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टाटा ग्रुप में होगा बदलाव, क्या मेहली मिस्त्री बनेंगी आजीवन ट्रस्टी? टाटा ट्रस्ट ने रखा प्रस्ताव

Tata News: टाटा ट्रस्ट ने तीन प्रमुख चैरिटेबल संस्थाओं में मेहली मिस्त्री को ट्रस्टी के रूप में दोबारा नियुक्त करने का प्रस्ताव रखा है। इस प्रस्ताव के तहत मिस्त्री को आजीवन ट्रस्टी बनाया जा सकेगा। यह कदम उनके पिछले कार्यकाल और ट्रस्ट में उनके योगदान को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, जिससे ट्रस्ट के फैसलों में स्थिरता बनी रहे।

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टाटा ट्रस्ट में होगा बड़ा बदलाव

Tata News: टाटा ट्रस्ट ने अपनी तीन प्रमुख चैरिटेबल संस्थाओं में मेहली मिस्त्री को ट्रस्टी के रूप में दोबारा नियुक्त करने का प्रस्ताव रखा है। इस नियुक्ति से मिस्त्री आजीवन ट्रस्टी बन जाएंगे। सूत्रों के अनुसार टाटा ट्रस्ट के सीईओ ने ट्रस्ट के अन्य सदस्यों को मिस्त्री की पुनर्नियुक्ति का प्रस्ताव बताया। इस योजना के तहत मिस्त्री को तीन ट्रस्टों में नियुक्त किया जाना है।

  • सर रतन टाटा ट्रस्ट
  • सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट
  • बाई हीराबाई जमसेतजी टाटा नवसारी चैरिटेबल इंस्टिट्यूशन

मिस्त्री का पिछला कार्यकाल

मेहली मिस्त्री पहली बार 2022 में टाटा ट्रस्ट के ट्रस्टी बने थे। उनका तीन साल का कार्यकाल 28 अक्टूबर को समाप्त हो रहा है। मिस्त्री को टाटा समूह के दिवंगत प्रमुख रतन टाटा के करीबी माना जाता है।

ट्रस्ट के निर्णय और शर्तें

न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा सूत्रों के अनुसार मिस्त्री और तीन अन्य ट्रस्टी प्रमित झवेरी, जहांगीर एचसी जहांगीर और डेरियस खंबाटा ने वेणु श्रीनिवासन को ट्रस्टी और वाइस चेयरमैन के रूप में दोबारा नियुक्त करने के समय एक शर्त रखी थी। शर्त यह थी कि भविष्य में किसी भी ट्रस्टी की नियुक्ति केवल सभी ट्रस्टी की सर्वसम्मति से ही होनी चाहिए अन्यथा पूर्व स्वीकृतियां रद्द की जा सकती हैं।

ट्रस्ट के भीतर मतभेद

हालांकि मिस्त्री के आजीवन ट्रस्टी बनने के प्रस्ताव को लेकर ट्रस्ट के अंदर मतभेद की खबरें भी हैं। एक पक्ष वर्तमान चेयरमैन नोएल टाटा के साथ जुड़ा माना जा रहा है जबकि दूसरा पक्ष रतन टाटा के पुराने समर्थकों से संबंधित है।

सरकार तक मामला पहुंचा

इस मामले की जानकारी सरकार तक भी पहुंची। इसके बाद नोएल टाटा और टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात की। सूत्रों के अनुसार सरकार ने दोनों पक्षों को सुझाव दिया कि वे इस मामले का समाधान आपसी सहमति से करें और इसे सार्वजनिक मतभेद का रूप न दें। सरकार ने यह भी कहा कि टाटा समूह का भारतीय अर्थव्यवस्था में विशेष महत्व है।

टाटा ट्रस्ट और टाटा संस का संबंध

टाटा ट्रस्ट के पास टाटा संस में 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है। टाटा संस 156 साल पुराने टाटा समूह की कंपनियों की प्रवर्तक कंपनी है। इस वजह से ट्रस्ट के निर्णय का टाटा समूह और भारतीय उद्योग पर व्यापक असर पड़ सकता है।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

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