अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध आज 5वें दिन में पहुंच गया है। इसका असर दुनियाभर के शेयर बाजारों पर हुआ है। भारतीय बाजार भी अछूता नहीं है। मंगलवार को बाजार बंद होने के कारण आज होली के दिन बाजार खुला है। गिफ्टी निफ्टी से आज भी बाजार में बड़ी गिरावट के संकेत मिल रहे हैं। गिफ्टी निफ्टी 540 अंक टूटकर ट्रेड कर रहा है। वहीं, अमेरिकी समेत दुनियाभर के बाजारों में बड़ी गिरावट आई है। इसका असर आज भारतीय बाजार पर देखने को मिल सकता है। सेंसेक्स और निफ्टी में आज भी बड़ी गिरावट आ सकती है।
मार्केट एक्सपर्ट का कहना है कि सेंसेक्स शॉर्ट-टर्म और मीडियम-टर्म एवरेज से काफी नीचे है, और इंट्राडे चार्ट्स पर, यह एक कमजोर फॉर्मेशन बनाए हुए है, जो काफी हद तक नेगेटिव है। सेंसेक्स में 80,000 एक मुख्य सपोर्ट ज़ोन के तौर पर काम करेगा। जब तक सेंसेक्स इससे ऊपर ट्रेड कर रहा है, तब तक पुलबैक फॉर्मेशन जारी रहने की संभावना है। ऊपर की तरफ, यह 80,500 - 80,700 तक बाउंस बैक कर सकता है। वहीं, अगर दूसरी तरफ, सेंसेक्स 80,000 से नीचे जाता है तो यह 79,700 - 79,300 तक फिसल सकता है। सोमवार को सेंसेक्स 80,238 अंक पर बंद हुआ था। निफ्टी की बात करें तो 24,800 स्ट्राइक पर भारी पुट राइटिंग और 25,000 स्ट्राइक पर एग्रेसिव कॉल राइटिंग है। अगर आज बाजार में रिकवरी आती है तो निफ्टी 50 शॉर्ट टर्म में 25,100 के लेवल को छूने की कोशिश करेगा। वहीं, गिरावट आने पर निफ्टी 24,300 तक पहुंच सकता है।
क्यों टूट रहा भारतीय शेयर बाजार?
ईरान और अमेरिका में महायुद्ध: ईरान और अमेरिका के बीच जारी युद्ध और गंभीर हो गया है। युद्ध आज 5वें दिन में पहुंच गया है। ईरान के सुप्रीम लीडर, अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के बाद मिडिल ईस्ट में संघर्ष और गहरा गया है। इससे तेल सप्लाई प्रभावित हुआ है। साथ ही दुनियाभर में डर का माहौल बना है। इसके चलते बाजार में बड़ी गिरावट जारी है।
कच्चे तेल में आग: मिडिल ईस्ट में मिसाइल हमलों के कारण सप्लाई रुकने का डर बढ़ गया है। ब्रेंट क्रूड 85 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है। जल्द ही कच्चा तेल $100 प्रति बैरल तक पहुंच सकता है। बता दें कि दुनिया का 20% तेल 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' से गुजरता है, जो अब युद्ध के निशाने पर है।
रुपया हुआ कमजोर: ईरान और अमेरिका-इजरायल गठबंधन के बीच बढ़ते तनाव से रुपया एक महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया है। रुपया 91 प्रति डॉलर के स्तर को पार कर चुका है। इसका असर भी बाजार पर हुआ है।
विदेशी निवेशकों (FII) की भारी बिकवाली: विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने पिछले सत्र में 7,536 करोड़ रुपये के शेयर बेचकर बाजार का मूड बिगाड़ दिया है। हालांकि, घरेलू निवेशकों (DII) ने 12,293 करोड़ रुपये की खरीदारी कर बाजार को सहारा देने की कोशिश की है।
अनिश्चितता का माहौल: मिडिल ईस्ट में 'स्पाइरलिंग सिक्योरिटी सिचुएशन' (लगातार बिगड़ते हालात) ने निवेशकों के बीच जोखिम लेने की क्षमता खत्म कर दी है।
निवेशक अब क्या करें?
जल्दबाजी में न बेचें: संकट के समय घबराहट में शेयर बेचना (Panic Selling) हमेशा गलत रणनीति साबित होती है।
इतिहास से सीखें: कोविड, रूस-यूक्रेन युद्ध और गाजा संघर्ष जैसे बड़े संकटों का असर 6 महीने बाद बाजार पर नहीं दिखा था। यह संकट भी ज्यादा समय तक टिकने वाला नहीं है।
खरीदारी का मौका: बाजार में आई इस गिरावट का इस्तेमाल अच्छे फंडामेंटल वाले शेयरों को धीरे-धीरे (Gradually) खरीदने के लिए करें।
इन सेक्टरों पर नजर: बैंकिंग, ऑटोमोबाइल, कैपिटल गुड्स और डिफेंस जैसे घरेलू खपत वाले सेक्टरों में पैसा लगाने का यह सही समय हो सकता है।
