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AC कोच में सुहागरात की सजावट के बाद अब चलती ट्रेन में पूजा-पाठ... क्या सच में ऐसा करने की है इजाजत? जानिए रेलवे का सख्त नियम

चलती ट्रेन में पूजा-पाठ और उससे पहले फूलों से सजावट का वीडियो वायरल होने के बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या ऐसा कर सकते हैं ? क्या रेलवे कोच में पूजा की जा सकती है? कैसे सैलून कोच की बुकिंग होती है?

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क्या सच में ऐसा करने की है इजाजत? जानिए रेलवे का सख्त नियम

भारतीय रेलवे में सफर के दौरान अजीबोगरीब वाकये सामने आना अब आम बात होती जा रही है; कुछ समय पहले जहां ट्रेन के फर्स्ट क्लास एसी कोच को सुहागरात की तरह सजाने के विवाद ने सोशल मीडिया पर तूल पकड़ा था, वहीं अब चलती ट्रेन में रुद्राभिषेक पूजा-पाठ किए जाने का एक नया वीडियो वायरल होने के बाद हंगामा शुरू हो गया है। वायरल वीडियो में कुछ पंडित और लोग ट्रेन के भीतर पूरे विधि-विधान से धार्मिक अनुष्ठान करते दिख रहे हैं, जिसे देखने के बाद आम जनता ने सह-यात्रियों की सुरक्षा और रेलवे के नियमों को लेकर तीखे सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। ऐसे में आइए जानते हैं AC कोच में क्या पूजा-पाठ और ऐसी सजावट करने की इजाजत है? और इसके लिए क्या कहता है रेलवे (Indian Railway) का नियम?

पूजा-पाठ करने वाला क्या है मामला?

इस मामले पर विवाद बढ़ता देख वेस्टर्न रेलवे (Western Railway) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक आधिकारिक बयान जारी कर सफाई दी कि यह घटना किसी सामान्य यात्री कोच की नहीं है, बल्कि एक निजी संस्था द्वारा ₹3,08,580 का एडवांस भुगतान करके 8 जुलाई 2026 को बुक की गई IRCTC की विशेष 'सैलून कार' (Saloon Car) की है। इस सैलून कोच को 10 जुलाई को नई दिल्ली से मुंबई जाने वाली पश्चिम एक्सप्रेस (ट्रेन नंबर 12926) में अलग से जोड़ा गया था, जिससे आम यात्रियों की सुरक्षा या सुविधा से कोई समझौता नहीं हुआ, क्योंकि सैलून कार नियमित ट्रेन का हिस्सा न होकर एक पूरी तरह से निजी और लग्जरी रेल कार होती है जिसका इस्तेमाल आमतौर पर वीआईपी या वरिष्ठ अधिकारियों के लिए किया जाता है और इसमें एयर-कंडीशंड बेडरूम, किचन और लिविंग एरिया जैसी तमाम आलीशान सुविधाएं होती हैं।

रेलवे का नियम क्या कहता है?

रेलवे के मौजूदा नियमों के मुताबिक, कोई भी आम नागरिक या प्राइवेट संस्था IRCTC की वेबसाइट पर जाकर Full Tariff Rate (FTR) सर्विस के तहत पूरा सैलून कोच अपने निजी इस्तेमाल के लिए एडवांस बुक कर सकती है, जिसका किराया दूरी और रूट के हिसाब से 1 लाख से लेकर 3 लाख रुपये तक जाता है। यदि कोई यात्री पूरा सैलून कोच बुक करता है, तो वह सुरक्षा गाइडलाइंस का पालन करते हुए अपनी आस्था के अनुसार अंदर कोई भी धार्मिक अनुष्ठान या पूजा-पाठ करने के लिए स्वतंत्र है, बशर्ते उससे ट्रेन संचालन में देरी न हो या सह-यात्रियों को कोई असुविधा न पहुंचे, जिसके लिए रेलवे बुकिंग के समय ही ₹50,000 की रिफंडेबल सिक्योरिटी मनी भी जमा कराता है।

हालांकि, सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भारतीय रेलवे की सामान्य या नियमित ट्रेनों (जैसे स्लीपर या सामान्य एसी कोच) में किसी भी प्रकार का सार्वजनिक धार्मिक अनुष्ठान, लाउडस्पीकर बजाना या पूजा-पाठ करना पूरी तरह से प्रतिबंधित और दंडनीय है; इसके विपरीत केवल 'भारत गौरव' (Bharat Gaurav) जैसी विशेष टूरिस्ट ट्रेनों में, जो विशेष रूप से धार्मिक पर्यटन और तीर्थयात्रा के उद्देश्य से ही चलाई जाती हैं, वहां रेलवे द्वारा निर्धारित नियमों के दायरे में ही धार्मिक गतिविधियों की अनुमति दी जाती है। इस प्रकार, चलती ट्रेन में पूजा का यह वायरल वीडियो पूरी तरह कानूनी रूप से वैध था क्योंकि यह एक प्राइवेट सैलून कार के भीतर किया गया था, लेकिन आम यात्रियों को यह सख्त हिदायत है कि वे अपनी नियमित यात्रा के दौरान ऐसा कोई कदम न उठाएं जो रेलवे एक्ट के तहत नियमों का उल्लंघन माना जाए।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठी author

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिच... और देखें

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