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अंडर-कंस्ट्रक्शन vs रेडी-टू-मूव: होम लोन पर कौन सा घर खरीदना ज्यादा फायदेमंद, किस विकल्प में बचेंगे लाखों रुपये?

Under Construction vs Ready to Move Homes: क्या आप घर खरीदने जा रहे हैं तो आपके सामने अंडर-कंस्ट्रक्शन और रेडी-टू-मूव के विकल्प होते हैं। आइए जानते हैं लोन लेकर घर खरीदने का कौन सा विकल्प बेहतर साबित होगा।

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अंडर-कंस्ट्रक्शन बनाम रेडी-टू-मूव घर: होम लोन में कौन बचाता है ज्यादा पैसा? (तस्वीर-istock)

Photo : iStock

Under Construction vs Ready to Move Homes : घर खरीदना ज्यादातर परिवारों के लिए जीवन का सबसे बड़ा आर्थिक फैसला होता है। लोग आमतौर पर लोकेशन, बिल्डर, सुविधाएं और कीमत देखकर घर चुनते हैं, लेकिन एक बहुत अहम बात अक्सर नजरअंदाज हो जाती है। क्या प्रॉपर्टी तैयार (Ready-to-Move) है या अभी बन रही है (Under-Construction), इसका होम लोन (Home Loan) की कुल लागत पर क्या असर पड़ता है। ऊपर से देखने पर लगता है कि 50 लाख रुपये का होम लोन, 8% ब्याज दर और 20 साल की अवधि में हर स्थिति में समान रहेगा। EMI भी करीब एक जैसी होगी। लेकिन असलियत में दोनों मामलों में कुल ब्याज (Total Interest) में बड़ा फर्क आ सकता है। कुछ कैलकुलेशन के अनुसार, अंडर-कंस्ट्रक्शन घर लेने वाले खरीदार को तैयार घर लेने वाले की तुलना में करीब 8 लाख रुपये तक ज्यादा ब्याज देना पड़ सकता है। फर्क क्यों आता है? असली कारण क्या है? इस अंतर की मुख्य वजह है बैंक द्वारा लोन देने का तरीका।

रेडी-टू-मूव प्रॉपर्टी में क्या होता है?

जब आप तैयार घर खरीदते हैं, तो बैंक पूरा लोन एक साथ जारी कर देता है। इसके बाद आपकी EMI तुरंत शुरू हो जाती है। हर EMI में दो हिस्से होते हैं। मूलधन और ब्याज। इससे हर महीने आपका लोन धीरे-धीरे कम होता जाता है।

अंडर-कंस्ट्रक्शन प्रॉपर्टी में क्या होता है?

जब घर बन रहा होता है, तो बैंक पूरा पैसा एक साथ नहीं देता। वह निर्माण की प्रगति के अनुसार किस्तों में लोन जारी करता है। इस दौरान खरीदार को पूरा EMI नहीं देना होता, बल्कि केवल जितना पैसा बैंक ने दिया है, उसका ब्याज देना होता है। इसे ही Pre-EMI Interest कहा जाता है। इस स्थिति में सबसे बड़ी समस्या यह होती है कि मूलधन कम नहीं होता, लोन का पूरा बोझ वही रहता है, सिर्फ ब्याज दिया जाता है यानी आप हर महीने पैसे दे रहे हैं, लेकिन आपका कर्ज कम नहीं होता है।

Pre-EMI कैसे बढ़ाता है खर्च

मान लीजिए किसी व्यक्ति ने 50 लाख रुपये का होम लोन लिया। बैंक ने इसे 4 साल में धीरे-धीरे रिलीज किया। पहले साल 10 लाख रुपये, दूसरे साल 20 लाख रुपये, तीसरे साल 30 लाख रुपये, चौथे साल 40-50 लाख रुपये। इस दौरान केवल ब्याज देना होता है। एक अनुमान के अनुसार-

  • पहले साल: 10 लाख रुपये पर करीब 80,000 रुपये ब्याज
  • दूसरे साल: 20 लाख रुपये पर करीब 1.6 लाख रुपये ब्याज
  • तीसरे साल: 30 लाख पर करीब 2.4 लाख रुपये ब्याज
  • चौथे साल: 40 लाख रुपये पर करीब 3.2 लाख रुपये ब्याज
चार साल में कुल Pre-EMI ब्याज करीब 8 लाख रुपये तक पहुंच सकता है। यह पैसा सीधे बैंक को जाता है, लेकिन इससे आपका लोन कम नहीं होता।
under construction vs ready to move

अंडर-कंस्ट्रक्शन बनाम रेडी-टू-मूव घर

कुल 20 साल का फर्क कितना बड़ा है

अगर दोनों मामलों में तुलना की जाए यानी रेडी-टू-मूव और अंडर-कंस्ट्रक्शन तो अंतर और साफ दिखता है।

समान शर्तें: लोन राशि- 50 लाख रुपये, ब्याज दर: 8%, अवधि: 20 साल। दोनों मामलों में घर बनने के बाद EMI करीब 41,800 रुपये प्रति माह के आसपास होगी। लेकिन फर्क कुल ब्याज में है।

कुल भुगतान की तुलना

रेडी-टू-मूव घर:- कुल ब्याज करीब 50.37 लाख रुपये होता है जबकि कुल भुगतान करीब 1 करोड़ रुपये होता है।

अंडर-कंस्ट्रक्शन घर:- Pre-EMI ब्याज करीब 8 लाख रुपये, EMI अवधि का ब्याज करीब 50.37 लाखर रुपये, कुल ब्याज करीब58.37 लाख रुपये, कुल भुगतान करीब 1.08 करोड़ रुपये हो जाता है। यानी अंडर-कंस्ट्रक्शन घर में करीब 8 लाख रुपये ज्यादा खर्च हो जाता है।

फिर लोग अंडर-कंस्ट्रक्शन घर क्यों खरीदते हैं?

अब सवाल यह उठता है कि जब यह ज्यादा महंगा पड़ सकता है, तो लोग इसे क्यों चुनते हैं? इसका सबसे बड़ा कारण है। कम शुरुआती कीमत (Lower Entry Price)।

1. सस्ती शुरुआती कीमत

अंडर-कंस्ट्रक्शन प्रॉपर्टी आमतौर पर तैयार घर से सस्ती होती है। लोग कम कीमत में घर बुक कर लेते हैं।

2. कीमत लॉक हो जाती है

आप जिस कीमत पर घर बुक करते हैं, वही कीमत फाइनल रहती है, भले ही प्रोजेक्ट 3-4 साल बाद पूरा हो।

क्या कहती है एक्सपर्ट की राय

एक्सपर्ट्स के अनुसार खरीदार अक्सर सिर्फ EMI, ब्याज दर और लोन अवधि देखकर फैसला लेते हैं। लेकिन यह पूरी तस्वीर नहीं होती। अंडर-कंस्ट्रक्शन में बैंक धीरे-धीरे पैसा देता है। हर किस्त के साथ ब्याज शुरू हो जाता है। लेकिन मूलधन कम नहीं होता है। इस वजह से Pre-EMI एक छिपा हुआ खर्च बन जाता है। वहीं तैयार घर में EMI तुरंत शुरू हो जाती है और हर भुगतान से लोन घटता रहता है। लेकिन एक और बड़ा पहलू भी है। हालांकि अंडर-कंस्ट्रक्शन में ब्याज ज्यादा लगता है, लेकिन इसमें एक बड़ा फायदा भी हो सकता है। प्रॉपर्टी की कीमत बढ़ना।

मान लीजिए आपने आज 50 लाख रुपये में फ्लैट लिया। 4 साल बाद वही फ्लैट 65–70 लाख रुपये का हो जाए तो जो व्यक्ति बाद में खरीदेगा, उसे ज्यादा लोन लेना पड़ेगा और ज्यादा EMI देनी होगी। इस स्थिति में शुरुआती खरीदार को फायदा हो सकता है, क्योंकि उसने पहले ही कम कीमत पर घर लॉक कर लिया था।

दोनों विकल्पों के फायदे और नुकसान

रेडी-टू-मूव घर के फायदे: तुरंत कब्जा (Immediate Possession), कोई निर्माण जोखिम नहीं, Pre-EMI का झंझट नहीं, कुल ब्याज कम होता है।

रेडी-टू-मूव घर के नुकसान: कीमत ज्यादा होती है, शुरुआती निवेश बड़ा होता है।

अंडर-कंस्ट्रक्शन घर के फायदे: शुरुआती कीमत कम, भविष्य में प्राइस बढ़ने का फायदा, किस्तों में भुगतान का विकल्प होता है।

अंडर-कंस्ट्रक्शन घर के नुकसान: Pre-EMI का अतिरिक्त खर्च, कब्जे में देरी, निर्माण से जुड़े जोखिम होते हैं।

कौन सा विकल्प बेहतर है?

इसका कोई एक सीधा जवाब नहीं है। यह पूरी तरह खरीदार की जरुरत और स्थिति पर निर्भर करता है। अगर आप तुरंत घर चाहते हैं साथ ही कम जोखिम कम कम कुल ब्याज चाहते हैं तो तो रेडी-टू-मूव बेहतर है। अगर आप कुछ साल इंतजार कर सकते हैं, प्रॉपर्टी के दाम बढ़ने की उम्मीद है, शुरुआती कीमत कम चाहते हैं तो अंडर-कंस्ट्रक्शन सही हो सकता है।

घर खरीदने का फैसला सिर्फ होम लोन या EMI तक सीमित नहीं होना चाहिए। असली सवाल यह है कि आप अभी कितना खर्च कर रहे हैं और भविष्य में आपको कितना फायदा या नुकसान हो सकता है। अंडर-कंस्ट्रक्शन घर में जहां Pre-EMI के कारण करीब 8 लाख रुपये अतिरिक्त खर्च जुड़ सकता है, वहीं कीमत बढ़ने पर बड़ा फायदा भी मिल सकता है। इसलिए सही चुनाव आपकी जरूरत, समय और जोखिम उठाने की क्षमता पर निर्भर करता है।

(डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है, निवेश की सलाह नहीं है, अगर आपको निवेश करना है तो एक्सपर्ट्स से संपर्क करें।)

Ramanuj Singh
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

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