Air India New CEO search : टाटा ग्रुप अपनी प्रमुख एयरलाइन एयर इंडिया के लिए नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की तलाश कर रहा है। इसकी मुख्य वजह अहमदाबाद में हुए विमान हादसे के बाद एयरलाइन की स्थिति में आया उतार-चढ़ाव और निजीकरण के बाद भी कंपनी की वित्तीय हालत का पूरी तरह से ठीक न हो पाना बताया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, टाटा ग्रुप के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन इस पद के लिए कई अनुभवी लोगों से बातचीत कर चुके हैं। इन संभावित उम्मीदवारों को बड़ी एयरलाइनों को चलाने का अच्छा अनुभव है।
मौजूदा सीईओ कैंपबेल विल्सन की भूमिका
आईएएनएस की रिपोर्ट के मुताबिक एयर इंडिया के मौजूदा सीईओ कैंपबेल विल्सन का कॉन्ट्रैक्ट साल 2027 के मध्य तक है। लेकिन सूत्रों का कहना है कि वे आगे एयर इंडिया के साथ काम जारी रखने में ज्यादा रुचि नहीं दिखा रहे हैं। ऐसे में अगर नेतृत्व में बदलाव होता है, तो इसे आपसी सहमति से अलग होने की प्रक्रिया माना जाएगा। कैंपबेल विल्सन ने जुलाई 2022 में एयर इंडिया की कमान संभाली थी। उस समय टाटा ग्रुप ने भारत सरकार से एयरलाइन को खरीदा था। विल्सन का जन्म न्यूजीलैंड में हुआ है और वे 53 साल के हैं। इससे पहले वे सिंगापुर एयरलाइंस और उसकी लो-कॉस्ट एयरलाइन स्कूट में सीनियर मैनेजमेंट की भूमिका निभा चुके हैं।
वित्तीय लक्ष्य पूरे न होने की चिंता
लीडरशिप बदलने की एक बड़ी वजह यह भी है कि एयर इंडिया शायद 31 मार्च तक ब्रेक-ईवन (जहां कंपनी को न फायदा होता है, न नुकसान) के लक्ष्य को हासिल नहीं कर पाएगी। यह लक्ष्य एयरलाइन के पुनरुद्धार के लिए काफी अहम माना जा रहा था। जून 2025 में अहमदाबाद में हुआ बोइंग 787 ड्रीमलाइनर विमान हादसा एयर इंडिया के लिए बड़ा झटका साबित हुआ। इस दुर्घटना ने न केवल कंपनी की छवि को नुकसान पहुंचाया, बल्कि उसकी रिकवरी योजना को भी प्रभावित किया।
विमान हादसे के बाद बढ़ी सुरक्षा चिंताएं
अहमदाबाद प्लेन क्रैश के बाद एयर इंडिया को लेकर सुरक्षा संबंधी चिंताएं भी सामने आई हैं। यात्रियों का भरोसा बनाए रखना एयरलाइन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। यह स्थिति एयर इंडिया के पुनरुद्धार की रफ्तार को और धीमा कर रही है।
फ्लीट मॉडर्नाइजेशन में आ रही रुकावटें
हालांकि टाटा ग्रुप ने एयर इंडिया के लिए नए विमानों की खरीद, पुराने विमानों के नवीनीकरण और रूट नेटवर्क बढ़ाने के लिए भारी निवेश किया है, लेकिन इन योजनाओं में कई अड़चनें आ रही हैं। नए विमानों की डिलीवरी में देरी हो रही है और पुराने विमानों के रीफर्बिशमेंट का काम भी तय समय पर पूरा नहीं हो पा रहा। इससे एयरलाइन की सेवाओं और ऑपरेशनल क्षमता पर असर पड़ रहा है।
ऑपरेशनल समस्याओं से बढ़ी लागत
एयर इंडिया को कुछ अंतरराष्ट्रीय ऑपरेशनल चुनौतियों का भी सामना करना पड़ रहा है। उदाहरण के तौर पर, पाकिस्तान द्वारा भारतीय विमानों के लिए एयरस्पेस बंद करने के कारण कई उड़ानों को लंबा रास्ता अपनाना पड़ रहा है। इससे ईंधन खर्च बढ़ गया है और ऑपरेशन की कुल लागत में इजाफा हुआ है, जिसका सीधा असर एयरलाइन के वित्तीय प्रदर्शन पर पड़ा है।
एयर इंडिया एक्सप्रेस में भी बदलाव संभव
खबरों के अनुसार, टाटा ग्रुप की लो-कॉस्ट एयरलाइन एयर इंडिया एक्सप्रेस में भी बड़े नेतृत्व बदलाव हो सकते हैं। इससे साफ है कि टाटा ग्रुप पूरे एविएशन बिजनेस को नए सिरे से मजबूत करने की तैयारी में है।
आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार
इस पूरे मामले पर आईएएनएस द्वारा एयर इंडिया से सवाल पूछे गए थे, लेकिन खबर लिखे जाने तक कंपनी की ओर से कोई आधिकारिक जवाब नहीं आया। कुल मिलाकर, टाटा ग्रुप एयर इंडिया को एक बार फिर मजबूती से खड़ा करने के लिए बड़े फैसले लेने की तैयारी में है, जिसमें नए सीईओ की नियुक्ति एक अहम कदम माना जा रहा है।
