फरवरी में अबतक विदेशी निवेशकों ने शेयर बाजार में डाले ₹19,675 करोड़, फिर सेंसेक्स-निफ्टी क्यों फिसले?
- Edited by: आलोक कुमार
- Updated Feb 15, 2026, 02:34 PM IST
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के असर को लेकर आईटी शेयर भारी दबाब में है। भारतीय आईटी कंपनियों के शेयरों में बड़ी गिरावट देखी गई है। इसके चलते विदेशी निवेशकों की ओर से खरीदारी के बावजूद बाजार में तेजी नहीं आ रही है।
सेंसेक्स-निफ्टी क्यों फिसले?
फरवरी महीने में विदेशी निवशक भारतीय बाजार में लौट आए हैं। अमेरिका-भारत ट्रेड डील के बाद विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने फरवरी के पहले दो सप्ताह में भारतीय शेयर बाजार में 19,675 करोड़ रुपये डाले हैं। डिपॉजिटरी के आंकड़ों के मुताबिक, एफपीआई का यह प्रवाह लगातार 3 माह की भारी बिकवाली के बाद हुआ है। एफपीआई ने जनवरी में भारतीय शेयर बाजार से 35,962 करोड़ रुपये, दिसंबर में 22,611 करोड़ रुपये और नवंबर में 3,765 करोड़ रुपये निकाले थे। हालांकि, अब जब विदेशी निवेशक भारतीय बाजार में पैसा डाल रहे हैं तो भी शेयर बाजार टूट रहा है? आखिर इसकी वजह क्या है? आइए जानते हैं।
आईटी शेयर में गिरावट से फिसला बाजार
भारतीय बाजार में विदेशी निवेशक ने फरवरी में पैसा जरूर लगाया है लेकिन आईटी शेयरों ने बाजार का मूड खराब कर दिया है। एक्सचें के आंकड़ों के अनुसार 13 फरवरी को निफ्टी में 336 अंक की गिरावट के दौरान एफपीआई ने 7,395 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। इस सप्ताह ’एंथ्रोपिक झटके’ की वजह से आईटी शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली। आईटी शेयरों में यह बिकवाली एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के असर के अंदेशा के कारण है।
2025 में बिकवाली का बना रिकॉर्ड
कुल मिलाकर, 2025 में, एफपीआई ने भारतीय शेयरों से शुद्ध रूप से 1.66 लाख करोड़ रुपये (18.9 अरब डॉलर) की निकासी की है। यह एफपीआई के प्रवाह की दृष्टि से सबसे खराब वर्षों में रहा है।
आंकड़ों के मुताबिक, एफपीआई ने इस महीने (13 फरवरी तक) शेयरों में 19,675 करोड़ रुपये का निवेश किया है।
विदेशी निवेशकों को लेकर मार्केट एक्सपर्ट की राय
मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट रिसर्च इंडिया के प्रमुख प्रबंधक-शोध हिमांशु श्रीवास्तव ने कहा कि हाल की खरीदारी को वैश्विक वृहद चिंताओं में कमी, खासकर अमेरिका के नरम महंगाई आंकड़ों से समर्थन मिला है। इससे उन की भारत समेत उभरते बाजार में जोखिम लेने की क्षमता बेहतर हुई है।
इसी तरह की राय जताते हुए एंजेल वन के वरिष्ठ बुनियादी विश्लेषक वकारजावेद खान ने कहा कि यह प्रवाह अमेरिका-भारत व्यापार करार, समर्थन देने वाले 2026-27 के आम बजट और वैश्विक स्तर पर अनिश्चितताओं में कमी की वजह से देखने को मिला है।
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