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UP RERA का बड़ा खुलासा: उत्तर प्रदेश में 1.15 लाख से ज्यादा फ्लैट और दुकानें खाली, क्या सस्ते होंगे घर?

यूपी रेरा ने घर खरीदार और निवेशकों से किसी भी तरह के भ्रामक प्रचार, दबाव या शॉर्ट-टर्म मुनाफे के लालच से बचने की अपील की है।

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फ्लैट खाली

अगर आप नोएडा, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, युमना एक्सप्रेसवे, लखनऊ आदि शहरों में घर या दुकान खरीदने के लिए ढूंढ रहे हैं तो यह आपके लिए अच्छी खबर है। UP RERA के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में 1.15 लाख से ज्यादा फ्लैट और दुकानें खाली हैं। इसलिए प्राधिकरण ने होम बायर्स और निवेशकों को सलाह दी है कि वे रियल एस्टेट क्षेत्र में निवेश जल्दबाजी में न करें। कोई भी निर्णय पूरी जानकारी, जांच-पड़ताल और वित्तीय क्षमता को ध्यान में रखते हुए लें। प्राधिकरण ने कहा है कि किसी भी प्रकार के प्रचार, अफवाह या दबाव में आकर संपत्ति खरीदने का निर्णय नहीं लेना चाहिए।

जानें कहां कितना स्टॉक है खाली?

यूपी रेरा द्वारा के आंकड़ों के मुताबिक, पूरे प्रदेश में प्रॉपर्टी की कोई कमी नहीं है। खरीदार अपने बजट और पसंद के हिसाब से तुलना करके सही फैसला ले सकते हैं:

पश्चिमी जोन (नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद): रियल एस्टेट का सबसे बड़ा हब होने के नाते यहाँ कुल स्टॉक का लगभग 55 प्रतिशत हिस्सा खाली है। इस क्षेत्र में 60,000 से अधिक यूनिट्स खरीदारों का इंतजार कर रही हैं।

मध्य जोन (लखनऊ, कानपुर आदि): इस क्षेत्र में कुल उपलब्ध प्रॉपर्टी का करीब 35 प्रतिशत यानी 40,000 से ज्यादा यूनिट्स बिक्री के लिए तैयार हैं।

पूर्वी जोन (वाराणसी, गोरखपुर, प्रयागराज आदि): पूर्वांचल के इस बेल्ट में भी 15,000 से अधिक यूनिट्स के विकल्प मौजूद हैं।

क्या-क्या है उपलब्ध?

यूपी रेरा के मुताबिक, खाली प्रॉपर्टी में सिर्फ फ्लैट ही नहीं, बल्कि लग्जरी विला, विकसित प्लॉट, दुकानें, बड़े कमर्शियल ऑफिस स्पेस और शोरूम भी शामिल हैं।

बिल्डर्स के गलत दावों से रहें सावधान!

यूपी रेरा ने बाजार में चल रहे भ्रामक प्रचार से ग्राहकों को अगाह किय है। रेरा के अनुसार, अक्सर प्रमोटर, बिल्डर्स या रियल्टी एजेंट्स ग्राहकों को फंसाने के लिए यह अफवाह उड़ाते हैं कि 'प्रॉपर्टी के दाम रातों-रात बढ़ने वाले हैं' या 'सोसायटी के सारे फ्लैट्स बिक चुके हैं, आखिरी कुछ ही बचे हैं।' रेरा ने साफ किया है कि मौजूदा आंकड़े बाजार में किसी भी तरह की किल्लत की पुष्टि नहीं करते हैं। इसलिए खरीदारों पर तत्काल बुकिंग या टोकन मनी देने का दबाव सिर्फ एक मार्केटिंग पैंतरा हो सकता है। बंपर सप्लाई को देखते हुए बाजार में खरीदारों के पास मोल-तोल करने और सर्वश्रेष्ठ विकल्प चुनने का पूरा मौका है।

निवेश से पहले RERA पोर्टल जरूर चेक करें

रियल एस्टेट में निवेश एक बड़ा और दीर्घकालिक (Long-term) वित्तीय फैसला होता है। धोखेबाजी से बचने के लिए यूपी रेरा ने खरीदारों को चेकलिस्ट सौंपते हुए आधिकारिक पोर्टल पर निम्नलिखित बातें जांचने की अपील की है:

  • प्रोजेक्ट का रेरा रजिस्ट्रेशन नंबर: सबसे पहले चेक करें कि प्रोजेक्ट रेरा से मान्यता प्राप्त है या नहीं।
  • प्रमोटर का पुराना रिकॉर्ड: बिल्डर ने पहले के प्रोजेक्ट्स समय पर पूरे किए हैं या नहीं।
  • स्वीकृत नक्शा (Approved Maps): क्या प्रोजेक्ट उसी नक्शे पर बन रहा है जिसे अथॉरिटी ने पास किया है?
  • कब्जा मिलने की समय-सीमा (Possession Timeline): रेरा के कागजों में बिल्डर ने पजेशन की आधिकारिक तारीख क्या दर्ज कराई है।
  • बाजार में विकल्पों की भरमार है, इसलिए पूरी सूझ-बूझ, वित्तीय क्षमता और जांच-पड़ताल के बाद ही अपनी गाढ़ी कमाई का निवेश करें।

क्या घर होंगे सस्ते?

रियल एस्टेट जानकारों का कहना है कि जहां तक घर सस्ते होने का सवाल है तो यह होना शुरू हो गया है। पिछले एक साल से प्रॉपर्टी की कीमत में बढ़ोतरी रुक गई है। कोरोना के बाद बिल्डर ने अनाप—शनाप कीमत बढ़ा दी थी। अब मार्केट में सुस्ती आई तो कीमत कम हो सकती है। अगर सरकार बेनामी प्रॉपर्टी पर कदम उठा दें तो कीमत धड़ाम हो सकती है।

Alok Kumar
आलोक कुमार author

आलोक कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में एसोसिएट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और प्रिंट मीडिया में 17 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव रखने वाले आलोक ने अपने पत्रकारिता करियर में कई प्रमुख कॉर्पोरेट इवेंट्स और चर्चित स्टोरीज कवर की हैं। वह बिजनेस, बैंकिंग, शेयर मार्केट और पर्सनल फाइनेंस पर गहरी समझ रखते हैं और जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और पाठक-केंद्रित तरीके से प्रस्तुत करने में माहिर हैं। अब तक आलोक ने लगभग 18,000 स्टोरीज लिखी हैं। उनकी लेखन शैली भरोसेमंद, विश्लेषणात्मक और व्यावहारिक जानकारी देने वाली होती है।

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