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शेयर बाजार में लावारिस पड़े हैं 89000 करोड़ रुपए, कोई भी नहीं है दावेदार! कहीं ये आपके तो नहीं, ऐसे चेक करें अपना नाम

भारतीय शेयर बाजार में 1,671 लिस्टेड कंपनियों के 89,000 करोड़ रुपये की रकम फंसी हुई है। यह पैसा न केवल बेकार पड़ा है, बल्कि महंगाई के बढ़ते दौर में इसकी वैल्यू भी धीरे-धीरे कम होती जा रही है।

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Unclaimed Money In Share Market

भारत में निवेश और बचत के प्रति जागरूकता तो बढ़ी है, लेकिन एक चौंकाने वाला सच यह भी है कि देश के लाखों लोगों की अरबों रुपये की संपत्ति लावारिस पड़ी हुई है। '1 Finance Magazine' की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, दिसंबर 2025 तक केवल शेयर बाजार की ही बात करें, तो करीब 1,671 लिस्टेड कंपनियों के 89,000 करोड़ रुपये की रकम फंसी हुई है। इतनी बड़ी धनराशि इस समय 'इन्वेस्टर एजुकेशन एंड प्रोटेक्शन फंड अथॉरिटी' (IEPFA) के पास जमा है। अगर हम बैंक डिपॉजिट, इंश्योरेंस और ईपीएफ (EPF) जैसे सभी सेक्टर को मिला दें, तो यह आंकड़ा 2.2 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच जाता है। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि यह पैसा न केवल बेकार पड़ा है, बल्कि महंगाई के बढ़ते दौर में इसकी वैल्यू भी धीरे-धीरे कम होती जा रही है।

166 करोड़ शेयर का कोई नहीं है दावेदार

रिपोर्ट के आंकड़ों पर गौर करें, तो करीब 166 करोड़ ऐसे शेयर हैं जिनका कोई दावेदार सामने नहीं आया है। इसमें देश की सबसे बड़ी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड का भी बड़ा हिस्सा है। लावारिस शेयरों में अकेले रिलायंस की हिस्सेदारी 15% से ज्यादा है। समय के साथ इन शेयरों की कीमत कई गुना बढ़ चुकी है, लेकिन निवेशकों द्वारा जानकारी अपडेट न करने या नॉमिनी की कमी के कारण यह संपत्ति मालिकों तक नहीं पहुंच पा रही है।

केवल शेयर बाजार ही नहीं, बैंकों में भी 97,545 करोड़ रुपये अनक्लेम्ड पड़े हैं, जो रिजर्व बैंक (RBI) के पास जमा हैं और जिस पर नाममात्र का ब्याज मिल रहा है। इसके अलावा, बीमा सेक्टर में ₹20,062 करोड़ और ईपीएफ में ₹10,915 करोड़ की ऐसी राशि है जिसे किसी ने क्लेम नहीं किया है। म्यूचुअल फंड में भी लगभग ₹3,452 करोड़ का डिविडेंड और रिडेम्प्शन अमाउंट लावारिस पड़ा हुआ है।

आप कैसे चेक करें अपना नाम?

विशेषज्ञों का कहना है कि इसके पीछे तीन मुख्य कारण हैं। पहला, निवेश करते समय नॉमिनी (Nominee) का नाम न जोड़ना या उसे समय पर अपडेट न करना। दूसरा, निवेश की जानकारी परिवार के अन्य सदस्यों को न देना, जिससे निवेशक की मृत्यु के बाद परिवार को पता ही नहीं चल पाता कि कहां पैसा लगा है। और तीसरा, क्लेम करने की जटिल प्रक्रिया की जानकारी न होना। अगर आपको भी लगता है कि आपके माता-पिता या पूर्वजों का पैसा कहीं फंसा हो सकता है, तो आप इसे आसानी से चेक कर सकते हैं। शेयरों के लिए आप IEPFA की वेबसाइट (iepf.gov.in) पर जा सकते हैं, जबकि लावारिस बैंक डिपॉजिट खोजने के लिए RBI के UDGAM पोर्टल का उपयोग कर सकते हैं। अपनी मेहनत की कमाई को लावारिस छोड़ने के बजाय, उसे सही समय पर क्लेम करना ही समझदारी है।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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