अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए व्यापक 'टैरिफ' (आयात शुल्क) को अवैध करार दे दिया है। 6-3 के बहुमत से आए इस फैसले ने पिछले एक साल से चल रहे वैश्विक 'ट्रेड वॉर' की दिशा बदल दी है। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि राष्ट्रपति 'राष्ट्रीय आपातकाल' के कानूनों का सहारा लेकर पूरी दुनिया पर मनमाना टैक्स नहीं थोप सकते। कोर्ट के मुताबिक, संविधान के तहत टैक्स और टैरिफ तय करने की असली शक्ति संसद (Congress) के पास है, न कि अकेले राष्ट्रपति के पास। इस फैसले ने न केवल वैश्विक बाजारों को राहत दी है, बल्कि ट्रंप के 'अमेरिका फर्स्ट' एजेंडे को एक बड़ी कानूनी चुनौती भी दी है।
The 'Liberation Day' Origin
इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत 2 अप्रैल 2025 को हुई थी, जिसे ट्रंप ने 'लिबरेशन डे' (Liberation Day) का नाम दिया था। इस दिन ट्रंप प्रशासन ने भारत सहित कई देशों से आने वाले सामानों पर 26% तक का अतिरिक्त टैरिफ लगा दिया था। उनका मकसद अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना था, लेकिन इसका नतीजा वैश्विक बाजारों में भारी गिरावट और अंतरराष्ट्रीय तनाव के रूप में निकला। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि महज एक हफ्ते बाद, 9 अप्रैल को बाजार के दबाव में आकर इन शुल्कों को 90 दिनों के लिए टालना पड़ा था।
विवादों और समझौतों की 10 महीने की टाइमलाइन
पिछले 10 महीनों का सफर बेहद उथल-पुथल भरा रहा। अप्रैल 2025 के आखिर में भारत और अमेरिका के बीच वॉशिंगटन में व्यापार वार्ता शुरू हुई। मई में ट्रंप ने यहां तक चेतावनी दे दी थी कि अमेरिका में बिकने वाले विदेशी iPhones पर 25% टैरिफ लगेगा। मामला अदालतों में पहुंचा और जुलाई 2025 तक स्टील, कार और करीब 69 व्यापारिक साझेदारों (वियतनाम, कनाडा आदि) पर नए टैक्स थोप दिए गए। इस दौरान चीन के साथ संबंध सबसे खराब स्तर पर पहुँच गए, जहाँ टैरिफ 145% तक बढ़ गया था।
भारत की भूमिका और फरवरी 2026 का मोड़
भारत ने इस ट्रेड वॉर के बीच बहुत ही सधी हुई कूटनीति का परिचय दिया। लंबी बातचीत के बाद, फरवरी 2026 की शुरुआत में भारत और अमेरिका के बीच एक द्विपक्षीय समझौता हुआ। इसके तहत भारतीय उत्पादों पर टैरिफ को 26% से घटाकर 18% कर दिया गया और कई अतिरिक्त पेनल्टी भी हटा दी गईं। भारत की इस कोशिश ने घरेलू निर्यातकों को एक बड़ी राहत दी और अमेरिकी बाजार तक उनकी पहुंच को फिर से सुलभ बनाया।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश
20 फरवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने इस पूरे विवाद को एक नया मोड़ दे दिया है। हालांकि कोर्ट ने 'सेक्टर-विशेष' (जैसे केवल चीन या केवल स्टील) टैरिफ को पूरी तरह खत्म नहीं किया है, लेकिन 'व्यापक और अंधाधुंध' टैरिफ पर रोक लगा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला अमेरिकी व्यापार नीति की मनमानी पर लगाम लगाएगा। हालांकि, ट्रेड टेंशन पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, लेकिन अब ट्रंप प्रशासन को कोई भी बड़ा कदम उठाने से पहले संसद की मंजूरी लेनी होगी। दुनिया भर के निवेशकों के लिए यह फैसला एक बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है।
