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स्टार्टअप कंपनियों की बजट में कर छूट समयसीमा बढ़ाने, पूंजीगत लाभ कर में राहत की मांग

उद्योग जगत आयकर कानून की धारा 80-आईएसी के तहत डीपीआईआईटी से मान्यता-प्राप्त स्टार्टअप को होने वाले लाभ पर 100 प्रतिशत आयकर छूट की समय-सीमा को बढ़ाने की भी मांग कर रहा है। यह छूट कंपनी के शुरुआती 10 वर्षों में किसी भी लगातार तीन वर्षों के लिए उपलब्ध होती है, लेकिन वर्तमान में इसकी पात्रता एक अप्रैल 2030 तक सीमित है।

Tax Budget

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण एक फरवरी को वित्त वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट पेश करेंगी। (फोटो क्रेडिट-iStock)

भारतीय स्टार्टअप कंपनियों ने आगामी बजट में कर छूट समयसीमा बढ़ाने और पूंजीगत लाभ कर में राहत की मांग की है। उनका कहना है कि इससे निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा और कर बचत से मिली राशि का उपयोग कारोबार विस्तार एवं प्रौद्योगिकी निवेश में किया जा सकेगा। उद्योग जगत का कहना है कि वित्त वर्ष 2025-26 से सभी निवेशकों के लिए ‘एंजेल टैक्स’ को पूरी तरह खत्म किए जाने की घोषणा से निवेश माहौल में सुधार हुआ है। हालांकि अब स्टार्टअप और निवेशकों को खासकर विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए पूंजीगत लाभ कर में भी राहत की जरूरत है।

क्या है एंजेल टैक्स

एंजेल टैक्स वह कर है, जो स्टार्टअप को उसके शेयर के उचित बाजार मूल्य से अधिक कीमत पर निवेश मिलने की स्थिति में उस अतिरिक्त राशि पर लगाया जाता है। शिक्षा क्षेत्र से जुड़े स्टार्टअप ‘आसोका’ के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) प्रवीण सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत किए गए सुधारों ने मजबूत आधार तैयार किया है और आगामी बजट इन सुधारों को जमीनी स्तर पर लागू करने का अवसर प्रदान करेगा।

उन्होंने कहा कि एंजेल टैक्स हटने से निवेशकों का भरोसा बढ़ा है और अब विदेशी निवेशकों के लिए दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर (एलटीसीजी) को तर्कसंगत बनाने की जरूरत है, जिस पर वर्तमान में करीब 12.5 प्रतिशत कर लगता है। सिंह ने कहा कि इससे शिक्षा जैसे उच्च प्रभाव वाले क्षेत्रों में वैश्विक निवेश को बढ़ावा मिलेगा।

स्टार्टअप में निवेश से होने वाले लाभ पर पूंजीगत लाभ कर लगता है, जो अल्पकालिक और दीर्घकालिक होता है। यदि शेयर 24 महीने से कम समय में बेचे जाते हैं, तो अल्पकालिक पूंजीगत लाभ कर (एसटीसीजी) लगता है जबकि 24 महीने से अधिक समय पर दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर लागू होता है।

आयकर छूट की समय-सीमा बढ़ाने की मांग

इसके अलावा, उद्योग जगत आयकर कानून की धारा 80-आईएसी के तहत डीपीआईआईटी से मान्यता-प्राप्त स्टार्टअप को होने वाले लाभ पर 100 प्रतिशत आयकर छूट की समय-सीमा को बढ़ाने की भी मांग कर रहा है। यह छूट कंपनी के शुरुआती 10 वर्षों में किसी भी लगातार तीन वर्षों के लिए उपलब्ध होती है, लेकिन वर्तमान में इसकी पात्रता एक अप्रैल 2030 तक सीमित है। स्टार्टअप चाहते हैं कि इसे 2032 या 2035 तक बढ़ाया जाए।

निर्माण क्षेत्र से जुड़े स्टार्टअप ‘पावरप्ले’ के सह-संस्थापक एवं सीईओ ईश दीक्षित ने कहा कि एंजेल टैक्स का हटना शुरुआती चरण के स्टार्टअप के लिए अहम कदम है, लेकिन विदेशी निवेश से जुड़े पूंजीगत लाभ कर को लेकर अभी भी स्पष्टता और राहत जरूरी है।

सेवा क्षेत्र के स्टार्टअप ‘यूक्लीन’ के संस्थापक एवं सीईओ अरुणाभ सिन्हा ने कहा कि सेवा आधारित और परिसंपत्ति-प्रधान स्टार्टअप फर्म के लिए किफायती ऋण तक बेहतर पहुंच जरूरी है। उन्होंने सुझाव दिया कि ब्याज सब्सिडी योजनाएं या प्राथमिकता क्षेत्र ऋण का दर्जा विस्तार में मदद कर सकता है।

स्टार्टअप और निजी कंपनियों के आंकड़े जुटाने वाली कंपनी ‘ट्रैक्सन’ के मुताबिक, भारतीय प्रौद्योगिकी स्टार्टअप ने 2025 में 10.5 अरब डॉलर का वित्त जुटाया, जो 2024 के 12.7 अरब डॉलर से 17 प्रतिशत और 2023 के 11 अरब डॉलर से चार प्रतिशत कम है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण एक फरवरी को वित्त वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट पेश करेंगी।

(इनपुट-भाषा)

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गौरव तिवारी
गौरव तिवारी author

गौरव तिवारी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में टेक और ऑटो बीट को कवर करते हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 9 वर्षों के अनुभव के साथ, गौरव तकनीकी दुनिया की तेजी से ... और देखें

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