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YEN कैरी ट्रेड का जाल और सस्ते कर्ज का खेल, जानें कैसे महंगाई से अपना कर्ज चुका रहा जापान

दुनियाभर के इक्विटी बाजार से लेकर हर बिजनेस तक येन कैरी ट्रेड का जाल फैला है। जब भी जापान की इंस्ट्रेस्ट रेट में उतार-चढ़ाव होता है, पूरी दुनिया में तहलका मच जाता है। लेकिन, जापान अपना काम निकाल रहा है।

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सस्ते कर्ज और महंगाई का इस्तेमाल कर रहा जापान

Japan का सरकारी कर्ज दुनिया में सबसे ज्यादा है। फिर भी एक हैरान करने वाली तस्वीर सामने आ रही है। महामारी के दौरान करीब 229% तक पहुंचा Japan का सरकारी कर्ज-से-जीडीपी अनुपात अब 204% के आसपास आने का अनुमान है। यानी ऐसा लग रहा है कि जापान अपने कर्ज का बोझ कम कर रहा है, जबकि उसने अचानक कोई बड़ा कर्ज चुकता नहीं किया। असली खेल यहां कर्ज घटाने से ज्यादा अर्थव्यवस्था के आकार, महंगाई और ब्याज दरों का है। IMF के मुताबिक मजबूत नॉमिनल GDP ग्रोथ और बेहतर टैक्स कलेक्शन ने हाल के वर्षों में जापान के डेट रेश्यो को नीचे खींचने में मदद की है।

यही वह जगह है जहां जापान लंबी मॉनेटरी पॉलिसी कहानी दिलचस्प हो जाती है। इसका असर सिर्फ टोक्यो तक सीमित नहीं रहता। सस्ता Yen दुनियाभर के निवेशकों के लिए सस्ती फंडिंग का काम करता रहा है। जब जापान में ब्याज दरें बेहद कम थीं, तब निवेशक Yen में उधार लेकर ज्यादा रिटर्न वाले दूसरे देशों के एसेट्स में पैसा लगाते थे। इस स्ट्रैटेजी को Yen Carry Trade कहा जाता है। यानी जापान की सस्ती मुद्रा का इस्तेमाल दुनिया के महंगे एसेट खरीदने के लिए किया जाता है।

Japan ने कर्ज घटाया कैसे?

Debt-to-GDP Ratio को समझने का सबसे आसान तरीका यह है कि सरकार पर मौजूद कुल कर्ज की तुलना देश की पूरी इकोनॉमी से की जाए। अगर, इकोनॉमी यानी GDP तेजी से बढ़ती है, तो कर्ज का अनुपात नीचे आ सकता है, भले ही नॉमिनल डेट बहुत तेजी से कम न हुआ हो। जापान में हाल के वर्षों में यही कहानी दिखाई दी। IMF ने कहा है कि मजबूत नॉमिनल GDP ग्रोथ ने पब्लिक डेट रेश्यो को नीचे लाने में मदद की और महंगाई (Inflation) के माहौल में टैक्स कलेक्शन भी मजबूत हुए। यानी प्राइस और वेजेज बढ़ने से इकोनॉमी के नॉमिनल नंबर बढे हैं, जिससे सरकार की टैक्स रेवेन्यू क्षमता को सहारा मिला है।

तस्वीर का दूसरा पहलू

लंबे समय तक बैंक ऑफ जापान (BoJ) ने बेहद नरम मॉनेटरी पॉलिसी रखी। मार्च 2023 में भी BOJ की शॉर्ट टर्म पॉलिसी रेट -0.1% थी और वह 10-Year Japanese Government Bond Yield को लगभग 0% के आसपास रखने के लिए बड़े पैमाने पर JGBs खरीद रहा था। यानी एक तरफ प्राइसेज बढ़ रहे थे, दूसरी तरफ उधारी की लागत (Borrowing Costs) ऐतिहासिक रूप से कम थी। यही वह संयोजन था, जिसे अर्थशास्त्री अक्सर फाइनेंशियल रिप्रेशन की चर्चा में रखते हैं। इसका मतलब यह नहीं कि जापान ने जानबूझकर सिर्फ कर्ज घटाने के लिए महंगाई पैदा की, बल्कि कम ब्याज दर और तेज नॉमिनल ग्रोथ से पुराने कर्ज का बोझ हल्का हल्का करने में मदद ली।

असली भुगतानकर्ता कौन?

यहां कहानी का सबसे असहज हिस्सा सामने आता है। जब कीमतें बढ़ती हैं, लेकिन बचत पर मिलने वाला रिटर्न कम रह जाता है, तो बचत करने वाले की क्रय शक्ति (Purchasing Power) घटती है। सरकार के लिए इसका उलटा असर होता है। क्योंकि, महंगाई टैक्स रेवेन्यू को बढ़ा देती है। IMF ने भी माना है कि जापान बढ़ी हुई महंगाई और नॉमिनल वेज गेन के दौर में टैक्स कलेक्शन को मजबूती मिली है। हालांकि, अर्थशास्त्री मानते हैं कि यह व्यवस्था हमेशा नहीं चल सकती। IMF का अनुमान है कि आगे जापान Japan पर बढ़ते ब्याज और तेजी से वृद्ध होती आबादी से जुड़े खर्च का दबाव बढ़ेगा।

दुनिया येन के पीछे क्यों?

जब किसी देश की ब्याज दर लंबे समय तक बहुत कम रहती हैं, तो उसकी करेंसी फंडिंग का स्रोत बन जाती है। निवेशक उस मुद्रा में कम लागत पर पैसा जुटाते हैं और उसे ज्यादा रिटर्न देने वाले देशों के एसेट्स में लगाते हैं। येन ने लंबे समय तक यही भूमिका निभाई है। लेकिन, Yen Carry trade का सबसे बड़ा रिस्क बढ़ती ब्याज दर है। इसकी वजह से ग्लोबल मार्केट्स में लिक्विडिटी घट रही है।

भारत के लिए क्यों बड़ा खतरा?

भारत जैसे इमर्जिंग मार्केट के लिए सस्ती फंडिंग हर मोर्चे पर अहम होती है। इक्विटी मार्केट से लेकर इन्फ्रास्ट्रक्चर तक सस्ता कर्ज ग्रोथ में अहम भूमिका निभाता है। लेकिन, येन की बढ़ती ब्याज दर भारत जैसे बाजारों के लिए फंडिंग का संकट खड़ा कर सकती है।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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