आपदा में अवसर साबित हुई है। होर्मुज स्ट्रेट बंद होने की वजह से रूस का क्रूड ऑयल से मिलने वाला रेवेन्यू डबल हो गया है।

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ईरान में लड़ाई का मिला फायदा

Iran-US War रूस के लिए बड़ा अवसर बनकर आया है। इजरायल और अमेरिका के हमलों के बाद ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया। इसकी वजह से ग्लोबल क्रूड ऑयल और गैस की सप्लाई बाधित हो गई। नतीजतन क्रूड की कीमत 115 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चली गई। इसकी वजह से अमेरिका ने रूसी क्रूड से प्रतिबंध हटा दिए। इसका नतीजा यह हुआ कि महीनेभर में रूस का क्रूड से मिलने वाला रेवेन्यू डबल हो गया है।

ईरान संकट से रूस की कमाई में बंपर उछाल

अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमलों के बाद वैश्विक तेल बाजार में उथल-पुथल मच गई। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को प्रभावी रूप से बंद कर दिया, जिससे दुनिया की लगभग 20% तेल और LNG सप्लाई प्रभावित हुई। इसका सीधा असर कीमतों पर पड़ा और ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया। इस हालात ने रूस को अप्रत्याशित फायदा पहुंचाया। दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा तेल निर्यातक होने के कारण रूस की ऊर्जा सप्लाई की मांग तेजी से बढ़ी है।

अप्रैल में दोगुना होगा टैक्स रेवेन्यू

रॉयटर्स के अनुमान के मुताबिक रूस का मिनरल एक्सट्रैक्शन टैक्स अप्रैल में करीब 700 अरब रूबल यानी लगभग 9 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। मार्च में यह आंकड़ा 327 अरब रूबल था। यानी एक महीने में ही राजस्व लगभग दोगुना हो गया। यह बढ़ोतरी सिर्फ महीने-दर-महीने ही नहीं बल्कि सालाना आधार पर भी करीब 10% ज्यादा है।

तेल की कीमतों ने बदला खेल

रूस के उरल्स क्रूड की औसत कीमत मार्च में 77 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जो फरवरी के 44.59 डॉलर से 73% ज्यादा है। यह सरकार के बजट अनुमान 59 डॉलर से भी काफी ऊपर है। कीमतों में यह उछाल सीधे तौर पर रूस की टैक्स वसूली और कुल आय को बढ़ा रहा है।

वैश्विक ऊर्जा संकट में रूस की बढ़ी डिमांड

क्रेमलिन के मुताबिक दुनिया के कई देशों से रूसी ऊर्जा की भारी मांग आ रही है। ईरान संकट के चलते सप्लाई चेन बाधित हुई है, जिससे रूस एक भरोसेमंद सप्लायर के रूप में उभर रहा है। ऊर्जा बाजार में यह बदलाव रूस के लिए रणनीतिक बढ़त भी साबित हो रहा है।

फिर भी जोखिम खत्म नहीं

हालांकि तस्वीर पूरी तरह एकतरफा नहीं है। 2026 की पहली तिमाही में रूस का बजट घाटा 4.58 ट्रिलियन रूबल यानी GDP का 1.9% रहा है। इसके अलावा यूक्रेन के हमलों से रूस के ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंच रहा है, जिससे उत्पादन पर दबाव बन सकता है। रूस की यह अतिरिक्त कमाई इस बात पर निर्भर करेगी कि ईरान संकट कितने समय तक जारी रहता है। अगर तनाव लंबा खिंचता है तो रूस को और बड़ा फायदा मिल सकता है, लेकिन शांति होने पर यह बूस्ट तेजी से खत्म भी हो सकता है।

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Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानिया author

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों... और देखें

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