बिजनेस

'AI के गॉडफादर' ने छोड़ा गूगल का साथ, होंगे ऐसे खुलासे कि हिल जाएगी दुनिया

एआई के गॉडफादर कहे जाने वाले ज्यॉफ्रे हिंटन ने गूगल से इस्तीफा दे दिया है। साथ ही उन्होंने एआई बनाने के अपने वर्क पर अफसोस भी जताया है। वैसे टेक लीडर्स एआई को बहुत अहम भी मानते हैं।

Image

एआई के गॉडफादर ज्यॉफ्रे हिंटन ने गूगल छोड़ी

Photo : AP
KEY HIGHLIGHTS
  • ज्यॉफ्रे हिंटन ने गूगल से दिया इस्तीफा
  • एआई के गॉडफादर कहे जाते हैं हिंटन
  • अपने काम पर जताया अफसोस

Geoffrey Hinton quits Google : आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के गॉड फादर कहे जाने वाले ज्यॉफ्रे हिंटन ने दिग्गज टेक कंपनी गूगल से इस्तीफा दे दिया है। हिंटन एआई के डेवलप करने वाले शुरुआती लोगों में से हैं। 2012 में, टोरंटो विश्वविद्यालय में हिंटन और उनके दो ग्रेजुएट स्टूडेंट्स ने ऐसी टेक्नोलॉजी बनाई जो एआई सिस्टम के लिए इंटेलेक्चुअल फाउंडेशन बन गई।इसके लिए टेक इंडस्ट्री की सबसे बड़ी कंपनियों का मानना है कि ये उनके फ्यूचर की चाबी है।

आलोचकों में हो गए शामिल

हिंटन अब आधिकारिक तौर पर उन आलोचकों में शामिल हो गए, जिनका मानना है कि टेक कंपनियां जेनेरिक एआई पर बेस्ड प्रोडक्ट बनाने के अपने आक्रामक अभियान के साथ खतरे की तरफ भाग रही हैं। जेनेरिक एआई एक ऐसी टेक्नोलॉजी है, जो चैटजीपीटी जैसे चैटबॉट्स को पावर देती है।

अपने काम पर है पछतावा

ईटी की रिपोर्ट में हिंटन के एक इंटरव्यू के हवाले से कहा गया है कि एक दशक से अधिक समय तक नौकरी करने के बाद उन्होंने गूगल का साथ छोड़ दिया है। वह अब एआई के जोखिमों के बारे में स्वतंत्र रूप से बोल सकते हैं।

ऐसे में हिंटन एआई के खतरों को लेकर और भी कई बड़े खुलासे कर सकते हैं। हिंटन ने एआई बनाने पर पछतावा भी जताया। हालांकि वे खुद को तसल्ली देते हैं कि अगर मैं ऐसा न करता तो कोई और करता।

इंसानियत के लिए खतरा

इंडस्ट्री लीडर्स के मुताबिक नया एआई सिस्टम 1990 के दशक की शुरुआत में वेब ब्राउजर की शुरुआत जितना अहम हो सकता है। वहीं लेकिन कई इंडस्ट्री के लोगों को डर सता रहा है कि ये खतरनाक चीज भी है। जल्द ही इससे नौकरियों पर संकट आ सकता है। बल्कि इस टेक्नोलॉजी को मानवता के लिए भी जोखिम माना जा रहा है।हिंटन के मुताबिक यह देखना मुश्किल है कि आप बुरे लोगों को बुरी चीजों के लिए इसका (एआई) इस्तेमाल करने से कैसे रोक सकते हैं।

1000 से अधिक टेक लीडर्स ने जताई चिंता

सैन फ्रांसिस्को के स्टार्टअप ओपनएआई द्वारा मार्च में चैटजीपीटी का एक नया वर्जन जारी करने के बाद, 1,000 से अधिक टेक लीडर्स और रिसर्चर्स ने नए सिस्टम के डेवलपमेंट पर छह महीने की मोराटोरियम लगाने की मांग की थी। इसके लिए उन्होंने एक ओपन लेटर पर साइन किए थे। उन्होंने दलील दी थी कि एआई टेक "समाज और मानवता के लिए गहरा जोखिम" पैदा करती है।

Kashid Hussain
काशिद हुसैन author

<p>काशिद हुसैन अप्रैल 2023 से Timesnowhindi.Com (टाइम्स नाउ नवभारत) के साथ काम कर रहे हैं। यहां पर वे सीनियर कॉरेस्पोंडेंट हैं। टाइम्स नाउ नवभारत की बिजनेस टीम में वह शेयर मार्केट, म्यूचुअल फंड और आर्थिक जगत से जुड़ी सभी तरह की स्टोरी और वेब स्टोरी करते हैं। रिसर्च आधारित स्टोरी के लिए नए एंगल तलाश करना और रीडर्स की रुचि के अनुसार कॉपी लिखने पर फोकस रहता है। शेयर बाजार में खास रुचि है और इससे जुड़ी रियल टाइम खबरें कम समय में लगाने में विशेषज्ञता है। मीडिया में काम करने का 8 वर्षों का अनुभव है, जिसमें गुडरिटर्न्स और शेयर मंथन वेबसाइटों के अलावा निवेश मंथन पत्रिका में भी काम किया है। दिल्ली यूनिवर्सिटी से हिंदी पत्रकारिता में ग्रेजुएशन के बाद आईआईएमसी, नई दिल्ली से रेडियो एंव टेलीविजन में पोस्ट ग्रेजुएशन की है। ग्रेजुएशन के दौरान सहारा समय और सिटी न्यूज में इंटर्नशिप के साथ-साथ अखबार और वेबसाइट के लिए लिखना शुरू कर दिया था। काशिद को किताबें पढ़ना, फिल्में देखना और क्रिकेट में रुचि है। बिजनेस के अलावा खेल जगत और इंटरनेशनल खबरों में भी रुचि है।<br></p>

और पढ़ें
End of Article