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UP RERA की सलाह: कारपेट एरिया पर ही फ्लैट खरीदें, बिल्डर्स के झांसे से ऐसे बचें

यूपी रेरा ने घर खरीददारों को सलाह दी है कि किसी भी संपत्ति के लेन-देन को अंतिम रूप देने से पहले वे यूपी रेरा पोर्टल से जांच जरूर करें।

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कारपेट एरिया

UP RERA घर खरीदारों के हित में एक के बाद एक बेहतरीन फैसले ले रहा है। हाल ही में यूपी रेरा ने फ्लैट के ट्रांसफर करने पर बिल्डर की मनमानी वसूली पर लगाम लगाते हुए 1000 रुपये और 25000 रुपये फीस लेने का फैसला सुनाया था। फिर खुलासा किया कि उत्तर प्रदेश में वर्तमान में करीब 1.15 लाख फ्लैट और दुकानें खाली पड़ी हैं। इसमें से लगभग 55 प्रतिशत हिस्सा (60,000 से अधिक यूनिट्स) अकेले नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद क्षेत्र में है।

आज यूपी रेरा ने घर खरीदारों से अपील की है कि फ्लैट खरीदते समय केवल और केवल कारपेट एरिया को ही भुगतान का आधार बनाएं और बिल्डर्स के 'सुपर बिल्ट-अप एरिया' वाले पुराने झांसे में बिल्कुल न आएं। नियमों के मुताबिक, हर बिल्डर के लिए यूपी रेरा के आधिकारिक पोर्टल पर फ्लैट का वास्तविक कारपेट एरिया घोषित करना अनिवार्य है।

यूपी रेरा ने क्या कहा है?

रियल एस्टेट क्षेत्र में खरीद-बिक्री की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने और घर खरीददारों के हितों की रक्षा के लिए यूपी रेरा ने घर खरीददारों को सलाह दी है कि वे आवासीय इकाइयों (फ्लैटों) की खरीद कारपेट एरिया के आधार पर ही करें, क्योंकि कारपेट एरिया फ्लैट के अंदर उपलब्ध वास्तविक रहने योग्य स्थान को दर्शाता है।

रेरा में फ्लैट बिक्री का आधार केवल कारपेट एरिया

रियल एस्टेट (रेरा) अधिनियम, 2016 की धारा 4(2)(h) के तहत प्रमोटर के लिए पोर्टल पर फ्लैट के वास्तविक कारपेट एरिया, बालकनी, बरामदे और खुली छत (टेरेस) के क्षेत्रफल की सटीक जानकारी देना कानूनी रूप से अनिवार्य है। इस प्रक्रिया में 'सुपर बिल्ट-अप एरिया' का विवरण देना आवश्यक नहीं है। नियमों के अनुसार, अपार्टमेंट के आकार की घोषणा और उसकी बिक्री केवल कारपेट एरिया के आधार पर ही की जाएगी, भले ही पहले उसकी बुकिंग या प्रचार सुपर एरिया के नाम पर हुआ हो। यहां तक कि 'एग्रीमेंट फॉर सेल' के आधिकारिक प्रारूप में भी केवल कारपेट एरिया को ही बिक्री का मुख्य मानक आधार माना गया है।

सुपर बिल्ट-अप एरिया से करते हैं बिल्डर खेल

रेरा कानून के अनुसार, फ्लैट की बिक्री कारपेट एरिया पर करनी है लेकिन बिल्डर खरीदारों को झांसा देने के लिए सुपर बिल्ट-अप एरिया का इस्तेमाल करते हैं। सुपर बिल्ट-अप एरिया में कॉरिडोर, सीढ़ियां, लिफ्ट क्षेत्र, लॉबी, क्लब हाउस और अन्य साझा सुविधाओं जैसे कॉमन एरिया का आनुपातिक हिस्सा भी शामिल होता है। इन साझा क्षेत्रों को लोडिंग व्यवस्था के माध्यम से कारपेट एरिया में जोड़ दिया जाता है, जिससे कुल क्षेत्रफल फ्लैट के वास्तविक उपयोग योग्य क्षेत्र की तुलना में काफी अधिक दिखाई देता है।

इस कारण कई घर खरीदार विज्ञापन में दिखाए गए क्षेत्रफल (सुपर एरिया) और फ्लैट के भीतर मिलने वाली वास्तविक रहने योग्य जगह के अंतर को पूरी तरह समझ नहीं पाते हैं। इसके ठीक विपरीत, कारपेट एरिया उस जगह का बिल्कुल स्पष्ट और सटीक माप देता है, जिसका इस्तेमाल खरीदार असल में रहने या सामान रखने के लिए कर सकता है।

Alok Kumar
आलोक कुमार author

आलोक कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में एसोसिएट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और प्रिंट मीडिया में 17 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव रखने वाले आलोक ने अपने पत्रकारिता करियर में कई प्रमुख कॉर्पोरेट इवेंट्स और चर्चित स्टोरीज कवर की हैं। वह बिजनेस, बैंकिंग, शेयर मार्केट और पर्सनल फाइनेंस पर गहरी समझ रखते हैं और जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और पाठक-केंद्रित तरीके से प्रस्तुत करने में माहिर हैं। अब तक आलोक ने लगभग 18,000 स्टोरीज लिखी हैं। उनकी लेखन शैली भरोसेमंद, विश्लेषणात्मक और व्यावहारिक जानकारी देने वाली होती है।

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